'तेरे इश्क में' पिछले साल जब थिएटर्स में आई, तब दर्शकों ने इससे बड़ी उम्मीदें लगाई थीं। आनंद एल राय के निर्देशन में बनी इस फिल्म में धनुष और कृति सेनन मुख्य भूमिका में थे। लोग यह सोचकर उत्साहित थे कि आनंद और धनुष की जोड़ी एक बार फिर 'रांझणा' जैसा सिनेमाई कमाल करेगी। लेकिन जब फिल्म रिलीज हुई तो दर्शकों के हाथ सिर्फ निराशा आई। फिल्म उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी और थिएटर्स में भी इसका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा।
नीरज घेवान ने उठाए सवाल
फिल्म 'होमबाउंड' के निर्देशक नीरज घेवान, जिनकी फिल्म ऑस्कर के लिए भारत की ऑफिशियल एंट्री है, ने हाल ही में 'तेरे इश्क में' की कड़ी आलोचना की है। युवा से हुई एक बातचीत में उन्होंने कहा कि आजकल फिल्मों में टॉक्सिसिटी को जानबूझकर 'कूल' बनाकर दिखाया जाने लगा है। मेकर्स इस ट्रेंड को पकड़ते हुए बिना किसी मकसद के नेगेटिव सीन्स फिल्म में जोड़ते रहते हैं।
वो गंगाजल वाला सीन
नीरज घेवान ने एक खास उदाहरण देते हुए 'तेरे इश्क में' के एक सीन का जिक्र किया। इस सीन में धनुष का किरदार प्यार में धोखा खाने के बाद कृति सेनन के किरदार पर गंगाजल फेंकता है। लेकिन समस्या यह है कि इस सीन को इस तरह फिल्माया गया है कि पहली बार देखने पर किसी को भी यही लगता है कि वो एसिड फेंक रहा है। फिल्मांकन का यही तरीका नीरज घेवान को सबसे ज्यादा खला।
नीरज ने बताया कि यह सीन देखने के बाद वो खुद काफी विचलित हो गए थे और उन्हें भी पल भर के लिए लगा कि धनुष के किरदार ने एसिड फेंक दिया। इसके बाद उनके मन में यह सवाल उठा कि जब एक फिल्ममेकर के तौर पर वो खुद इतना परेशान हो गए, तो जिन महिलाओं ने असल जिंदगी में एसिड अटैक झेला है, उन सर्वाइवर्स पर इस सीन का कितना गहरा असर पड़ा होगा। नीरज ने बिना किसी लाग-लपेट के इस सीन को फिजूल और घटिया बताया।
फिल्मों में हिंसा का बढ़ता चलन
नीरज घेवान सिर्फ इसी एक सीन पर नहीं रुके। उन्होंने फिल्मों में बढ़ती हिंसा के बड़े मसले पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि जब किसी किरदार को बार-बार थप्पड़ खाते दिखाया जाता है, तो इसका सबसे गहरा असर उन महिलाओं पर पड़ता है जो असल जिंदगी में ट्रॉमा से गुजर चुकी हैं। पर उनका यह भी कहना था कि यह बात सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहीं है। जो भी व्यक्ति कभी किसी रूप में प्रताड़ित हुआ हो, वो भी ऐसे दृश्यों को देखकर गहरे तौर पर प्रभावित होता है।













