‘कोयला’ के गीतों में ‘सांसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम’ आज भी भावनात्मक असर के कारण अलग से याद किया जाता है। माधुरी दीक्षित का उदास चेहरा, गाने पर किया गया नृत्य और दृश्य में उनका रोना इसकी सबसे मजबूत छवि हैं। यही गीत एक ही नाम से तीन बार बना। इन तीन रूपों में नुसरत फतेह अली खान का मूल माने जाने वाला रूप, ‘कोयला’ का फिल्मी रूप और ‘यारियां 2’ का रीमिक्स शामिल हैं। इसी कड़ी में राहत फतेह अली खान ने नुसरत फतेह अली खान को श्रद्धांजलि देते हुए गीत को दोबारा गाया और आज के दौर में इसे लोकप्रिय बनाया। इसी कारण यह गीत सिर्फ साउंडट्रैक नहीं, एक ऐसी परदे की यादगार बनकर चर्चा में रहा जिसे सुनते ही उनका भावुक चेहरा याद आने लगता है।
‘कोयला’ ने गीत को दिया सबसे लोकप्रिय फिल्मी रूप
राकेश रोशन की फिल्म ‘कोयला’ 1997 में रिलीज हुई। इसमें शाहरुख खान और माधुरी दीक्षित साथ नजर आए। कहानी एक्शन और ड्रामा से भरी थी, लेकिन इस गीत ने कहानी के भावुक पहलू को खूबसूरत ढंग से उभारा। कविता कृष्णमूर्ति ने इसे गाया। धुन राकेश रोशन के भाई राजेश रोशन ने बनाई, जबकि इंदीवर ने इसके बोल लिखे। ‘कोयला’ के साउंडट्रैक में इस गीत की अवधि लगभग 6 मिनट 48 सेकंड है, इसलिए यह साउंडट्रैक का एक लंबा और भावनात्मक हिस्सा बनता है।
आवाज़, शब्द और माधुरी के भाव मिलकर बने यादगार
कविता कृष्णमूर्ति के स्वर में जो ठहराव और दर्द था, उसने गीत को अलग भावना दी। राजेश रोशन ने जो धुन तैयार की और इंदीवर ने जो पंक्तियां लिखीं, उनके साथ कविता की गायकी ने इसे सिनेमाघर की सीमा से आगे श्रोताओं की स्मृति में बिठा दिया। परदे पर माधुरी दीक्षित ने इस गीत पर जमकर नृत्य किया और अपने पिया को याद किया। भावनात्मक मोड़ पर वे फूट-फूटकर रो पड़ीं। यह दृश्य देखने वालों को भावुक कर गया और उनके चेहरे के भावों ने गीत को सिर्फ सुनने की चीज़ नहीं, देखने लायक एक पूरी भावनात्मक अनुभूति बना दिया।
मूल स्वर से श्रद्धांजलि तक
इस गीत का पहला संस्करण उस्ताद नुसरत फतेह अली खान के स्वर में सामने आया था। उन्हीं के रूप को इस गीत का सबसे मूल संस्करण माना जाता है। आगे के दौर में राहत फतेह अली खान ने इसे फिर लोकप्रियता दिलाई। उन्होंने नुसरत फतेह अली खान को श्रद्धांजलि के तौर पर इसे नए सिरे से गाया, जिससे पुरानी रचना नए श्रोताओं तक पहुंची। इस श्रद्धांजलि ने मूल रूप की पहचान बनाए रखते हुए गीत की कालजयी कड़ी को आगे बढ़ाया।
‘यारियां 2’ में सामने आया सबसे नया रीमिक्स
इस गीत का अब तक का सबसे नया रूप ‘यारियां 2’ में सुनने को मिला। दिव्या खोसला कुमार और यश अभिनीत इस फिल्म में पुराने गीत का रीमिक्स वर्जन शामिल किया गया। रीमिक्स की संगीत रचना मनन भारद्वाज ने संभाली और इसमें सचेत टंडन की गायकी है। इस रूप ने पुराने गीत को एक नए फिल्मी संदर्भ में पेश किया।
हिट नामों को दोहराना सिनेमा का पुराना तरीका
हिंदी सिनेमा हो या क्षेत्रीय सिनेमा, सफल गीतों और फिल्मों के नामों को लेकर नए प्रयोग होते रहते हैं। ‘आंखें’, ‘अग्निपथ’ और ‘गोलमाल’ इसी चलन की मिसालें हैं। कोई फिल्म हिट होने के बाद अलग अलग दौरों में उसके पहचाने नाम पर फिर काम किया जाता रहा। इस मामले में ध्यान किसी फिल्म के शीर्षक पर नहीं, बल्कि एक गीत पर है, जिसे एक ही नाम से तीन बार बनाया गया। उन तीन रूपों में ‘कोयला’ वाला रूप माधुरी दीक्षित के भावुक अभिनय की वजह से सबसे ज्यादा लोकप्रिय हुआ।



















