दक्षिण कोरियाई सीमा पर उत्तर कोरिया की हलचल, तोपों की तैनाती से बढ़ा तनावरणबीर कपूर की 'रामायण' के खौफ से टली अंशुमान झा की 'लकड़बग्घा 2', जानिए अब कब आएगी फिल्मसावन पुत्रदा एकादशी 5 अगस्त को, संतान प्राप्ति के लिए इस शुभ योग में करें पूजामैक्सिकन पेसो में हालिया तेज गिरावट अब सीमित रहने के आसार, कमर्जबैंक का आकलनफर्रुखाबाद के इस प्राचीन शिव मंदिर में एक साथ होते हैं बारह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, महाभारत काल से जुड़ा है गहरा इतिहासअमेरिकी डॉलर के मुकाबले मेक्सिको का पेसो फिसला, 18.60 का स्तर पार करने के बाद कैरी ट्रेड का आकर्षण घटापुणे प्लांट में बनने लगी लैंड रोवर डिफेंडर, कीमतों में 34 लाख रुपये तक की भारी कटौतीसावन में बेलपत्र चढ़ाने का सही नियम क्या है, एक गलती से बेकार हो सकती है पूजाआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टॉक्स में गिरावट और एंथ्रोपिक के आईपीओ से बिटकॉइन पर गहराया दबावचक्रवाती तूफान अर्नब की आहट से सहमा रेल यातायात, 6 राज्यों में दर्जनों एक्सप्रेस व पैसेंजर ट्रेनें रद्द
बहराइच के किसान त्रिलोकी ने देशी जुगाड़ से गाय के मूत्र को सहेजकर शुरू की जैविक खेतीव्यापार
23 अक्तू॰ 2026, 9:07 am (5 दिन पहले)· 3

बहराइच के किसान त्रिलोकी ने देशी जुगाड़ से गाय के मूत्र को सहेजकर शुरू की जैविक खेती

बहराइच जिले के किसान त्रिलोकी ने एक साधारण पाइप और डिब्बे की मदद से मवेशी मूत्र सहेजने की अनोखी तकनीक अपनाई है, जिससे जैविक खाद तैयार कर खेती की लागत घटाई जा रही है।

बहराइच जिले में खेती की बढ़ती लागत से जूझ रहे अन्नदाताओं के लिए एक अनूठी और किफायती पहल सामने आई है। जिले के एक प्रगतिशील किसान ने बिना किसी महंगे संयंत्र के बेहद साधारण तरीके से पशुओं के मूत्र को सहेजने का नायाब रास्ता निकाला है। इस स्वदेशी तकनीक के जरिए न केवल संसाधनों का बेहतरीन उपयोग हो रहा है, बल्कि प्राकृतिक खेती करने में आने वाला खर्च भी काफी हद तक कम हो गया है।

पशु शेड में इस तरह तैयार किया गया है सिस्टम

ग्रामीण क्षेत्रों में खेती किसानी को बेहतर और किफायती बनाने के लिए नित नए प्रयोग किए जा रहे हैं। इसी क्रम में त्रिलोकी ने अपनी गाय के शेड के भीतर एक छोटी सी व्यवस्था स्थापित की है। उन्होंने पशु के खड़े होने के स्थान के ठीक पास तीन से चार फीट लंबा पाइप लगाया है, जिसका दूसरा सिरा जमीन पर रखे पांच लीटर के प्लास्टिक कंटेनर से जोड़ा गया है। जब भी मवेशी मूत्र त्याग करता है, वह सीधा पाइप के रास्ते सुरक्षित रूप से उस डिब्बे में एकत्र हो जाता है।

ये भी पढ़ें

रोजाना मिल रहा है पांच लीटर मवेशी मूत्र

त्रिलोकी के मुताबिक इस सरल सी व्यवस्था की बदौलत उन्हें हर दिन लगभग पांच लीटर मवेशी मूत्र मिल जाता है। इस संचित मूत्र का उपयोग खेतों के लिए जीवामृत, घनजीवामृत, काढ़ा और जैविक उर्वरक तैयार करने में किया जा रहा है। पहले पशुओं का मूत्र खुले में इधर-उधर बहकर बेकार हो जाता था, लेकिन इस छोटे से तकनीकी बदलाव ने उसकी बर्बादी को पूरी तरह रोक दिया है।

यूट्यूब से मिला विचार और दे रहे हैं दूसरों को संदेश

त्रिलोकी साझा करते हैं कि उन्होंने इस तरकीब को करीब चार से पांच साल पहले यूट्यूब के जरिए देखा था, जिसके बाद उन्होंने इसे अपने पशु बाड़े में आजमाने की ठानी। मौजूदा समय में उनके पास एक गाय और एक देशी बछिया समेत कुल दो पशु मौजूद हैं। उनका कहना है कि यदि इलाके के अन्य पशुपालक भी ऐसे छोटे और असरदार तरीकों को अपना लें, तो खेती के खर्चे में भारी कटौती की जा सकती है। त्रिलोकी का दावा है कि इस तरीके से केवल एक गाय के माध्यम से लगभग दस से पंद्रह बीघा जमीन पर आसानी से जैविक और प्राकृतिक खेती की जा सकती है।

सवाल-जवाब

यह अनोखा जुगाड़ किस जिले के किसान ने तैयार किया है?
यह जुगाड़ बहराइच जिले के किसान त्रिलोकी द्वारा तैयार किया गया है।
इस तकनीक में मवेशी मूत्र कैसे एकत्रित किया जाता है?
गाय के बांधने वाले स्थान के पास 3 से 4 फीट लंबा पाइप लगाया गया है जिसका दूसरा सिरा 5 लीटर के प्लास्टिक डिब्बे से जुड़ा है।
त्रिलोकी को प्रतिदिन कितना मवेशी मूत्र प्राप्त होता है?
इस व्यवस्था के जरिए उन्हें प्रतिदिन लगभग 5 लीटर मवेशी मूत्र मिल जाता है।
एकत्रित मूत्र का उपयोग किन चीजों को बनाने में होता है?
इस मूत्र का उपयोग जीवामृत, घनजीवामृत, काढ़ा और जैविक खाद बनाने में किया जाता है।
किसान को इस तकनीक का विचार कहां से मिला था?
त्रिलोकी को यह आइडिया लगभग 4-5 साल पहले यूट्यूब से मिला था।
किसान के पास वर्तमान में कितने मवेशी हैं?
उनके पास वर्तमान में एक गाय और एक देशी बछिया सहित कुल दो मवेशी हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·4 दिन पहले

देसी जुगाड़ से खेती की लागत कम करना वाकई कमाल है, यूट्यूब का सही इस्तेमाल इसे कहते हैं।

Ananya Iyer@ananya-iyer·4 दिन पहले

रविकेश, बिल्कुल सही कहा आपने! यूट्यूब का ऐसा इस्तेमाल देखकर वाकई बहुत अच्छा लगा।

Rohan Gupta@rohan-gupta·4 दिन पहले

गांव के एक दौरे में मैंने देखा था कि कैसे किसान यूट्यूब से तकनीक सीखकर जुगाड़ बनाते हैं। त्रिलोकी भाई का यह पाइप वाला आइडिया खेती का खर्च सच में बहुत कम कर देगा।

Michael Anderson@michael-anderson·4 दिन पहले

रोहन भाई, अमेरिका में भी आजकल ऐसे छोटे लोकल इन्नोवेशन से छोटे किसानों की लागत घटाने की बात जोरों पर है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp