हिन्दी सिनेमा के इतिहास में वर्ष 1966 में आई फिल्म तीसरी मंजिल को एक बड़ा मील का पत्थर माना जाता है। इस फिल्म का संगीत संगीतकार आरडी बर्मन के करियर के लिए सबसे बड़ा टर्निंग प्वॉइंट साबित हुआ था। शुरुआत में इस प्रोजेक्ट के साथ देव आनंद जुड़ने वाले थे और उनके भाई विजय आनंद फिल्म का निर्देशन कर रहे थे। हालांकि कुछ कारणों से देव आनंद इस फिल्म का हिस्सा नहीं बन पाए, जिसके बाद मुख्य अभिनेता के रूप में शम्मी कपूर की एंट्री हुई। शम्मी कपूर के फिल्म से जुड़ते ही संगीतकार के चयन को लेकर एक बड़ी खींचतान शुरू हो गई थी।
विजय आनंद का भरोसा और शम्मी कपूर की हिचकिचाहट
उस दौर में शम्मी कपूर की फिल्मों में आमतौर पर संगीत देने की पहली पसंद ओपी नय्यर या शंकर-जयकिशन हुआ करते थे। शम्मी कपूर आरडी बर्मन को अपनी फिल्म में बतौर संगीतकार लेने के पक्ष में बिल्कुल नहीं थे, क्योंकि उस समय आरडी बर्मन नए थे और अपने करियर की शुरुआत ही कर रहे थे। शम्मी कपूर एक नए संगीतकार के साथ कोई भी व्यावसायिक जोखिम नहीं उठाना चाहते थे। दूसरी तरफ निर्देशक विजय आनंद को आरडी बर्मन की प्रतिभा पर पूरा विश्वास था। नवकेतन बैनर की फिल्मों में आरडी बर्मन के पिता एसडी बर्मन संगीत दिया करते थे और आरडी बर्मन अपने पिता के मुख्य सहायक के रूप में काम करते थे। इसी वजह से विजय आनंद उनकी क्षमताओं से अच्छी तरह वाकिफ थे। उन्होंने पूर्व में एसडी बर्मन से वादा भी किया था कि वे उनके बेटे को किसी बड़ी फिल्म में काम करने का बेहतरीन अवसर देंगे।
नासिर हुसैन की चुनौती और गुमनाम का प्रभाव
जब विजय आनंद और शम्मी कपूर के बीच संगीतकार के नाम को लेकर सहमति बनना मुश्किल हो रहा था, तब आखिरकार आरडी बर्मन को यह फिल्म मिल गई। हालांकि फिल्म मिलते ही उनके सामने एक बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई। फिल्म के निर्माता नासिर हुसैन ने आरडी बर्मन के सामने एक खास शर्त रखी। वर्ष 1965 में रिलीज हुई फिल्म गुमनाम का एक गाना 'जान पहचान हो जीना आसान हो' पूरे देश में धूम मचा रहा था। शंकर-जयकिशन द्वारा बनाए गए इस रॉक एंड रोल स्टाइल के गाने से प्रेरित होकर नासिर हुसैन चाहते थे कि तीसरी मंजिल में भी वैसा ही ऊर्जावान और थिरकने पर मजबूर कर देने वाला गाना शामिल किया जाए।
आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा का निर्माण
आरडी बर्मन ने निर्माता नासिर हुसैन की इस चुनौती को सहर्ष स्वीकार कर लिया। उन्होंने एक ऐसा गाना तैयार किया जिसने भारतीय संगीत की दुनिया में इतिहास रच दिया। यह गाना था 'आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा', जिसे महान गायक मोहम्मद रफी ने अपनी जादुई आवाज दी। जब इस गाने के मुखड़े को ध्यान से सुना जाता है, तो इसमें शंकर-जयकिशन के गाने 'जान पहचान हो जीना आसान हो' की संगीत रचना की स्पष्ट छाप दिखाई देती है। दोनों गानों में ऑर्केस्ट्रा का अरेंजमेंट और ताल की बनावट लगभग एक जैसी है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इन दोनों ही लोकप्रिय गानों को मोहम्मद रफी ने ही गाया था।
तीसरी मंजिल की ऐतिहासिक सफलता
फिल्म तीसरी मंजिल के रिलीज होते ही इसके सभी गाने ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुए। आरडी बर्मन द्वारा तैयार किया गया रॉक एंड रोल संगीत युवाओं के सिर चढ़कर बोला। इस फिल्म के संगीत ने आरडी बर्मन को रातों-रात उद्योग के शीर्ष संगीतकारों की कतार में खड़ा कर दिया। शम्मी कपूर की शुरुआती आशंकाओं के बावजूद, इस एल्बम की सफलता ने यह साबित कर दिया कि विजय आनंद का आरडी बर्मन की क्षमता पर भरोसा पूरी तरह से सही था।



















