जयपुर जिले के मनोहरपुर कस्बे में शांति नगर स्थित मठ परिसर से जुड़ी जमीन पर कथित कब्जे का विवाद गहरा गया है। इलाके में जैसे ही मठ की जमीन पर नया निर्माण कार्य शुरू होने की खबर फैली, भारी संख्या में स्थानीय ग्रामीण एकत्र होकर मौके पर पहुंच गए। आक्रोशित ग्रामीणों ने निर्माण स्थल पर पहुंचकर काम को पूरी तरह रुकवा दिया और जमीन पर हो रही इस गतिविधि का पुरजोर विरोध किया। घटना के बाद मठ के संतों और ग्रामीणों ने प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए गांधी चौक पर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
प्रशासनिक सुस्ती से भूमाफिया के हौसले बुलंद होने का आरोप
स्थानीय नागरिकों का सीधा आरोप है कि कुछ भूमाफिया तत्वों ने कथित तौर पर मठ की पवित्र भूमि को हथियाने के मकसद से वहां रातों-रात निर्माण कार्य शुरू करवा दिया था। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में पहले ही प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित शिकायतें दी थीं। इसके बावजूद शासन और प्रशासन के स्तर पर समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लोगों का मानना है कि प्रशासनिक स्तर पर बरती गई इसी ढिलाई की वजह से अतिक्रमणकारियों का दुस्साहस बढ़ा और उन्होंने बेखौफ होकर जमीन पर निर्माण खड़ा करने की कोशिश की।
धार्मिक और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी है मठ की जमीन
ग्रामीणों ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि शांति नगर में स्थित यह भूमि केवल एक साधारण भूखंड नहीं है, बल्कि यह मठ की धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के लिए दशकों से उपयोग में लाई जाती रही है। ऐसे में जब इस जमीन पर अचानक निर्माण सामग्री डालकर काम शुरू कराया गया, तो लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और वे तुरंत लामबंद हो गए। मौके पर काम बंद कराने के दौरान ग्रामीणों में भारी रोष देखा गया। स्थानीय निवासियों का स्पष्ट कहना है कि यदि प्रशासन ने शिकायतों के आधार पर समय पर जमीन का सीमांकन कर स्थिति साफ कर दी होती, तो इस विवाद को इस सीमा तक बढ़ने से आसानी से रोका जा सकता था।
गांधी चौक पर अनिश्चितकालीन धरना, राजस्व रिकॉर्ड की जांच की मांग
निर्माण स्थल पर तनाव फैलने के तुरंत बाद मठ से जुड़े संत और बड़ी तादाद में ग्रामीण गांधी चौक पर जमा हो गए और वहीं जमीन पर बैठकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। आंदोलन कर रहे लोगों ने प्रशासन के समक्ष स्पष्ट मांग रखी है कि मठ की इस विवादित जमीन की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। धरने पर बैठे संतों का कहना है कि सरकारी राजस्व रिकॉर्ड खंगाले जाएं और मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का मिलान किया जाए ताकि यह कानूनी रूप से स्पष्ट हो सके कि यह जमीन मूल रूप से किसके नाम दर्ज है और इसका अधिकृत उपयोग क्या तय किया गया है।
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन, समाधान की गुहार
धरना दे रहे संतों और ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि राजस्व जांच में अवैध कब्जे या अतिक्रमण की पुष्टि होती है, तो उस ढांचे को तुरंत ध्वस्त किया जाए। साथ ही गैरकानूनी ढंग से निर्माण कराने के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी नियमों के तहत सख्त मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यह मात्र एक जमीनी झगड़ा नहीं, बल्कि धार्मिक धरोहर और मठ की प्रतिष्ठा से जुड़ा संवेदनशील विषय है। प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक निर्माण कार्य पर पूर्ण विराम लगाकर जमीन की स्थिति आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं की जाती, तब तक गांधी चौक पर उनका शांतिपूर्ण धरना जारी रहेगा। फिलहाल प्रशासन के त्वरित हस्तक्षेप की मांग के बीच मनोहरपुर में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।






















