यूक्रेन की ड्रोन टीमों को अब उन रूसी ड्रोन्स की जासूसी करने का एक अनोखा तरीका मिल गया है जो उन पर नजर रखते हैं। कीव के एक उपकरण स्टार्टअप कोड380 ने एक कॉम्पैक्ट रिसीवर तैयार किया है, जिसका नाम डी-विज़न एसडीआर है। यह छोटा गैजेट कई रूसी ड्रोन्स के लाइव कैमरा वीडियो सिग्नल को हवा में ही पकड़कर सीधे अपनी स्क्रीन पर प्रदर्शित कर देता है। युद्ध के मैदान में अग्रिम मोर्चों पर तैनात यूक्रेनी सैनिकों के लिए यह तकनीक एक उपयोगी सुरक्षा कवच साबित हो रही है।
बिना स्क्रैम्बलिंग के प्रसारित होते हैं वीडियो सिग्नल
रूसी ड्रोन्स अपने कैमरे का वीडियो सिग्नल बिना किसी एन्क्रिप्शन या स्क्रैम्बलिंग के सामान्य वायरलेस माध्यम से प्रसारित करते हैं। इस वजह से उपयुक्त फ्रीक्वेंसी रिसीवर वाला कोई भी व्यक्ति उन दृश्यों को आसानी से लाइव देख सकता है। इस उपकरण की मदद से यूक्रेनी सैन्य इकाइयां किसी ड्रोन के टकराने से पहले ही यह जान सकती हैं कि वह किस दिशा में आगे बढ़ रहा है और उसका पायलट जमीन पर किस लक्ष्य पर निशाना साध रहा है। लक्ष्य की पूर्व जानकारी मिलने से सैनिकों को सुरक्षित स्थानों पर छिपने का कीमती समय मिल जाता है।
हल्का वजन और उन्नत फ्रीक्वेंसी ट्रैकिंग
डी-विज़न एसडीआर उपकरण का कुल वजन लगभग 10 औंस है। यह बाजार में मौजूद अन्य यूक्रेनी मॉडलों की तुलना में आधे से भी कम वजनी है, क्योंकि कुछ प्रतिस्पर्धी उपकरणों का वजन दो पाउंड तक होता है। हल्का और जेब के आकार का होने के कारण सैनिक इसे आसानी से अपने साथ ले जा सकते हैं। इसके अलावा, यह गैजेट उन रेडियो चैनलों को भी पकड़ने में सक्षम है जिनका उपयोग रूस के नए मोल्निया ड्रोन्स ने जून से अपने वीडियो प्रसारण के लिए शुरू किया था।
तकनीकी चुनौतियां और भविष्य के खतरे
यूक्रेन के राष्ट्रपति को सलाह देने वाले रेडियो विशेषज्ञ सेरही 'फ्लैश' बेस्क्रेस्तनोव के अनुसार, अधिकांश डिटेक्टर इन नई आवृत्तियों को देख नहीं पाते या फिर बहुत कमजोर तरीके से पकड़ते हैं। बेस्क्रेस्तनोव ने सैनिकों को सचेत भी किया है कि किसी भी डिटेक्टर पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करना घातक साबित हो सकता है। उन्होंने यह चेतावनी भी दी है कि भविष्य में अगर एनालॉग वीडियो की जगह पूरी तरह डिजिटल वीडियो ट्रांसमिशन ले लेता है, तो इस तरह के रिसीवर काम करना बंद कर देंगे। वहीं अगस्त में कुछ मोल्निया ड्रोन्स के एआई-गाइडेड होने की जानकारी सामने आई थी, जो एनवीडिया चिप्स का इस्तेमाल करते हैं और उड़ान के दौरान कोई भी सिग्नल उत्सर्जित नहीं करते।



















