देश के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में गिने जाने वाले बैंक ऑफ बड़ौदा को लेकर एक बड़ी साइबर सुरक्षा से जुड़ी खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बैंक के लाखों ग्राहकों का निजी और संवेदनशील डेटा इंटरनेट पर सार्वजनिक हो गया है। डार्क वेब की गतिविधियों पर नजर रखने वाले प्लेटफॉर्म Ransomware.live के हवाले से सामने आए दावों के मुताबिक, बैंक के 1 लाख से 3 लाख के बीच ग्राहकों का करीब 1 टीबी डेटा लीक कर दिया गया है। इस पूरे मामले के पीछे TripleX नामक एक नए साइबर अपराधी समूह का नाम सामने आ रहा है। हालांकि, वित्तीय संस्थानों और सुरक्षा एजेंसियों की तरफ से इस बड़े डेटा लीक की अभी तक किसी भी प्रकार की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
क्या लीक हुआ है डेटा में
इंटरनेट पर सामने आई इस कथित लिस्टिंग को 24 जुलाई को अपलोड किया गया था। इस लीक डेटा में बैंक के ग्राहकों के अकाउंट ओपनिंग फॉर्म और उनके साथ संलग्न जरूरी दस्तावेज शामिल होने की बात कही गई है। दावों के अनुसार, इसमें खाताधारकों की तस्वीरें, पहचान पत्र और कई अन्य गोपनीय रिकॉर्ड भी मौजूद हैं। इसके अलावा, आधार कार्ड से जुड़ी जानकारियां, बचत और चालू खातों का पूरा रिकॉर्ड, लोन के लिए दिए गए आवेदन, नेट बैंकिंग से जुड़े कागजात, साथ ही एनआरआई बैंकिंग और कॉरपोरेट बैंकिंग से जुड़े दस्तावेज भी इस लीक में शामिल बताए जा रहे हैं। यदि यह दावा सही निकलता है, तो इससे बैंक के एक बड़े ग्राहक वर्ग की सुरक्षा और गोपनीयता पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
विशेषज्ञों की जांच और सैंपल फाइलें
कैशलेस कंज्यूमर के संस्थापक और सॉफ्टवेयर इंजीनियर श्रीकांत लक्ष्मणन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस कथित डेटा सेंधमारी से जुड़ी जानकारियां साझा की हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में बताया कि उन्होंने हैकरों द्वारा ऑनलाइन जारी किए गए कुछ सैंपल दस्तावेजों का गहराई से निरीक्षण किया है। इन फाइलों में बैंक की आंतरिक रिपोर्ट, शाखाओं के ऑडिट से जुड़े कागजात, लोन अप्रेजल पेपर, सतर्कता विभाग यानी विजिलेंस जांच से जुड़े दस्तावेज, bob World की ऑडिट रिपोर्ट और देश के अलग-अलग हिस्सों में फैली शाखाओं के ग्राहक आवेदन फॉर्म शामिल पाए गए। उन्होंने इस पूरी घटना को एक बड़ा साइबर संकट करार दिया है।
साइबर गिरोह का पिछला इतिहास
इस पूरी घटना को अंजाम देने वाले जिस TripleX ग्रुप का नाम सामने आ रहा है, उसकी हरकतें पहले भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बन चुकी हैं। यह वही साइबर अपराधी समूह है जिसने कुछ समय पहले इंडोनेशिया के सरकारी बैंक बैंक नेगारा इंडोनेशिया से लगभग 2 टीबी डेटा चुराने का दावा किया था। इस नए और बड़े दावे के सामने आने के बाद देश-विदेश की साइबर सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं एक बार फिर काफी बढ़ गई हैं, क्योंकि इस तरह के गिरोह लगातार वित्तीय संस्थानों को निशाना बना रहे हैं।
बैंक और एजेंसियों की प्रतिक्रिया
इस खबर के लिखे जाने तक बैंक ऑफ बड़ौदा की तरफ से इस कथित डेटा लीक की घटना पर कोई भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। इसके साथ ही देश के केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम ने भी इस पूरी घटना की पुष्टि नहीं की है। यही वजह है कि फिलहाल इसे केवल एक दावा माना जा रहा है, जिसकी सच्चाई सामने आना अभी बाकी है।



















