बिहार के भागलपुर क्षेत्र में पारंपरिक खेती से हटकर आधुनिक और लाभकारी कृषि की ओर किसानों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। यहां बड़े पैमाने पर हरी सब्जियों का उत्पादन किया जाता है, जिनकी आपूर्ति स्थानीय बाजारों के साथ-साथ नेपाल तक की जाती है। किसान अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए ऐसी फसलों का चयन करते हैं जिनके बाजार में अच्छे दाम मिल सकें। हालांकि, बरसात के मौसम में इन फसलों पर कीटों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जो पूरी फसल को बर्बाद करने की क्षमता रखते हैं।
बरसात के मौसम में सब्जियों पर कीटों का प्रकोप
वर्षा ऋतु के दौरान खेतों में नमी अधिक होने और घास-फूस उग जाने के कारण कीटों और इल्लियों का प्रकोप तेजी से फैलता है। कृषि विशेषज्ञ और पौध संरक्षण विभाग के अधिकारी सुजीत पाल के अनुसार, चाहे बेलदार पौधे हों या अन्य हरी सब्जियां, नमी और खरपतवार की वजह से उन पर कीटों का हमला सबसे अधिक होता है। यदि किसान इस मौसम में थोड़ी अतिरिक्त सावधानी बरतें, तो वे न सिर्फ अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं बल्कि बारिश के दिनों में सब्जियों के मिलने वाले ऊंचे दामों का पूरा फायदा भी उठा सकते हैं।
फसल बचाने के लिए करें ये तीन जरूरी काम
बरसात के दिनों में फसलों को कीटों से महफूज रखने के लिए कुछ खास कदम उठाने की सलाह दी जाती है। सबसे पहले, किसान भाई यह सुनिश्चित करें कि खेत में या पौधों के आसपास बिल्कुल भी घास न उगने पाए। समय-समय पर निराई-गुड़ाई करके घास को हटाते रहना बेहद आवश्यक है, ताकि कीटों के लार्वा को पनपने का मौका न मिल सके।
दूसरा महत्वपूर्ण उपाय नीम के तेल का नियमित छिड़काव है। जानकारों का कहना है कि हर हफ्ते नीम के तेल का स्प्रे करना चाहिए। हालांकि बारिश होने पर यह धुल जाता है, इसलिए सप्ताह में कम से कम एक बार इसका छिड़काव अवश्य दोहराना चाहिए। इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर सुरक्षित कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जा सकता है और खेत में स्टिकी ट्रैप यानी चिपचिपे फंदे लगाए जा सकते हैं, जिससे पौधे कीटों के हमलों से सुरक्षित रहते हैं।
वाइट फ्लाई और अन्य कीटों से नुकसान
मौजूदा समय में फसलों पर वाइट फ्लाई यानी सफेद मक्खी का आतंक सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। इसके प्रकोप से हरी सब्जियां टेढ़ी-मेढ़ी होने लगती हैं और पौधों तथा पत्तियों में छोटे-छोटे छेद नुमा निशान बन जाते हैं। इसके अलावा रेड किट और व्हाइट किट भी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। यदि समय रहते इन तीनों उपायों को अपना लिया जाए, तो इन खतरनाक कीटों से आसानी से बचाव किया जा सकता है और फसल पूरी तरह स्वस्थ बनी रहती है।



















