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बरसात में हरी मिर्च के पौधे सूखने से बचाने के अचूक उपायव्यापार
28 जुल॰ 2026, 7:16 am (3 घंटे पहले)· 0

बरसात में हरी मिर्च के पौधे सूखने से बचाने के अचूक उपाय

मानसून के दौरान बारिश के पानी से हरी मिर्च की जड़ें सड़ने लगती हैं, जिससे फसल नष्ट हो जाती है। इसे बचाने के लिए गुड़ाई, ट्राइकोडर्मा और ड्रेचिंग जैसी तकनीकें बेहद कारगर हैं।

मानसून के दौरान किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती हरी मिर्च की फसल को बचाने की होती है। लगातार बारिश के कारण जब खेतों या गमलों में पानी ठहर जाता है, तो मिट्टी के भीतर ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिरने लगता है। इस स्थिति का फायदा उठाकर हानिकारक कवक या फंगस सक्रिय हो जाते हैं, जो पौधों की जड़ों को भीतर से कमजोर करने का काम करते हैं। कृषि वैज्ञानिक डॉ हादी हुसैन के अनुसार, नमी का यह अत्यधिक स्तर पौधों की जड़ों को सड़ा देता है, जिसे कृषि भाषा में रूट रॉट कहा जाता है। जड़ें खराब होने की वजह से पौधे अपनी जड़ों के जरिए पानी और जरूरी पोषक तत्व सोखना पूरी तरह बंद कर देते हैं, जिससे हरी-भरी फसल देखते ही देखते मुरझाने लगती है।

इस बीमारी की शुरुआत होते ही पौधे के ऊपरी हिस्से पर इसके साफ लक्षण दिखाई देने लगते हैं। हरी टहनियां और पत्तियां अपनी चमक खोकर पीली पड़ने लगती हैं और धीरे-धीरे गिरने लगती हैं। कई बार किसान इसे केवल धूप की कमी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि असलियत में जड़ें अंदर ही अंदर काली पड़कर दम तोड़ रही होती हैं। कुछ ही दिनों में पूरा पौधा तने के पास से कमजोर होकर जमीन पर ढह जाता है और देखते-देखते पूरी फसल बर्बाद हो जाती है।

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इस समस्या से निपटने के लिए सबसे पहला कदम खेतों से अतिरिक्त पानी को तुरंत बाहर निकालना है। जल निकासी के बाद मिट्टी की हल्की गुड़ाई करना बेहद जरूरी होता है। खुरपी की सहायता से पौधों के आसपास की पपड़ी बन चुकी और सख्त हो चुकी मिट्टी को बहुत सावधानी से ढीला करें। ऐसा करने से मिट्टी के भीतर फंसी हुई अतिरिक्त नमी जल्दी भाप बनकर उड़ जाती है और जड़ों तक ताजी हवा का संचार फिर से शुरू हो जाता है। जैसे ही जड़ों को ऑक्सीजन मिलती है, फंगस का प्रकोप धीमा पड़ने लगता है और पौधे दोबारा सांस लेने की स्थिति में आ जाते हैं।

यदि किसान रासायनिक दवाओं से बचना चाहते हैं, तो ट्राइकोडर्मा एक बहुत ही शानदार जैविक फंगीसाइड का विकल्प है। यह एक मित्र फंगस की तरह काम करता है जो फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले रोगाणुओं को खत्म कर देता है। इसके इस्तेमाल के लिए पांच से दस ग्राम ट्राइकोडर्मा पाउडर को एक लीटर पानी में अच्छी तरह घोल लें। इस जैविक घोल से पौधों की जड़ों के आसपास ड्रेचिंग करें। यह मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को भी मजबूत करता है और पौधों को लंबे समय तक बीमारियों के संक्रमण से बचाकर रखता है.

यदि फंगस का संक्रमण बहुत ज्यादा फैल चुका है और पौधे तेजी से सूख रहे हैं, तो रासायनिक फंगीसाइड कार्बेंडाजिम का उपयोग करना चाहिए। इसके लिए लगभग दो ग्राम कार्बेंडाजिम को एक लीटर पानी में मिलाकर घोल तैयार किया जाता है। इस घोल को सीधे प्रभावित पौधों की जड़ों में डालना होता है ताकि दवा तुरंत फंगस के संपर्क में आकर उसे जड़ से समाप्त कर सके। दवा की सही मात्रा का यह छिड़काव बीमारी को और अधिक फैलने से फौरन रोक देता है और फसल को जीवनदान मिल जाता है।

ड्रेचिंग का सीधा सा अर्थ केवल पौधों में पानी देना नहीं होता है, बल्कि दवा युक्त घोल को मुख्य तने और जड़ों के पास उचित मात्रा में पहुंचाना है। ड्रेचिंग करने से पहले यह परख लें कि खेत की मिट्टी में बहुत ज्यादा कीचड़ या दलदल न हो, ताकि घोल आसानी से जड़ों की गहराई तक उतर सके। प्रति पौधा लगभग सौ से डेढ़ सौ मिलीलीटर घोल पर्याप्त माना जाता है। जड़ों के चारों तरफ यह तरल डालने से दवा मिट्टी के एक-एक कण तक पहुंचकर सभी हानिकारक रोगाणुओं का सफाया कर देती है।

कहा जाता है कि इलाज से बेहतर हमेशा बचाव होता है, इसलिए बारिश का मौसम शुरू होने से पहले ही खेतों या गमलों में जल निकासी के पुख्ता इंतजाम कर लेने चाहिए। खेतों में छोटी-छोटी नालियां तैयार करें ताकि वर्षा का अतिरिक्त पानी बिना रुके बाहर निकल सके। गमलों में नीचे बने छिद्रों को जांच लें ताकि जलभराव की स्थिति न बने। तने के चारों तरफ थोड़ी मिट्टी चढ़ाकर एक छोटी मेढ़ जैसी बनावट तैयार करें, जिससे पानी सीधे पौधे के तने को स्पर्श न करे और जड़ सड़ने की आशंका कम से कम हो जाए।

रूट रॉट के उपचार के बाद पौधों को सामान्य स्थिति में लौटने के लिए थोड़ा वक्त चाहिए होता है। जब तक पौधा पूरी तरह सेहतमंद न हो जाए, तब तक उसमें अत्यधिक नाइट्रोजन वाले उर्वरक या जरूरत से ज्यादा पानी बिल्कुल न डालें। रोग से पूरी तरह मुक्त होने के बाद हल्की जैविक खाद या वर्मीकंपोस्ट का इस्तेमाल करके पौधों को सही पोषण दें। इसके अलावा, अपनी फसल पर लगातार नजर बनाए रखें। समय रहते उठائے गए ये छोटे-छोटे एहतियाती कदम आपकी हरी मिर्च की फसल को इस बरसात में पूरी तरह सुरक्षित रखेंगे।

सवाल-जवाब

बरसात के मौसम में मिर्च के पौधे क्यों सूख जाते हैं?
लंबे समय तक पानी भरने से मिट्टी में ऑक्सीजन खत्म हो जाती है, जिससे फंगस पनपती है और जड़ें सड़ जाती हैं।
रूट रॉट के क्या लक्षण हैं?
पौधे ऊपरी हिस्से से मुरझाने लगते हैं, पत्तियां पीली पड़कर झड़ने लगती हैं और अंत में पूरा पौधा जमीन पर गिर जाता है।
ट्राइकोडर्मा का उपयोग कैसे किया जाता है?
5 से 10 ग्राम ट्राइकोडर्मा को प्रति लीटर पानी में मिलाकर घोल तैयार करते हैं और पौधों की जड़ों के पास ड्रेचिंग करते हैं।
कार्बेंडाजिम का उपयोग कब करना चाहिए?
जब फंगस का प्रकोप बहुत अधिक बढ़ जाए और पौधे तेजी से सूख रहे हों, तब लगभग 2 ग्राम कार्बेंडाजिम प्रति लीटर पानी में मिलाकर जड़ों में डालते हैं।
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