मानसून की पहली दस्तक के साथ ही संगीत प्रेमियों की प्लेलिस्ट में 90 के दशक के सदाबहार नगमे वापस लौटने लगते हैं। इन्हीं में से एक बेहद लोकप्रिय गाना 'थम के बरस ओ ज़रा थम के बरस' है, जो हर साल बारिश के मौसम में श्रोताओं के दिलों पर राज करता है। फिल्म 'मेरे महबूब' का यह क्लासिक रोमांटिक गाना अपनी सुरीली धुन और खूबसूरत गायकी की वजह से आज भी उतना ही तरोताजा महसूस होता है जितना अपनी रिलीज के समय था।
अलका याज्ञनिक की आवाज का जादू
इस नगमे को मशहूर गायिका अलका याज्ञनिक ने अपनी जादुई और दिलकश आवाज से सजाया है। उनकी गायकी ने इस गाने में एक खास अहसास भर दिया है, जो सीधे सुनने वालों के दिल को छू लेता है। 90 के दशक के संगीत की सादगी और अलका याज्ञनिक की गायन शैली ने मिलकर इस रचना को कालातीत बना दिया है। यही कारण है कि आज भी जब रिमझिम बारिश शुरू होती है, तो यह गाना लोगों की पहली पसंद बन जाता है।
सतीश और बेताब लखनवी की शब्द रचना
गाने की सफलता में इसके बोलों का बहुत बड़ा योगदान है, जिन्हें सतीश और बेताब लखनवी ने मिलकर लिखा है। गीतकारों ने बारिश की बूंदों और मोहब्बत के अहसास को बेहद भावुक और खूबसूरत शब्दों में पिरोया है। यह गीत केवल मौसम का बयान नहीं करता, बल्कि प्यार की गहराइयों और पुरानी यादों को भी दोबारा जिंदा कर देता है। हर मानसून में यह गाना संगीत प्रेमियों के लिए पुरानी यादों का एक खूबसूरत जरिया बन जाता है।



















