सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (CINTAA) में कई हफ्तों से चल रही खींचतान और प्रशासनिक मतभेदों के बाद हुए चुनावों में नया मोड़ सामने आया है। पूर्व सदस्य और अभिनेत्री उपासना सिंह और उनके समर्थक गुट ने शनिवार शाम घोषित हुए चुनाव नतीजों में बाजी मार ली है। यह चुनाव 12 सितंबर को आयोजित किए गए थे, जिसमें संस्था की कार्यशैली पर सवाल उठाने वाले धड़े को बड़ी सफलता मिली है। यह परिणाम पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जिन पर संगठन को मनमाने ढंग से चलाने के गंभीर आरोप लगे थे।
सिंटा के दोबारा चुनाव और उपासना सिंह के गुट का दबदबा
सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन के भीतर काफी समय से चल रहा विवाद आखिरकार मतदान के रास्ते पर जाकर खत्म हुआ। 12 सितंबर को कराए गए दोबारा चुनाव के बाद शनिवार शाम जब मतों की गिनती हुई, तो उपासना सिंह और उनके पैनल के उम्मीदवारों को जीत हासिल हुई। इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब उपासना सिंह ने खुले तौर पर संगठन के कामकाज पर सवाल उठाए थे और आरोप लगाया था कि संस्था की प्रमुख पदाधिकारी पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे किसी अन्य सदस्य की सलाह लिए बिना अपने स्तर पर ही फैसले ले रही थीं।
मनमानी के आरोपों से लेकर इस्तीफों तक का घटनाक्रम
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह विवाद पिछले कुछ महीनों में काफी बढ़ गया था। संस्था के भीतर कामकाज को लेकर असंतोष इतना गहरा गया कि CINTAA की एग्जीक्यूटिव कमेटी के लगभग 8 सदस्यों ने एक साथ अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। इन सदस्यों का मानना था कि संगठन के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रिया की उपेक्षा की जा रही है और निर्णय लेने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। विवाद को बढ़ता देख पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज भी किया था। लेकिन इस स्पष्टीकरण के बाद भी विरोध शांत नहीं हुआ और अंदरूनी मतभेद गहराते चले गए।
अदालती फैसले पर टिका रहेगा अंतिम परिणाम
एग्जीक्यूटिव कमेटी से बड़े पैमाने पर हुए इस्तीफों के बाद फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) ने मामले में हस्तक्षेप किया और सिंटा के लिए नए सिरे से चुनाव कराने की घोषणा की। हालांकि इस चुनावी प्रक्रिया को अदालत में चुनौती दी गई थी, जहां से कोर्ट ने चुनाव संपन्न कराने की अनुमति दे दी थी। अदालत ने यह साफ कर दिया था कि इन चुनावों का अंतिम परिणाम और नई कमेटी की मान्यता वर्तमान में चल रही कानूनी कार्यवाही के अंतिम फैसले के अधीन ही रहेगी। उपासना सिंह की इस जीत के बाद अब सिने उद्योग से जुड़े लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह कानूनी विवाद क्या मोड़ लेता है।



















