आर. माधवन ने करियर की शुरुआत में कई दक्षिण भारतीय फिल्मों में काम किया और मणिरत्नम की ‘अलाइपायुथे’ से तमिल सिनेमा में एक नए रोमांटिक हीरो के रूप में उभरे। इस पहचान के मजबूत होने से ठीक पहले उन्होंने एक कठिन चुनाव किया था। जब फिल्म की टीम उनसे मीडिया के सामने अपनी शादी न बताने को कह रही थी, उन्होंने पत्नी सरिता बिरजे के बारे में झूठ बोलने से साफ इनकार कर दिया। यह घटना 2000 में फिल्म की रिलीज से जुड़ी है, जब तमिल सिनेमा में एक विवाहित अभिनेता को रोमांटिक नायक के रूप में लेकर लोगों के मन में शंका पाई जाती थी।
रिलीज से पहले टीम के मन में क्या डर था
माधवन ने इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के एक कार्यक्रम में बताया कि उनकी शादी सरिता बिरजे से फिल्म आने से केवल 6 महीने पहले हुई थी। उसी कारण प्रचार टीम के लिए उनका निजी जीवन एक व्यावसायिक सवाल बन गया। टीम को लगता था कि एक शादीशुदा नए अभिनेता को दर्शक रोमांटिक हीरो के रूप में स्वीकार नहीं करेंगे और फिल्म से नहीं जुड़ेंगे। माधवन के पास करियर को बचाने के लिए चुप रहने का विकल्प था, लेकिन उन्होंने झूठ को अपना हथियार नहीं बनने दिया।
प्रचार टीम की सलाह और मणिरत्नम का जवाब
प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले प्रचार टीम ने माधवन से कहा कि वे अपनी शादी का जिक्र ही न करें। टीम जानती थी कि उनकी शादी को 6 महीने हो चुके हैं, फिर भी उसका मानना था कि मीडिया में यह खबर गई तो फिल्म फ्लॉप हो सकती है। टीम ने उन्हें मैडी कहते हुए यही बात समझाई, पर माधवन यह सौदा करने को तैयार नहीं थे। वह सीधे मणिरत्नम के पास गए और बताया कि लोग उनसे झूठ बोलने की बात कर रहे हैं। मणिरत्नम ने उन्हें अपना फैसला खुद लेने दिया और कहा कि वे जो सही समझें, वही करें। माधवन के लिए यह केवल मीडिया प्रबंधन नहीं था। उनका विचार था कि मणिरत्नम जैसी फिल्मी हस्ती से जुड़ी फिल्म को केवल इसलिए असफल मान लेना कि नायक विवाहित है, मणिरत्नम का भी अपमान होगा।
मंच पर पत्नी को लेकर पहला सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में वही मुद्दा सबसे पहले सामने आया जिससे टीम घबरा रही थी। बाद में हंसते हुए याद करते हुए माधवन ने बताया कि सबसे पहले वही सवाल आया कि उनकी शादी हो चुकी है और पत्नी भी वहीं मौजूद हैं, फिर क्या दर्शक उन्हें रोमांटिक हीरो मानेंगे। इस सवाल ने उनकी असली जिंदगी को उनके पेशेवर रूप से आमने सामने रख दिया। माधवन ने पत्नी की उपस्थिति को छुपाने का नाटक नहीं किया। उन्होंने कहा कि वे अभिनेता के रूप में आए हैं और केवल एक किरदार निभा रहे हैं, लेकिन जिस महिला से उन्होंने शादी की है, उसे सिर्फ एक फिल्म के लिए अनदेखा करना या उसे अपनी जिंदगी से बाहर दिखाना अपमानजनक होगा। उनके लिए रोमांटिक हीरो बनने का अवसर न मिलना इस बात से कम चिंता की थी कि पत्नी का अपमान हो। इसलिए उन्होंने जोखिम उठाना स्वीकार किया।
वायरल जवाब ने धारणा पलट दी
माधवन का जवाब लोगों ने तुरंत स्वीकार कर लिया और इंटरव्यू तेजी से वायरल हुआ। उन्होंने बताया कि इसी कारण लोगों ने उन्हें दिल से अपना लिया। जो पुराना भ्रम उन्हें डराने के लिए आगे किया गया था, वह टूटने लगा। विवाहित पुरुष को रोमांटिक नायक नहीं माना जा सकता, ऐसी सोच अब पहले जैसी नहीं रही। ‘अलाइपायुथे’ बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई और माधवन तमिल सिनेमा में एक बड़े स्टार के रूप में स्थापित हो गए। फिल्म का यह प्रदर्शन उस डर का जवाब था जिसके कारण शादी की खबर छुपाने की सलाह दी गई थी।
टीवी से फिल्मों तक कई पूर्वाग्रह साथ आए
माधवन के सामने केवल शादी को लेकर ही सवाल नहीं उठे थे। जब वे फिल्मों में आए, तो टीवी से जुड़े लोगों ने कहा कि टीवी पर उन्हें इतना दिखा जा चुका था कि अब दर्शक बड़े पर्दे पर उन्हें देखने के लिए पैसे खर्च नहीं करेंगे। कुछ लोगों ने उनके रंग रूप पर भी टिप्पणी की। उनका कहना था कि तमिल फिल्मों के संदर्भ में वे बहुत गोरे लगते हैं और उनका रूप नॉर्थ इंडियन जैसा है, इसलिए तमिल दर्शक उन्हें स्वीकार नहीं करेंगे। ये तमाम अंदाजे दिखाते हैं कि उनके करियर की शुरुआत में अभिनय से ज्यादा उनके पुराने माध्यम और बाहरी छवि को लेकर भी फैसले हो रहे थे।
करियर ने बताया कि नियम बदलते रहते हैं
उनके पुराने कार्यों में ‘घर जमाई’ और ‘सी हॉक्स’ जैसे कार्यक्रम शामिल थे, और ‘अलाइपायुथे’ से पहले वह इनमें काम कर चुके थे। इन अनुभवों के बाद भी जब उन्हें फिल्मों में मौका मिला, तो उनके सामने टीवी से आने के टैग और दिखावे से जुड़ी कई धारणाएं रखी गईं। माधवन ने अपने करियर से यही बात सीखी कि उद्योग के बने बनाए नियमों को अंतिम सच नहीं मानना चाहिए। चाहे सवाल टीवी से आए अभिनेता की छवि का हो या रंग रूप का, दर्शकों की प्रतिक्रिया और फिल्म का प्रदर्शन उन्हें गलत साबित कर सकते हैं। उनका सच बोलने का फैसला और ‘अलाइपायुथे’ की सफलता मिलकर उनके करियर का अहम हिस्सा बन गए।



















