पान मसाला ब्रांड के प्रचार से जुड़े विवाद में अभिनेता अजय देवगन ने कानूनी रास्ता अपनाया है। महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की तरफ से जारी कारण बताओ नोटिस के विरोध में उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। अभिनेता का कहना है कि यह नोटिस उन पर गलत तरीके से थोपा गया है, जबकि नियामक संस्था को सीधे उत्पाद तैयार करने वाली कंपनी से जवाब मांगना चाहिए था। इस मामले पर मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ 4 नवंबर को सुनवाई कर सकती है।
परोक्ष विज्ञापन और राज्य में प्रतिबंध का हवाला
नियामक संस्था का आरोप है कि विमल इलायची के प्रचार अभियान के जरिए असल में विमल पान मसाला को बढ़ावा दिया जा रहा है। महाराष्ट्र में पान मसाला के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर एक साल का पूर्ण प्रतिबंध लागू है। यह रोक 13 जुलाई 2026 को जारी सरकारी आदेश के तहत कानूनी रूप से प्रभावी की गई थी। अधिकारियों का मानना है कि विमल इलायची का विज्ञापन सीधे तौर पर उसी ब्रांड नाम की पहचान का इस्तेमाल करता है, जिससे प्रतिबंधित गुटखा और तंबाकू उत्पादों का परोक्ष प्रचार होता है।
तीन अभिनेताओं को उनके ठिकानों पर भेजे गए नोटिस
प्रशासन ने इस विज्ञापन मुहिम से जुड़े तीन प्रमुख फिल्मी सितारों को नोटिस थमाए हैं। अजय देवगन को उनके जुहू स्थित आवास पर नोटिस भेजा गया, जबकि शाहरुख खान के बांद्रा स्थित मन्नत पते पर इसे पहुंचाया गया। तीसरे अभिनेता टाइगर श्रॉफ को यह कागजात उनकी निर्माण कंपनी टाइगर श्रॉफ प्रोडक्शंस एलएलपी के पते पर दिए गए। नोटिस जारी होने के बाद सार्वजनिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई, मगर किसी भी कलाकार ने सार्वजनिक तौर पर अपनी राय जाहिर नहीं की थी।
खाद्य सुरक्षा कानून के कड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई
फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने अपनी कार्रवाई का आधार फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006 की धारा 24 को बनाया है। यह धारा खाद्य पदार्थों से जुड़े भ्रामक, गुमराह करने वाले या अवैध प्रचार पर पूरी तरह से रोक लगाती है। विभाग पिछले कई महीनों से दूध और अन्य खाद्य सामग्रियों में मिलावट, शिक्षण संस्थानों के आसपास बिकने वाली चीजों तथा प्रतिबंधित गुटखा व तंबाकू उत्पादों की अवैध बिक्री के खिलाफ सख्त अभियान चला रहा है। इसी अभियान के क्रम में नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है।



















