ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महिलाओं के प्रयास अब धरातल पर सार्थक परिणाम दिखा रहे हैं। अमेठी जनपद में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित स्वयं सहायता समूहों ने स्थानीय महिलाओं के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार किया है। जो महिलाएं पहले नियमित रोजगार के अभाव और पारिवारिक तंगी से जूझ रही थीं, वे अब स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके स्वावलंबी बन रही हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की एक जनपद एक उत्पाद योजना के अंतर्गत अमेठी के पारंपरिक मूंज क्राफ्ट को विशेष प्रोत्साहन मिला है, जिसके चलते यहां तैयार होने वाले हस्तशिल्प की मांग स्थानीय बाजार के साथ-साथ बाहरी क्षेत्रों में भी तेजी से बढ़ रही है।
नदी किनारे की घास से घर की सजावट तक का सफर
मूंज से विभिन्न उपयोगी और कलात्मक वस्तुएं तैयार करने की प्रक्रिया पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल और पारंपारिक कौशल पर आधारित है। महिलाएं सबसे पहले नदियों के किनारे उगने वाली प्राकृतिक मूंज घास को एकत्र करने जाती हैं। इसके बाद घास की व्यवस्थित रूप से छंटाई और साफ-सफाई की जाती है। पूरी नमी सूख जाने के बाद, कुशल हाथों से उसकी बारीक नक्काशी और बुनाई का काम शुरू होता है। उत्पाद के आकार और डिजाइन के आधार पर विभिन्न महिलाएं लगभग एक से दो दिन का समय लगाकर अलग-अलग वस्तुएं तैयार करती हैं।
इन उत्पादों की श्रृंखला में घरेलू उपयोग और सजावट की दर्जनों वस्तुएं शामिल हैं। समूहों द्वारा बैठने के लिए आकर्षक कुर्सियां, मेज, रोटी रखने के डब्बे, पेन बॉक्स, डिजाइनर कप और पूजा में प्रयुक्त होने वाले पारंपरिक आसन प्रमुखता से बनाए जा रहे हैं। इन हस्तनिर्मित उत्पादों की सबसे बड़ी विशेषता उनका टिकाऊपन है। प्राकृतिक रेशों से बने होने के कारण ये सामान सालों-साल खराब नहीं होते, जिससे खरीदारों के बीच इनका आकर्षण लगातार बना रहता है।
वित्तीय सहायता, अनुदान और आवेदन की व्यवस्था
मूंज क्राफ्ट का काम शुरू करने की प्रक्रिया को बेहद सरल और ग्रामीण महिलाओं के अनुकूल बनाया गया है। इस स्वरोजगार को शुरू करने के इच्छुक समूह को उपायुक्त उद्योग कार्यालय अमेठी में अपना आवेदन प्रस्तुत करना होता है। व्यवस्था के अंतर्गत बिना किसी गारंटी के 5 लाख रुपये तक की धनराशि का वित्तीय प्रावधान उपलब्ध कराया जाता है, जिस पर 25 प्रतिशत की छूट यानी अनुदान की सुविधा मिलती है। इसके लिए समूह में 11 महिला सदस्यों का होना आवश्यक है। आवेदन के साथ सभी 11 सदस्यों के नाम, आधार कार्ड, बैंक पासबुक की छायाप्रति, मोबाइल नंबर और स्थायी निवास प्रमाण पत्र जमा करने होते हैं।
वित्तीय ऋण के अतिरिक्त, महिलाओं को आवश्यक संसाधन जुटाने के लिए भी भटकना नहीं पड़ता। उपयुक्त उद्योग कार्यालय अमेठी द्वारा आवेदन स्वीकृत होने के बाद हस्तशिल्प तैयार करने के लिए जरूरी टूल किट उपलब्ध कराई जाती है। यदि किसी महिला को कार्य का पूर्व अनुभव नहीं है अथवा वह अपने कौशल को निखारना चाहती है, तो उसके लिए पूर्णतया निशुल्क प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जाती है। इच्छुक महिलाएं किसी भी कार्य दिवस के दौरान कार्यालय में उपस्थित होकर अपना आवेदन जमा कर सकती हैं।
कर्ज के चंगुल से मुक्ति और नियमित कमाई
आर्थिक तंगी के समय महाजनों से ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेने की मजबूरी अब समाप्त हो चुकी है। समूह से जुड़ी सदस्य मंजू मौर्य बताती हैं कि पहले परिवार में पैसों के किसी भी बड़े लेन-देन अथवा तात्कालिक जरूरत के लिए दूसरों से कर्ज मांगना पड़ता था। आज स्वयं सहायता समूह के माध्यम से नियमित छोटी-छोटी बचत करने से यह समस्या दूर हो गई है। जब भी किसी सदस्य को आवश्यकता होती है, उसे समूह से आसानी से एकमुश्त धनराशि मिल जाती है। इसके साथ ही मूंज उत्पादों की बिक्री से मिलने वाला नियमित मुनाफा परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती दे रहा है।
बाजार में इन हस्तशिल्प उत्पादों की कीमत उनके आकार और कलात्मकता के अनुसार तय होती है। न्यूनतम 200 रुपये से लेकर 1000 और 2000 रुपये तक के उत्पाद आसानी से बिक जाते हैं। इस निरंतर बिक्री के बल पर महिलाएं घर बैठे ही प्रतिमाह 25 से 30 हजार रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं, जिससे उनका घरेलू जीवन आर्थिक रूप से सुरक्षित हुआ है।
सामाजिक सम्मान और सरकारी योजनाओं का दोहरा लाभ
स्वयं सहायता समूहों ने महिलाओं को केवल वित्तीय सुरक्षा ही नहीं दी है, बल्कि समाज में उन्हें एक स्वतंत्र पहचान भी दिलाई है। समूह की सदस्य शीला प्रजापति का कहना है कि समूह से जुड़ने के बाद महिलाओं की सामाजिक स्थिति में व्यापक बदलाव आया है। समाज में जो मान-सम्मान और पहचान पहले नहीं मिल पाती थी, वह आत्मनिर्भरता के बाद सहज रूप से मिलने लगी है।
समूह से जुड़ने का एक और बड़ा फायदा यह हुआ है कि महिलाओं को विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है। सदस्यों को प्रधानमंत्री आवास जैसी योजनाओं के तहत पक्के मकान और अन्य बुनियादी सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध हो रही हैं। इस तरह समूह के माध्यम से उन्हें हस्तशिल्प कारोबार से स्वतंत्र आमदनी और राज्य की विकास योजनाओं का दोहरा संबल एक साथ मिल रहा है।















