हिंदी सिनेमा में काम करने वाले दक्षिण भारतीय कलाकारों को अक्सर उनके बोलने के अंदाज या खास लहजे की वजह से सोशल मीडिया पर आलोचना का निशाना बनाया जाता है। इस तरह के भेदभाव और भाषा आधारित टिप्पणियों पर अभिनेत्री कशिका कपूर ने खुलकर अपनी बात रखी है। उनका मानना है कि किसी भी कलाकार का मूल्यांकन केवल उसके अभिनय कौशल और मंच पर उसकी उपस्थिति के आधार पर होना चाहिए, न कि इस बात पर कि वह किस लहजे में संवाद बोलता है। फिल्म जगत को अलग-अलग क्षेत्रीय सीमाओं में बांटने के बजाय एक साझा मंच के रूप में देखा जाना चाहिए।
सिनेमा में भाषा नहीं बननी चाहिए कोई दीवार
कशिका कपूर के अनुसार, कई बार ऐसा देखा गया है कि गैर-हिंदी पृष्ठभूमि से आने वाले कलाकारों को उनके उच्चारण के लिए अनुचित रूप से परखा जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक परफॉर्मर के लिए भाषा कभी भी कोई रुकावट नहीं बननी चाहिए। भारतीय मनोरंजन उद्योग को तेलुगु फिल्म उद्योग या हिंदी फिल्म उद्योग जैसी संकीर्ण श्रेणियों में विभाजित करने की प्रवृत्ति पूरी तरह अनुचित है। जब कोई कलाकार कैमरे के सामने आता है, तो उसकी मूल पहचान सिर्फ एक एक्टर के रूप में होनी चाहिए, जिसे दर्शकों तक भावनाएं पहुंचाने की उसकी कला से आंका जाए।
अपने लहजे पर रश्मिका मंदाना का नजरिया
एक्सेंट के आधार पर होने वाली ट्रोलिंग का सामना कर चुकी अभिनेत्रियों में रश्मिका मंदाना का नाम प्रमुखता से सामने आता है। चैट शो ‘कॉफी विद करण’ में अपनी उपस्थिति के दौरान उन्होंने इस बात का जिक्र किया था कि उन्हें अपने पूरे करियर में अपने बोलने के लहजे को लेकर लगातार आलोचनाएं झेलनी पड़ी हैं। हालांकि उन्होंने इस नकारात्मकता को कभी अपने काम के आड़े नहीं आने दिया और अलग-अलग भाषा उद्योगों में काम करना जारी रखा। दक्षिण भारत से ताल्लुक रखने के कारण उनका यह लहजा स्वाभाविक है, और ‘पुष्पा’ फेम इस अभिनेत्री ने हमेशा खुद को किसी एक खास इंडस्ट्री तक सीमित रखने के बजाय विविध भाषाओं के प्रोजेक्ट्स में काम करने को प्राथमिकता दी है।
प्रतिभा और परफॉर्मेंस ही तय करती है असली पहचान
रश्मिका मंदाना का उदाहरण देते हुए कशिका कपूर ने स्पष्ट किया कि ‘द गर्लफ्रेंड’ की अभिनेत्री जिस तरह की नकारात्मक टिप्पणियों का सामना करती हैं, वह उसके बिल्कुल भी योग्य नहीं हैं। हर कलाकार अपनी भूमिका के लिए बेहद कड़ा परिश्रम करता है और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देता है। रश्मिका एक बेहतरीन अदाकारा हैं और किसी को भी उनके एक्सेंट के आधार पर उनके काम को कम आंकने का अधिकार नहीं है। किसी कलाकार की जड़ें और उसकी मूल पृष्ठभूमि उसकी पहचान का वह हिस्सा होती हैं जो उसे दूसरों से अलग बनाती हैं। अंततः पर्दे पर कलाकार का अभिनय ही सबसे बड़ा सच होता है। रश्मिका ‘एनिमल’ जैसी विशाल फिल्मों का हिस्सा बनकर शानदार काम कर चुकी हैं, इसलिए अभिनेताओं को उनके उच्चारण पर घेरने के बजाय उनकी कलात्मक प्रतिभा के लिए सम्मान दिया जाना चाहिए।



















