नागौर के ब्रह्मपुरी में 400 साल पुराना श्री महालक्ष्मी मंदिर, कमल पुष्प पर विराजी चार भुजाओं वाली माता देती हैं समृद्धि का आशीषशांति नगर में मठ की भूमि पर निर्माण को लेकर भड़का आक्रोश, गांधी चौक पर संत और ग्रामीण धरने पर डटेसुल्तानपुर के ऐतिहासिक राहुल टॉकीज को दोबारा जिंदा करने की तैयारी, 2016 से बंद पड़े सिनेमा हॉल की बदलेगी सूरतबरमूडा से बोस्टन जा रहा एयर एम्बुलेंस जेट लापता, पायलट ने कहा 'कुछ दिखाई नहीं दे रहा'बचत और निवेश में तालमेल बनाकर सुरक्षित करें भविष्य, समझें अपनी पूंजी बढ़ाने के ठोस नियमओपेक प्लस के यथास्थिति फैसले और जी7 की आपातकालीन निकासी से कच्चे तेल में फिसलन, डब्ल्यूटीआई 89 डॉलर के करीबकश्मीर घाटी में अक्टूबर की तपिश से टूटे दशकों पुराने रिकॉर्ड, सेब की खेती पर भारी मारवैश्विक तनाव के बीच अमेरिकी डॉलर की मजबूत मांग, दबाव में आया न्यूजीलैंड डॉलरवैश्विक तनाव और बॉन्ड यील्ड में तेजी से अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 102 के पार, सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ीसारण में बाढ़ पीड़ितों पर हथियार लहराने वाले थाना प्रभारी संग्राम कुमार सिंह निलंबित, इलाके में गहराया संकट
बरमूडा से बोस्टन जा रहा एयर एम्बुलेंस जेट लापता, पायलट ने कहा 'कुछ दिखाई नहीं दे रहा'पड़ताल
5 अक्तू॰ 2026, 8:26 am (47 मिनट पहले)· 1

बरमूडा से बोस्टन जा रहा एयर एम्बुलेंस जेट लापता, पायलट ने कहा 'कुछ दिखाई नहीं दे रहा'

बरमूडा से बोस्टन के लिए उड़ान भरने वाला एक कनाडाई एयर एम्बुलेंस विमान छह लोगों के साथ लापता हो गया है। पायलट ने संपर्क टूटने से पहले शून्य दृश्यता की जानकारी दी थी, जबकि विशेषज्ञ दुर्घटना को तकनीकी खामियों से जोड़कर देख रहे हैं।

अटलांटिक महासागर में स्थित बरमूडा से संयुक्त राज्य अमेरिका के बोस्टन जा रहा एक कनाडाई एयर एम्बुलेंस जेट 2-3 अक्टूबर की दरमियानी रात को अचानक लापता हो गया। इस मध्यम आकार के 'गल्फस्ट्रीम जी100' विमान में कुल छह लोग सवार थे। उड़ान भरने के बाद विमान को 1 घंटा 44 मिनट में बोस्टन पहुंचना था, लेकिन निर्धारित समय से 39 मिनट पहले ही इसका एयर ट्रैफिक कंट्रोलर से संपर्क टूट गया। रडार से ओझल होने से ठीक पहले पायलट ने नियंत्रण कक्ष को बताया था कि वह पूरी तरह से ब्लाइंड उड़ान भर रहा है और उसे बाहर कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है। समुद्र के इस व्यापक इलाके में उड़ानों और जहाजों के लापता होने की पुरानी कहानियों के कारण इस घटना ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया है।

कनाडाई एयर एम्बुलेंस उड़ान की पूरी घटनाक्रम

लापता जेट कनाडा की एयर एम्बुलेंस सेवा प्रदाता लैटीट्यूड कंपनी से संबंधित है। स्थानीय समयानुसार 2-3 अक्टूबर की रात 12:41 बजे इस विमान ने बरमूडा के एल.एफ. वेड एयरपोर्ट से बोस्टन के लोगन एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरी थी। शेड्यूल के अनुसार विमान को रात 2:25 बजे बोस्टन में उतरना था। विमान में सवार छह लोगों में चार कनाडाई नागरिक और दो बरमूडा के निवासी शामिल थे। इनमें एक मरीज, मरीज का एक परिजन, दो चिकित्सा कर्मी और दो पेशेवर पायलट मौजूद थे।

ये भी पढ़ें

उड़ान के शुरुआती दौर में विमान 24,000 फीट की सामान्य ऊंचाई पर क्रूज कर रहा था। उड़ान भरने के लगभग 1 घंटा 5 मिनट बाद विमान में अप्रत्याशित रूप से तेज गिरावट दर्ज की गई। विमान ने महज 2 मिनट के भीतर लगभग 13,000 फीट की ऊंचाई खो दी। रात 1:46 बजे पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोलर से संपर्क साधा और कहा कि उसे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है। बोस्टन एयरपोर्ट के एक स्थानीय टीवी स्टेशन ने इस रेडियो बातचीत को रिकॉर्ड किया था।

नियंत्रण कक्ष ने तत्काल पलटकर पूछा कि क्या वे बिना किसी दृश्यता के आ रहे हैं और क्या विमान किसी आपात स्थिति में है। हालांकि इस सवाल का कॉकपिट से कोई जवाब नहीं मिला। भारी ऊंचाई गंवाने के बावजूद विमान कुछ समय तक हवा में उड़ता रहा और फिर रडार स्क्रीन से गायब हो गया। सामने आई तकनीकी जानकारियों के अनुसार, विमान बोस्टन से केवल 15 मिनट की दूरी पर था जब उसमें विद्युत प्रणाली की गंभीर खराबी पैदा हुई, जिससे उसका रेडियो और रडार दोनों काम करना बंद कर गए। वर्तमान में संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा की उड्डयन एजेंसियां मामले की संयुक्त जांच कर रही हैं।

क्या इस दुर्घटना का बरमूडा ट्रायंगल से कोई सीधा संबंध है?

विमान ने भले ही बरमूडा द्वीप से उड़ान भरी थी, लेकिन तकनीकी और भौगोलिक तथ्यों के आधार पर इस दुर्घटना को बरमूडा ट्रायंगल की परिधि से जोड़ना उचित नहीं माना जा रहा है। उत्तरी अटलांटिक महासागर में संयुक्त राज्य अमेरिका के फ्लोरिडा तट, ब्रिटेन के बरमूडा द्वीप और प्यूर्टो रिको को मिलाने वाली काल्पनिक त्रिकोणीय सीमा को 'बरमूडा ट्रायंगल' कहा जाता है। यह पूरा समुद्री क्षेत्र लगभग 13 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।

लापता कनाडाई जेट का उड़ान मार्ग वास्तव में बरमूडा ट्रायंगल के मुख्य इलाके के ऊपर से नहीं गुजर रहा था। जब विमान का एयर ट्रैफिक कंट्रोलर से संपर्क टूटा, तब तक वह बरमूडा ट्रायंगल से काफी दूर उत्तर की ओर निकल चुका था। विमान की अंतिम ज्ञात स्थिति मैसाचुसेट्स के नानटुकेट आइलैंड एयरपोर्ट के समीप दर्ज की गई थी। इसका सीधा अर्थ यह है कि विमान अमेरिकी तटीय क्षेत्र के बेहद करीब पहुंच चुका था और वहां से बोस्टन के लोगन एयरपोर्ट की हवाई दूरी मात्र 146 किलोमीटर शेष रह गई थी।

यूएस फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने लगभग 1:20 बजे खोज और बचाव चेतावनी जारी की थी। घटना के कुछ घंटों बाद अमेरिकी तटरक्षक दल को उस समुद्री इलाके में तैरता हुआ कुछ मलबा दिखाई दिया, जिसके उसी जेट का होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि विमान में सवार छह लोगों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

इतिहास में दर्ज जहाजों और विमानों के लापता होने के प्रमुख मामले

इस समुद्री क्षेत्र में विचित्र घटनाओं का सबसे पहला लिखित उल्लेख 1492 का मिलता है, जब अमेरिका की खोज करने वाले नाविक क्रिस्टोफर कोलंबस अपने 90 साथियों और तीन बड़े जहाजों के साथ यहां से गुजरे थे। उनके जहाज की लॉगबुक में दर्ज किया गया था कि समुद्र में आग की लपटें दिखाई दी थीं और दिशा सूचक कंपास की सुई असामान्य हरकतें कर रही थी।

इसके बाद 31 दिसंबर 1812 को पहली बार किसी जहाज के पूरी तरह गायब होने का बड़ा मामला दर्ज हुआ। अमेरिकी जहाज 'पैट्रियट' दक्षिण कैरोलिना से न्यूयॉर्क के लिए रवाना हुआ था, जिसमें तत्कालीन अमेरिकी उपराष्ट्रपति हारून बूर की बेटी थियोडोसिया सवार थीं। यह जहाज इस इलाके में अचानक लापता हो गया। ठीक तीन साल बाद 'यूएसएस एपरवियर' जहाज भी गायब हो गया, जिसके मलबे या 135 सवारों के शवों का कभी कोई निशान नहीं मिला।

मार्च 1918 में अमेरिकी नौसैनिक जहाज 'यूएसएस साइक्लोप्स' के गायब होने के बाद इस क्षेत्र की चर्चा दुनिया भर में फैल गई। यह जहाज 10,000 टन मैंगनीज और 309 लोगों को लेकर जा रहा था, जिसका 108 साल बीत जाने के बाद भी कोई मलबा नहीं मिला। इस क्षेत्र से गुजरते समय गायब होने वाली लगभग 50 प्रमुख घटनाएं दर्ज की गई हैं

  • 5 दिसंबर 1945: अमेरिकी सेना के पांच टीबीएम एवेंजर बॉम्बर विमान एक नियमित प्रशिक्षण मिशन पर निकले थे, जिनमें एक कैप्टन और 13 ट्रेनी पायलट थे। सभी पांचों विमान गायब हो गए और उनकी तलाश में भेजे गए दो मार्टिन मेरिनर विमान भी 13 लोगों समेत वापस नहीं लौटे।
  • 28 दिसंबर 1948: प्यूर्टो रिको से 39 लोगों को लेकर उड़ा डगलस डीसी-3 विमान मियामी पहुंचने से केवल 50 मील पहले अचानक गायब हो गया।
  • मई 1968: अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी 'यूएसएस बिच्छू' लापता हो गई, जिसके सटीक कारणों का आज तक पता नहीं चल पाया है।
  • 15 अक्टूबर 1976: ब्राजील से फिलाडेल्फिया जा रहा 590 फीट लंबा एक व्यापारिक जहाज 37 चालक दल के सदस्यों के साथ गायब हो गया, जिसका केवल थोड़ा मलबा और एक लाइफबोट मिली।
  • 18 जून 2003: नवविवाहित जोड़ा फ्रैंक और रोमिना लियोन फ्लोरिडा तट से एक नई नाव पर निकले और कभी वापस नहीं लौटे।
  • 15 मई 2017: प्यूर्टो रिको से फ्लोरिडा जा रहा मित्सुबिशी एमयू-2बी-40 विमान चार यात्रियों सहित रडार से ओझल हो गया और फिर कभी नहीं मिला।

गायब होने की घटनाओं को लेकर सामने आए प्रमुख वैज्ञानिक और गैर-वैज्ञानिक सिद्धांत

बरमूडा क्षेत्र में जहाजों और विमानों के लापता होने को समझाने के लिए समय-समय पर पांच प्रमुख सिद्धांत प्रस्तुत किए गए हैं

अक्टूबर 2016 में कोलोराडो स्टेट यूनिवर्सिटी के मौसम विज्ञानी रैंडी सर्वनी ने छह कोनों वाले हेक्सागोनल बादलों का सिद्धांत सामने रखा। 20 से 55 मील चौड़े ये बादल हवा में बम जैसा विस्फोटक दबाव बनाते हैं। इससे लगभग 273 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाएं उत्पन्न होती हैं, जो जहाजों और विमानों को सीधे समुद्र तल की ओर खींच सकती हैं।

वर्ष 1999 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के भूविज्ञानी डॉ. बेन क्लेनेल ने समुद्र तल में दबे मीथेन हाइड्रेट गैस के विशाल भंडारों के फटने का सिद्धांत दिया। यदि यह गैस अचानक पानी में ऊपर उठती है, तो पानी झागदार हो जाता है और उसका घनत्व इतना घट जाता है कि जहाज तैरने में असमर्थ होकर डूब जाते हैं। ऑस्ट्रेलिया में किए गए प्रयोगों ने भी साबित किया है कि पानी में गैस के बुलबुले जहाजों को डुबो सकते हैं। वहीं हवा में घुलने पर यह ज्वलनशील गैस विमानों के इंजनों को बंद कर सकती है।

वर्ष 1950 के आसपास यह दावा प्रचलित हुआ कि यह क्षेत्र एगोणिक लाइन पर स्थित है, जहां चुंबकीय उत्तर और भौगोलिक उत्तर एक ही सीध में आ जाते हैं। इससे अनजान नाविक या पायलट कंपास की रीडिंग को गलत समझ सकते हैं, जिससे दिशा भ्रम की स्थिति बनती है।

वर्ष 1970 में फ्लोरिडा के पायलट ब्रूस गर्नन ने एंड्रॉस द्वीप से फ्लोरिडा की उड़ान के दौरान एक अजीब बादल की सुरंग में इलेक्ट्रॉनिक कोहरे का अनुभव करने का दावा किया था। उनका कहना था कि सभी उपकरण ठप हो गए थे और उन्होंने सामान्य रूप से 1 घंटे में तय होने वाली 100 मील की दूरी केवल 3 मिनट 20 सेकंड में पूरी कर ली। इस अनुभव का विवरण उन्होंने 2016 में प्रकाशित अपनी पुस्तक 'बियॉन्ड द बरमूडा ट्रायंगल' में दिया।

इसके अतिरिक्त, वर्ष 2005 में साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय के एक अध्ययन ने बताया कि कई तूफानों के आपस में टकराने से 30 मीटर ऊंची विशाल समुद्री लहरें उठ सकती हैं जो बड़े जहाजों को डुबोने में सक्षम हैं। वहीं चार्ल्स बर्लिट्ज़ की 1974 की पुस्तक 'द बरमूडा ट्रायंगल' के जरिए समुद्र के नीचे खोए हुए शहर 'अटलांटिस' की प्राचीन उन्नत तकनीक या एलियन स्पेसशिप होने के अपुष्ट दावे भी लोकप्रिय हुए।

बरमूडा द्वीप के नीचे वैज्ञानिकों द्वारा की गई नई भूगर्भीय खोज

कार्नेगी इंस्टीट्यूशन फॉर साइंस और येल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक विलियम फ्रेजर और जेफरी पार्क का एक शोध पत्र 8 मई को प्रकाशित हुआ था। इस अध्ययन में पाया गया कि बरमूडा द्वीप के नीचे एक अत्यंत असामान्य भूगर्भीय संरचना मौजूद है, जो दुनिया में अन्यत्र कहीं नहीं देखी गई है।

आम तौर पर समुद्र के बीच स्थित ज्वालामुखी द्वीप उनके नीचे मौजूद मेंटल प्लूम यानी पृथ्वी के भीतर से उठने वाले अत्यधिक गर्म चट्टानी स्तंभों पर टिके होते हैं। यह प्लूम समुद्री तल को ऊपर धकेलता है, लेकिन टेक्टोनिक प्लेटों के खिसकने के साथ ऐसे द्वीप धीरे-धीरे फिर से समुद्र में समाने लगते हैं। इसके विपरीत, बरमूडा द्वीप पिछले 3 करोड़ वर्षों से बिना किसी हलचल के समुद्र तल से लगभग 1,600 फीट की ऊंचाई पर स्थिर बना हुआ है।

वैज्ञानिकों ने भूकंपीय तरंगों के जरिए बरमूडा द्वीप के 20 मील नीचे की आंतरिक संरचना का त्रिआयामी मानचित्र तैयार किया। जांच में समुद्र तल के नीचे 12 मील मोटी चट्टान की एक अनोखी परत पाई गई। यह परत किसी पारंपरिक मेंटल प्लूम की तुलना में काफी हल्की और कम घनत्व वाली है। इस प्रकार बरमूडा द्वीप इस हल्की चट्टान पर एक तैरती हुई नाव की तरह टिका हुआ है।

हालांकि, यह शोध केवल 54 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले बरमूडा द्वीप के ठीक नीचे की भूगर्भीय बनावट तक सीमित है, जबकि संपूर्ण बरमूडा ट्रायंगल 13 लाख वर्ग किलोमीटर का एक विशाल महासागरीय क्षेत्र है। इस शोध में विमान या नौका हादसों का कोई उल्लेख नहीं है, किंतु इसकी अनूठी संरचना के कारण इसे अक्सर इस क्षेत्र की रहस्यमयी चर्चाओं से जोड़कर देखा जाता है।

विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं का वास्तविक निष्कर्ष

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिकों और उड्डयन विशेषज्ञों का बड़ा वर्ग किसी भी अलौकिक शक्ति के दावों को पूरी तरह खारिज करता है। अमेरिकी संगठन नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के अनुसार, इस क्षेत्र में होने वाली दुर्घटनाएं खराब मौसम, नेविगेशन की गलतियों और मानवीय भूलों के कारण होती हैं।

अमेरिकी शोधकर्ता लॉरेंस डेविड कुशे ने अपनी पुस्तक 'द बरमूडा ट्रायंगल मिस्ट्री सॉल्व्ड' में स्पष्ट किया है कि इस क्षेत्र के हादसों को अत्यधिक बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है, जबकि दुनिया के अन्य व्यस्त समुद्री मार्गों की तुलना में यहां दुर्घटना दर सामान्य है। वर्ष 2021 में सिंगापुर के शोधकर्ता डेरिक ली ने दुनिया भर के 85,000 से अधिक विमान हादसों का डेटा विश्लेषण किया, जिसमें से केवल 56 घटनाएं बरमूडा ट्रायंगल क्षेत्र से संबंधित थीं। डेरिक के अनुसार इन हादसों में कोई भी रहस्यमयी या असामान्य पैटर्न नहीं पाया गया।

दुनिया में ऐसे कई अन्य समुद्री क्षेत्र हैं जो बरमूडा ट्रायंगल से कहीं अधिक खतरनाक माने जाते हैं। उदाहरण के लिए, अर्जेंटीना के समीप स्थित ड्रेक पैसेज में 40 फीट ऊंची समुद्री लहरें उठती हैं, जहां इतिहास में लगभग 800 जहाज नष्ट हो चुके हैं और 20,000 से अधिक नाविकों की जान जा चुकी है।

सवाल-जवाब

लापता एयर एम्बुलेंस विमान में कुल कितने लोग सवार थे?
विमान में कुल छह लोग सवार थे, जिनमें चार कनाडाई और दो बरमूडा निवासी शामिल थे।
विमान ने कहां से कहां के लिए उड़ान भरी थी?
विमान ने बरमूडा के एल.एफ. वेड एयरपोर्ट से बोस्टन के लोगन एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरी थी।
पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को अंतिम संदेश में क्या कहा था?
पायलट ने कहा था कि वह कुछ भी देख नहीं पा रहा है और शून्य दृश्यता में उड़ान भर रहा है।
विमान का अंतिम संपर्क किस स्थान के पास हुआ था?
विमान की अंतिम स्थिति मैसाचुसेट्स के नानटुकेट आइलैंड एयरपोर्ट के समीप दर्ज की गई थी, जो बोस्टन से 146 किमी दूर है।
विमान में किस प्रकार की तकनीकी समस्या सामने आई थी?
विमान में गंभीर विद्युत खराबी आई थी, जिसके कारण उसका रेडियो और रडार दोनों बंद हो गए थे।
क्या इस दुर्घटना का बरमूडा ट्रायंगल से कोई संबंध है?
नहीं, जब संपर्क टूटा तब तक विमान बरमूडा ट्रायंगल की सीमा से काफी आगे अमेरिकी तट के पास पहुंच चुका था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp