विधान परिषद चुनाव में सबसे आगे रहकर भी क्यों हार जाते हैं प्रत्याशी, समझें वरीयता वोट और ट्रांसफर का पूरा गणितस्मार्टफोन पीएलआई से सरकारी खजाने में आए 3.25 लाख करोड़ रुपये, इंसेंटिव पर खर्च हुए सिर्फ 19 हजार करोड़ट्रेनों में रात 11 से सुबह 5 बजे तक नहीं चार्ज होंगे फोन, रेलवे बोर्ड ने जारी किया सख्त फरमानउत्तर प्रदेश कैबिनेट का बड़ा फैसला: नोएडा में चार ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और ग्रेटर नोएडा में रोबोटिक्स पार्क को मिली मंजूरीबलिया में गंदगी और कूड़े के ढेरों से जनता बेहाल, नगर पालिका के अधिकारियों पर लग रहे भ्रष्टाचार के संगीन आरोपबारामुला में फारूक अब्दुल्ला के बयान पर बवाल, 1947 के कबाइली हमले से लेकर सीमा पार आतंकवाद तक का सचफेड के फैसले से पहले डॉलर में तेजी, सोने पर दबाव बढ़ामिशिगन में घर के तलघर की सफाई के दौरान मिला दूसरे विश्व युद्ध का हथगोला, बम निरोधक दस्ते ने एक्स-रे से जांचाएंड्रॉयड स्मार्टफोन झपटमारों के मंसूबे होंगे नाकाम, सुरक्षा मजबूत करने के लिए तुरंत बदलें तीन जरूरी विकल्पवृंदावन में महारास स्वरूप में बंशी बजाते दिखेंगे बांके बिहारी, साल में केवल एक बार मिलता है यह दुर्लभ दर्शन
तीन रूपों में ढला लोकप्रिय ‘सांसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम’, ‘कोयला’ में माधुरी दीक्षित ने रुदन भरा अभिनय कियाबॉलीवुड
12 सित॰ 2026, 2:20 pm (46 दिन पहले)· 7

तीन रूपों में ढला लोकप्रिय ‘सांसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम’, ‘कोयला’ में माधुरी दीक्षित ने रुदन भरा अभिनय किया

‘सांसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम’ नुसरत फतेह अली खान के मूल माने जाने वाले रूप से ‘कोयला’ और ‘यारियां 2’ तक तीन रूपों में सामने आया, जबकि राहत फतेह अली खान ने इसे श्रद्धांजलि के तौर पर फिर गाया। 1997 के फिल्मी रूप में माधुरी दीक्षित के रुदन भरे अभिनय, कविता कृष्णमूर्ति की आवाज़ और लगभग 6 मिनट 48 सेकंड की अवधि ने इसे सबसे यादगार बनाया।

‘कोयला’ के गीतों में ‘सांसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम’ आज भी भावनात्मक असर के कारण अलग से याद किया जाता है। माधुरी दीक्षित का उदास चेहरा, गाने पर किया गया नृत्य और दृश्य में उनका रोना इसकी सबसे मजबूत छवि हैं। यही गीत एक ही नाम से तीन बार बना। इन तीन रूपों में नुसरत फतेह अली खान का मूल माने जाने वाला रूप, ‘कोयला’ का फिल्मी रूप और ‘यारियां 2’ का रीमिक्स शामिल हैं। इसी कड़ी में राहत फतेह अली खान ने नुसरत फतेह अली खान को श्रद्धांजलि देते हुए गीत को दोबारा गाया और आज के दौर में इसे लोकप्रिय बनाया। इसी कारण यह गीत सिर्फ साउंडट्रैक नहीं, एक ऐसी परदे की यादगार बनकर चर्चा में रहा जिसे सुनते ही उनका भावुक चेहरा याद आने लगता है।

‘कोयला’ ने गीत को दिया सबसे लोकप्रिय फिल्मी रूप

राकेश रोशन की फिल्म ‘कोयला’ 1997 में रिलीज हुई। इसमें शाहरुख खान और माधुरी दीक्षित साथ नजर आए। कहानी एक्शन और ड्रामा से भरी थी, लेकिन इस गीत ने कहानी के भावुक पहलू को खूबसूरत ढंग से उभारा। कविता कृष्णमूर्ति ने इसे गाया। धुन राकेश रोशन के भाई राजेश रोशन ने बनाई, जबकि इंदीवर ने इसके बोल लिखे। ‘कोयला’ के साउंडट्रैक में इस गीत की अवधि लगभग 6 मिनट 48 सेकंड है, इसलिए यह साउंडट्रैक का एक लंबा और भावनात्मक हिस्सा बनता है।

ये भी पढ़ें

आवाज़, शब्द और माधुरी के भाव मिलकर बने यादगार

कविता कृष्णमूर्ति के स्वर में जो ठहराव और दर्द था, उसने गीत को अलग भावना दी। राजेश रोशन ने जो धुन तैयार की और इंदीवर ने जो पंक्तियां लिखीं, उनके साथ कविता की गायकी ने इसे सिनेमाघर की सीमा से आगे श्रोताओं की स्मृति में बिठा दिया। परदे पर माधुरी दीक्षित ने इस गीत पर जमकर नृत्य किया और अपने पिया को याद किया। भावनात्मक मोड़ पर वे फूट-फूटकर रो पड़ीं। यह दृश्य देखने वालों को भावुक कर गया और उनके चेहरे के भावों ने गीत को सिर्फ सुनने की चीज़ नहीं, देखने लायक एक पूरी भावनात्मक अनुभूति बना दिया।

मूल स्वर से श्रद्धांजलि तक

इस गीत का पहला संस्करण उस्ताद नुसरत फतेह अली खान के स्वर में सामने आया था। उन्हीं के रूप को इस गीत का सबसे मूल संस्करण माना जाता है। आगे के दौर में राहत फतेह अली खान ने इसे फिर लोकप्रियता दिलाई। उन्होंने नुसरत फतेह अली खान को श्रद्धांजलि के तौर पर इसे नए सिरे से गाया, जिससे पुरानी रचना नए श्रोताओं तक पहुंची। इस श्रद्धांजलि ने मूल रूप की पहचान बनाए रखते हुए गीत की कालजयी कड़ी को आगे बढ़ाया।

‘यारियां 2’ में सामने आया सबसे नया रीमिक्स

इस गीत का अब तक का सबसे नया रूप ‘यारियां 2’ में सुनने को मिला। दिव्या खोसला कुमार और यश अभिनीत इस फिल्म में पुराने गीत का रीमिक्स वर्जन शामिल किया गया। रीमिक्स की संगीत रचना मनन भारद्वाज ने संभाली और इसमें सचेत टंडन की गायकी है। इस रूप ने पुराने गीत को एक नए फिल्मी संदर्भ में पेश किया।

हिट नामों को दोहराना सिनेमा का पुराना तरीका

हिंदी सिनेमा हो या क्षेत्रीय सिनेमा, सफल गीतों और फिल्मों के नामों को लेकर नए प्रयोग होते रहते हैं। ‘आंखें’, ‘अग्निपथ’ और ‘गोलमाल’ इसी चलन की मिसालें हैं। कोई फिल्म हिट होने के बाद अलग अलग दौरों में उसके पहचाने नाम पर फिर काम किया जाता रहा। इस मामले में ध्यान किसी फिल्म के शीर्षक पर नहीं, बल्कि एक गीत पर है, जिसे एक ही नाम से तीन बार बनाया गया। उन तीन रूपों में ‘कोयला’ वाला रूप माधुरी दीक्षित के भावुक अभिनय की वजह से सबसे ज्यादा लोकप्रिय हुआ।

सवाल-जवाब

‘सांसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम’ का सबसे लोकप्रिय फिल्मी रूप किस फिल्म में था?
यह रूप राकेश रोशन की 1997 में रिलीज फिल्म ‘कोयला’ में था, जिसमें शाहरुख खान और माधुरी दीक्षित साथ नजर आए।
‘कोयला’ वाले गीत को किसने गाया और उसका संगीत किसने बनाया?
गीत की आवाज़ कविता कृष्णमूर्ति ने दी। राकेश रोशन के भाई राजेश रोशन ने धुन बनाई और इंदीवर ने बोल लिखे।
‘कोयला’ के साउंडट्रैक में गीत कितना लंबा है?
इसकी अवधि लगभग 6 मिनट 48 सेकंड है।
माधुरी दीक्षित के दृश्य में क्या खास था?
वह गाने पर भरपूर नृत्य करती हैं और अपने पिया को याद करती हैं। फिर वे फूट-फूटकर रो पड़ती हैं, जिससे दर्शक भावुक हो उठते हैं।
गीत का मूल और श्रद्धांजलि वाला रूप किसने गाया?
पहला रूप उस्ताद नुसरत फतेह अली खान ने गाया और उन्हीं के रूप को सबसे मूल माना जाता है। राहत फतेह अली खान ने नुसरत को श्रद्धांजलि देते हुए इसे फिर से गाया और आज के दौर में लोकप्रिय बनाया।
इस गीत का सबसे नया रूप किस फिल्म में आया और उसके पीछे कौन है?
सबसे नया रीमिक्स ‘यारियां 2’ में इस्तेमाल हुआ, जिसमें दिव्या खोसला कुमार और यश अभिनीत हैं। इसे मनन भारद्वाज ने कंपोज़ किया और सचेत टंडन ने गाया।
एक ही गीत को तीन बार क्यों बनाया गया?
हिट गीतों और फिल्मों के पहचाने नामों को लेकर हिंदी और क्षेत्रीय सिनेमा में नए प्रयोग होते रहते हैं। माधुरी दीक्षित के अभिनय ने ‘कोयला’ वाले रूप को सबसे ज्यादा लोकप्रिय बनाया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp