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शाही घराना छोड़कर एक्टर बने विजयेंद्र घटके की कहानी, महाभारत का यह बड़ा रोल ठुकराने का आज भी होगा मलालबॉलीवुड
8 जुल॰ 2026, 2:51 pm (22 दिन पहले)· 2

शाही घराना छोड़कर एक्टर बने विजयेंद्र घटके की कहानी, महाभारत का यह बड़ा रोल ठुकराने का आज भी होगा मलाल

शाही खानदान से ताल्लुक रखने वाले अभिनेता विजयेंद्र घटके ने एक्टिंग के लिए अपना पारिवारिक बिजनेस छोड़ दिया था, लेकिन महाभारत में भीष्म पितामह का रोल ठुकराना उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

भारतीय सिनेमा के इतिहास में ऐसे कई कलाकार हुए हैं जिन्होंने अपनी बेहतरीन अदाकारी और दमदार शख्सियत से दर्शकों के दिलों में अपनी खास जगह बनाई, लेकिन उन्हें कभी वह मुख्यधारा की लोकप्रियता और स्टारडम नहीं मिल सका जिसके वे हकदार थे। सत्तर और अस्सी के दशक के ऐसे ही एक बेहद आकर्षक और प्रभावशाली अभिनेता विजयेंद्र घटके थे। एक भव्य और शाही घराने से संबंध रखने वाले विजयेंद्र ने जब ग्लैमर जगत में कदम रखा था, तो किसी ने नहीं सोचा था कि वह अभिनय को अपना पेशा बनाएंगे। उन्होंने पुणे के एक नामी फिल्म प्रशिक्षण संस्थान से एक्टिंग की बारीकियां सीखीं और फिर हिंदी सिनेमा की दुनिया में कदम रखा। हालांकि, उनकी किस्मत में मुख्य अभिनेता बनने के बजाय एक सहायक कलाकार और कैरेक्टर आर्टिस्ट के रूप में पहचान बनाना ही लिखा था।

शाही विरासत को छोड़कर चुना अभिनय का रास्ता

विजयेंद्र घटके का पारिवारिक इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है। वह इंदौर के एक प्रतिष्ठित शाही घराने से ताल्लुक रखते थे। उनके पिता फतेह सिंह राउत दत्ता जी राजे घटके मराठा साम्राज्य के एक बड़े जागीरदार थे। एक ऊंचे घराने में जन्म लेने के कारण उनके सामने पारिवारिक व्यवसाय और विरासत को संभालने का आसान रास्ता खुला था। इसके बावजूद, विजयेंद्र ने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनी और पारिवारिक कारोबार को छोड़कर अभिनय और मॉडलिंग की दुनिया में अपना करियर बनाने का साहसिक फैसला किया।

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'अनोखा' से शुरुआत और 'चितचोर' से मिली बड़ी पहचान

विजयेंद्र ने अपने अभिनय सफर की शुरुआत वैसे तो साल 1975 में आई अभिनेता शत्रुघन सिन्हा की फिल्म 'अनोखा' से की थी। मगर इस फिल्म में उनका किरदार इतना छोटा था कि दर्शकों की नजरें उन पर ठहर नहीं सकीं और उन्हें कोई खास पहचान नहीं मिल पाई। इसके बाद साल 1976 में राजश्री प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी और दिग्गज फिल्मकार बासु चटर्जी निर्देशित फिल्म 'चितचोर' प्रदर्शित हुई। इस फिल्म ने विजयेंद्र के करियर को एक नया मोड़ दिया और उन्हें फिल्म उद्योग में एक नई और मजबूत पहचान दिलाई। इस फिल्म की सफलता के बाद वे कई अन्य फिल्मों में अहम भूमिकाओं में नजर आने लगे।

महान फिल्मों में छोटे मगर यादगार किरदार

अपने पूरे फिल्मी सफर में विजयेंद्र घटके ने कई दर्जनों फिल्मों में काम किया, जिनमें 'प्रेम रोग', 'कसमें वादे', 'तेरे मेरे प्यार में' और 'देवदास' जैसी बड़ी फिल्में शामिल हैं। उन्होंने साल 1982 में आई सुपरहिट फिल्म 'सत्ते पे सत्ता' में महानायक अमिताभ बच्चन और ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी के साथ भी स्क्रीन साझा की थी। हालांकि, उन्होंने हर तरह के किरदारों को पूरी शिद्दत से निभाया, लेकिन उन्हें कभी कोई ऐसा मुख्य किरदार नहीं मिला जिसके दम पर वे फिल्म को अकेले अपने कंधों पर सुपरहिट करा पाते। राजकपूर की मशहूर फिल्म 'प्रेम रोग' में उन्होंने अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे के पति की भूमिका निभाई थी, जो बेहद संक्षिप्त थी। इसी तरह, संजय लीला भंसाली की भव्य फिल्म 'देवदास' में वे ऐश्वर्या राय के किरदार के पति के रूप में दिखे, लेकिन वहां भी उनका स्क्रीन टाइम बेहद कम था।

भीष्म पितामह का किरदार ठुकराने की बड़ी भूल

विजयेंद्र घटके के करियर का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उन्हें बी.आर. चोपड़ा के ऐतिहासिक धारावाहिक 'महाभारत' में भीष्म पितामह जैसी कालजयी और ऐतिहासिक भूमिका की पेशकश की गई। यह एक ऐसा दमदार रोल था जो किसी भी कलाकार को हमेशा-हमेशा के लिए अमर बना सकता था और उनके ढलते करियर को एक नई ऊंचाई दे सकता था। लेकिन न जाने किस वजह से विजयेंद्र ने इस ऐतिहासिक भूमिका को ठुकरा दिया। भीष्म पितामह का यह किरदार छोड़ने का मलाल शायद उन्हें आज भी होता होगा, क्योंकि इस एक फैसले ने उनके करियर की पूरी दिशा ही बदल दी। यदि वे इस रोल को स्वीकार कर लेते, तो आज भारतीय टेलीविजन और सिनेमा के इतिहास में उनका स्थान कुछ और ही होता।

सवाल-जवाब

विजयेंद्र घटके कौन हैं?
विजयेंद्र घटके 70 और 80 के दशक के एक प्रसिद्ध हिंदी सिनेमा अभिनेता हैं, जो मुख्य रूप से अपने सहायक और नकारात्मक किरदारों के लिए जाने जाते हैं।
विजयेंद्र घटके किस शाही घराने से संबंध रखते थे?
वे इंदौर के एक प्रतिष्ठित शाही घराने से ताल्लुक रखते थे। उनके पिता फतेह सिंह राउत दत्ता जी राजे घटके मराठा साम्राज्य के जागीरदार थे।
विजयेंद्र घटके की पहली फिल्म कौन सी थी?
उनकी पहली फिल्म 1975 में आई 'अनोखा' थी, लेकिन उन्हें बड़ी पहचान 1976 में रिलीज हुई बासु चटर्जी की फिल्म 'चितचोर' से मिली।
उन्होंने बी.आर. चोपड़ा की 'महाभारत' में कौन सा रोल ठुकराया था?
विजयेंद्र घटके को 'महाभारत' में भीष्म पितामह का महत्वपूर्ण किरदार निभाने का प्रस्ताव मिला था, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया था।
विजयेंद्र घटके ने फिल्म 'देवदास' और 'प्रेम रोग' में क्या भूमिकाएं निभाई थीं?
फिल्म 'प्रेम रोग' में उन्होंने पद्मिनी कोल्हापुरे के पति और 'देवदास' में ऐश्वर्या राय के किरदार (पारो) के पति की संक्षिप्त भूमिकाएं निभाई थीं।
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