सिनेमा प्रेमियों के बीच साल 2007 में पर्दे पर आई कॉमेडी फिल्म वेलकम आज भी अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग और यादगार किरदारों के लिए बेहद खास मानी जाती है। अक्षय कुमार, कटरीना कैफ, अनिल कपूर और नाना पाटेकर जैसे बड़े सितारों से सजी इस फिल्म में अभिनेता मुश्ताक खान का स्क्रीन टाइम भले ही सीमित था, लेकिन उनके अभिनय ने दर्शकों पर अमिट छाप छोड़ी। विशेष रूप से उनका बोला गया संवाद, जिसमें वह अपनी नकली टांग और हॉकी खिलाड़ी होने का जिक्र करते हैं, लोगों को आज भी हंसने पर मजबूर कर देता है। हालांकि इस लोकप्रिय दृश्य के पीछे एक बेहद दिलचस्प किस्सा छिपा हुआ है, क्योंकि यह संवाद मूल पटकथा में शामिल ही नहीं था।
शुरुआत में अभिनेता के लिए नहीं था कोई बड़ा रोल
फिल्म के निर्देशन की कमान संभालने वाले अनीस बज्मी ने इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि साझा करते हुए बताया कि निर्माण के शुरुआती दौर में उनके पास मुश्ताक खान के लिए कोई महत्वपूर्ण या विस्तृत भूमिका उपलब्ध नहीं थी। निर्देशक और अभिनेता के बीच पुरानी और गहरी दोस्ती थी, इसलिए उन्होंने अभिनेता से कोई भी बात घुमा-फिराकर नहीं कही। उन्होंने सीधे तौर पर अभिनेता को स्पष्ट कर दिया था कि उन्हें दृश्य में महज बॉडीगार्ड के पीछे खड़े रहने का काम मिलेगा। इसके बावजूद निर्देशक ने अपने मित्र को यह भरोसा दिलाया था कि वह आगे चलकर उनके किरदार के लिए कोई न कोई गुंजाइश जरूर तलाश लेंगे।
मुश्ताक खान को भी अपने निर्देशक मित्र की बात पर पूरा यकीन था, जिसके चलते उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के इस छोटे से हिस्से के लिए अपनी सहमति दे दी थी। फिल्म की शूटिंग शुरू होने के बाद कुछ दिन सामान्य तरीके से बीते, लेकिन अभिनेता के मन में अपने काम को लेकर स्वाभाविक चिंता बनी रही। कुछ दिनों के काम के बाद उन्होंने निर्देशक से अपनी स्थिति साझा करते हुए कहा कि उनके हिस्से में अब तक बोलने के लिए कोई संवाद नहीं आया है।
रातभर जागकर निर्देशक ने पटकथा में किया बदलाव
दोस्त की यह सहज गुजारिश निर्देशक के दिल को छू गई और उनके दिमाग में लगातार यह विचार चलने लगा कि इस भूमिका को किस तरह प्रभावी बनाया जाए। मुश्ताक खान के किरदार में जान फूंकने के इरादे से निर्देशक ने उसी रात पूरी स्क्रिप्ट को दोबारा खंगालना शुरू किया। उन्होंने रातभर बैठकर दृश्य की रूपरेखा बदली और उसी दौरान वह मशहूर संवाद रचा गया, जहां किरदार कहता है कि उसकी एक टांग नकली है और वह कभी हॉकी का बड़ा खिलाड़ी हुआ करता था। इस एक बदलाव ने पूरी स्थिति को साधारण से बेहद मनोरंजक बना दिया।
बड़े कलाकारों ने खुशी-खुशी दिया सहयोग
पटकथा में फेरबदल करने के बाद अगली चुनौती यह थी कि उस दृश्य में मुख्य रूप से मौजूद वरिष्ठ सितारों को इस बदलाव के लिए राजी किया जाए। निर्देशक ने अनिल कपूर और नाना पाटेकर से संपर्क किया और उनसे अनुरोध किया कि वे उस विशेष दृश्य में अपने संवाद न बोलें। उन्होंने दोनों स्थापित अभिनेताओं को स्थिति समझाते हुए कहा कि वे उस पल में थोड़े पीछे रहेंगे और पूरे दृश्य की कमान मुश्ताक खान संभालेंगे।
अनिल कपूर और नाना पाटेकर के साथ निर्देशक के दोस्ताना और मजबूत संबंध होने के कारण दोनों दिग्गजों ने इस प्रस्ताव को तुरंत स्वीकार कर लिया। उन्होंने बिना किसी झिझक के एक सह-कलाकार को मंच देने का फैसला किया। नतीजतन, यह दृश्य जब पर्दे पर उतरा, तो इसने सिनेमाघरों में जबरदस्त ठहाके बटोरे। रिलीज के बाद से यह दृश्य आधुनिक मीम्स और आम बातचीत का अभिन्न अंग बन गया, जिसने एक छोटे से किरदार को सिनेमाई इतिहास में सदाबहार बना दिया।



















