अनानास की फसल तैयार होने और फल तोड़े जाने के बाद अमूमन खेतों में बची पत्तियों और ठूंठ को गैर-जरूरी कचरा मान लिया जाता था। कई बार किसान अगली बुवाई की तैयारी के लिए इन अवशेषों को या तो खेतों में ही सड़ने के लिए छोड़ देते थे या फिर उन्हें आग के हवाले कर देते थे। अब इसी कृषि अपशिष्ट ने पर्यावरण के अनुकूल फैशन और हस्तशिल्प की दुनिया में एक मूल्यवान कच्चे माल का रूप ले लिया है। अनानास की सख्त और लंबी पत्तियों के भीतर मौजूद प्राकृतिक फाइबर की उपयोगिता सामने आने के बाद टेक्सटाइल और क्राफ्ट सेक्टर में इसकी मांग में भारी उछाल दर्ज किया जा रहा है।
पत्तियों से रेशा निकालने की पूरी प्रक्रिया
तुड़ाई के तुरंत बाद बची ताजी हरी पत्तियों से रेशा अलग करने के लिए खास तकनीकों का सहारा लिया जाता है। इसके लिए परंपरागत लकड़ी के फ्रेम और हाथ से चलाए जाने वाले स्क्रैपर टूल का उपयोग किया जाता है, जबकि बड़े पैमाने पर काम करने के लिए आधुनिक डीकॉर्टिकेटर मशीनें लगाई जाती हैं। इस छिलाई के दौरान पत्ती की बाहरी हरी छाल और गूदा पूरी तरह छंटकर अलग हो जाता है। गूदे के हटने के बाद पत्ती के भीतर सुरक्षित महीन, चमकदार और असाधारण रूप से मजबूत धागेनुमा रेशे साफ बाहर निकल आते हैं।
धुलाई, सुखाने और धागा तैयार करने का चरण
निकाले गए इन रेशों को सबसे पहले साफ पानी से अच्छी तरह धोया जाता है ताकि गूदे का कोई भी चिपचिपा अंश बाकी न रहे। इसके बाद इन्हें खुली धूप में सूखने के लिए फैला दिया जाता है। जब ये रेशे धूप में पूरी तरह सूख जाते हैं, तो इनमें रेशम जैसी चमक और जूट जैसी मजबूती और लचीलापन आ जाता है। कारीगर इन मजबूत रेशों को जोड़कर कताई करते हैं और बारीक धागा तैयार करते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस धागे से बुने गए परिधान को 'पिना फैब्रिक' की पहचान मिली हुई है। यह वस्त्र पहनने में बेहद हल्का, हवादार और लंबे समय तक चलने वाला होता है।
वेगन लेदर और उपयोगी रोजमर्रा के सामान
इस प्राकृतिक फाइबर का दायरा केवल कपड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पशु क्रूरता से मुक्त वेगन लेदर का निर्माण भी बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। जानवरों की खाल को नुकसान पहुंचाए बिना तैयार किया जाने वाला यह पर्यावरण-अनुकूल चमड़ा काफी टिकाऊ साबित हो रहा है। इसका उपयोग फैशनेबल बैग, जूते, बेल्ट, जैकेट और यहां तक कि सोफे व कुर्सियों के फर्नीचर कवर तैयार करने में किया जाता है। इसके अतिरिक्त, अनानास के रेशे से बेहतरीन क्राफ्ट पेपर, मजबूत रस्सियां और प्लास्टिक मुक्त पैकेजिंग सामग्री भी तैयार की जा रही है।
कचरे से कमाई और प्रदूषण पर लगाम
यह पूरा नवाचार कचरे से संपदा पैदा करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव लेकर आया है। पहले जिस फसल अवशेष को खेतों से हटाने और नष्ट करने के लिए किसानों को अपनी जेब से मजदूरी और खर्च उठाना पड़ता था, अब उसी अवशेष को बेचकर वे अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, यह प्राकृतिक रेशा प्लास्टिक आधारित सिंथेटिक कपड़ों और सिंथेटिक चमड़े के कारण पर्यावरण को होने वाले नुकसान को रोकने में एक स्वच्छ और टिकाऊ विकल्प बनकर उभर रहा है।

















