कानपुर में देश विरोधी गतिविधियों की जांच के सिलसिले में पकड़े गए अंकित संखवार को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की पड़ताल में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। यूपी एटीएस की छानबीन से पता चला है कि अंकित पिछले करीब 10 महीनों से विदेशी संपर्कों के एक बड़े डिजिटल तंत्र से जुड़ा हुआ था। इस दौरान बांग्लादेश में मौजूद एक हैंडलर उसे लगातार निर्देश दे रहा था। दोनों के बीच शुरुआती संपर्क ऑनलाइन गेमिंग और शेयर ट्रेडिंग के जरिए हुआ था, जिसके बाद पैसे कमाने की होड़ में अंकित फर्जी ईमेल अकाउंट बनाकर विदेशों में बेचने के काम में उतर गया। मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की छानबीन में पाकिस्तान, बांग्लादेश, मिस्र, तुर्की और अमेरिका के फोन नंबरों से लगातार संपर्कों के प्रमाण मिले हैं, जिनकी वास्तविक भूमिका का पता लगाया जा रहा है।
प्रॉक्सी और स्क्रिप्ट के जरिए बड़े पैमाने पर अकाउंट बनाने का तरीका
अंकित ने अपनी पहचान छुपाते हुए प्रॉक्सी नेटवर्क का सहारा लेकर फर्जी ईमेल आईडी तैयार करना शुरू किया था। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि उसने अपनी सबसे पहली फर्जी ईमेल आईडी अलामीन नाम के एक व्यक्ति को बेची थी। इस सौदे के बाद अलामीन ने अंकित का दायरा बढ़ाया और पाकिस्तान, तुर्की तथा मिस्र समेत कई अन्य देशों में संपर्कों की एक पूरी कड़ी तैयार करने में मदद की। धीरे-धीरे अंकित ने बड़े पैमाने पर ईमेल आईडी का उत्पादन शुरू कर दिया।
वह प्रोग्रामिंग लैंग्वेज स्क्रिप्ट का इस्तेमाल करके ईमेल आईडी तैयार करता था, जिससे मोबाइल नंबर सत्यापन की अनिवार्य शर्त को आसानी से दरकिनार कर दिया जाता था। इस ऑटोमेटेड तकनीक के माध्यम से एक साथ हजारों ईमेल आईडी तैयार हो जाती थीं। अपनी वास्तविक पहचान और इंटरनेट लोकेशन को छिपाने के लिए वह लैपटॉप के आईपी एड्रेस को वीपीएन और प्रॉक्सी नेटवर्क के जरिए लगातार बदलता रहता था। सुरक्षा एजेंसियों को उसके लैपटॉप से करीब पांच लाख ईमेल आईडी की सूची मिली है। अब इस बात का बारीक विश्लेषण किया जा रहा है कि इन आईडी में से किनका इस्तेमाल विभिन्न धमकियों और गैरकानूनी गतिविधियों के लिए किया गया।
क्रिप्टोकरेंसी में भुगतान और सोशल मीडिया नेटवर्क की पड़ताल
वित्तीय लेनदेन की पड़ताल में सुरक्षा एजेंसियों को संकेत मिले हैं कि अलामीन ने अंकित को 6000 यूएसडीटी का भुगतान किया था। मोबाइल और डिजिटल वॉलेट की जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि रकम सीधे क्रिप्टोकरेंसी के जरिए ट्रांसफर की गई थी। अब इस डिजिटल रकम के मूल स्रोत और इसमें शामिल अन्य वित्तीय कड़ियों का पता लगाया जा रहा है। इसके साथ ही उसके बैंक खातों की भी गहन समीक्षा की जा रही है।
अंकित के वॉट्सऐप और फेसबुक पर सक्रिय बाय एंड सेल ग्रुप भी जांच के घेरे में आ चुके हैं। वह इन सोशल मीडिया ग्रुपों का उपयोग ईमेल आईडी और पासवर्ड के खरीदारों को तलाशने के लिए करता था। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के अनुसार, इस पूरे मामले में संभावित आतंकी कड़ियों की पड़ताल के लिए एटीएस के साथ एनआईए की टीमें भी डिजिटल डाटा का विश्लेषण करने में जुटी हुई हैं। मोबाइल फोन में मिले सभी संदिग्ध विदेशी फोन नंबरों को सक्रिय रूप से ट्रैक किया जा रहा है।
स्कूलों और मुंबई मेयर दफ्तर को मिली धमकियों से जुड़ा घटनाक्रम
यह मामला पहली बार 12 अक्टूबर को उस समय सामने आया था जब दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम के कई स्कूलों को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी भेजी गई थी। उस धमकी भरे संदेश में खालिस्तान नेशनल आर्मी और बब्बर खालसा का जिक्र किया गया था। स्कूलों के साथ-साथ पंजाबी गायक दिलजीत दोसांझ के दिल्ली-एनसीआर में होने वाले प्रस्तावित कार्यक्रम और उनके आवास को भी बम से उड़ाने की चेतावनी दी गई थी। इसके कुछ ही दिनों बाद 23 अक्टूबर को एक अन्य फर्जी ईमेल के जरिए मुंबई के मेयर कार्यालय को भी बम विस्फोट की धमकी भेजी गई।
जब जांच एजेंसियों ने इन संदेशों के आईपी एड्रेस और डिजिटल ट्रेल का पीछा किया, तो कड़ियां कानपुर के घाटमपुर स्थित अनोइया गांव के मूल निवासी अंकित संखवार तक जा पहुंचीं। इसके बाद एटीएस की टीम ने पश्चिम पारा के सकरापुर, देहली सुजानपुर स्थित उसके घर पर दबिश देकर उसे हिरासत में लिया। 29 अक्टूबर को उसकी औपचारिक गिरफ्तारी दर्ज की गई। तलाशी में मिले लैपटॉप और डिजिटल उपकरणों से पांच लाख फर्जी ईमेल का जखीरा बरामद हुआ, जिसके बाद विदेशी नेटवर्क के साथ उसकी सीधी भूमिका की व्यापक जांच चल रही है।



















