सिनेमा जगत में कई कलाकारों के शुरुआती सफर से जुड़े ऐसे अनूठे किस्से होते हैं जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगते। हिंदी सिनेमा में अपनी कॉमिक टाइमिंग और खास अभिनय शैली के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता चंकी पांडे के करियर का आगाज भी एक बेहद असामान्य घटना के साथ हुआ था। बड़े पर्दे पर अपनी पहली उपस्थिति दर्ज कराने से पहले वह मुंबई में काम हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहे थे, और इसी दौर में एक शादी समारोह के दौरान उनके जीवन को नया मोड़ मिला।
फाइव स्टार होटल के वॉशरूम की वह अजीब उलझन
यह पूरा वाकया उस समय का है जब चंकी पांडे सिर्फ मॉडलिंग करते थे और हिंदी फिल्मों में कोई ब्रेक हासिल करने की कोशिश में जुटे थे। एक शाम वह एक फाइव स्टार होटल में आयोजित शादी के जश्न में शामिल होने पहुंचे थे। इस समारोह के लिए उन्होंने पारंपरिक पहनावे के तौर पर चूड़ीदार पायजामा पहन रखा था। पार्टी के दौरान काफी ड्रिंक कर लेने के बाद जब वह होटल के वॉशरूम में गए, तो उनके सामने एक अजीबोगरीब परेशानी खड़ी हो गई। उनके चूड़ीदार पायजामे का नाड़ा आपस में बुरी तरह उलझ गया और उसमें एक सख्त गांठ पड़ गई। लाख कोशिशों के बाद भी जब वह उस गांठ को खोल नहीं पाए, तो बेबसी और घबराहट में उन्होंने मदद के लिए आवाज लगानी शुरू कर दी।
जब बचाव में आए प्रोड्यूसर और बदल गई तकदीर
चंकी पांडे की आवाज सुनकर उसी वक्त वॉशरूम में फिल्म निर्माता पहलाज निहलानी पहुंचे। निहलानी ने स्थिति को संभाला और पायजामे की उलझी हुई गांठ को सुलझाने में चंकी की मदद की। इस असहज स्थिति से बाहर निकलने के बाद जब दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई, तो निर्माता ने उनसे उनके पेशे और पहचान के बारे में सवाल किया। चंकी ने तुरंत बताया कि वह मॉडलिंग की दुनिया से ताल्लुक रखते हैं और बड़े पर्दे पर अभिनय के अवसर की तलाश में हैं। उनकी बात सुनकर पहलाज निहलानी प्रभावित हुए और उन्होंने युवक को अगले ही दिन अपने दफ्तर आने का न्योता दे दिया।
आग ही आग से शुरुआत और तेजाब से मिली बड़ी पहचान
अगले दिन जब चंकी उनके कार्यालय पहुंचे, तो निर्माता ने बिना ज्यादा वक्त गंवाए उन्हें साल 1987 में रिलीज हुई फिल्म आग ही आग में काम करने का प्रस्ताव दे दिया। इस तरह एक अप्रत्याशित घटना के जरिए उन्हें बॉलीवुड में पहला बड़ा अवसर मिला। इस डेब्यू के बाद चंकी ने पाप की दुनिया और तेजाब जैसी बेहद सफल फिल्मों में अहम किरदार निभाए। विशेष रूप से तेजाब में अभिनेता अनिल कपूर के दोस्त बब्बन का किरदार निभाकर वह दर्शकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो गए और मुख्यधारा के सिनेमा में अपनी पुख्ता पहचान बनाई।
बांग्लादेशी सिनेमा का स्टारडम और बॉलीवुड में दूसरी पारी
नब्बे के दशक में जब घरेलू हिंदी फिल्म उद्योग में उनके पास प्रस्तावों की कमी होने लगी, तब उन्होंने एक अलग रास्ता चुनते हुए पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश के सिनेमा में कदम रखा। वहां चंकी पांडे ने लगभग सात से आठ वर्षों तक काम किया और स्थानीय दर्शकों के बीच एक बड़े सुपरस्टार का मुकाम हासिल किया। काफी वक्त बाद अपनी पत्नी भावना के मशविरे पर उन्होंने दोबारा भारतीय सिनेमा का रुख करने का फैसला किया। इस दूसरी पारी में उन्होंने खुद को नए सिरे से गढ़ा और कॉमिक किरदारों के साथ नकारात्मक भूमिकाएं भी निभाईं। हाउसफुल श्रृंखला में उनका निभाया आखिरी पास्ता का किरदार बेहद लोकप्रिय साबित हुआ, जबकि साहो और बेगम जान जैसी फिल्मों में उनके विलेन के अंदाज को भी दर्शकों ने खूब सराहा।



















