नागौर में बेल वाली सब्जियों की खेती से जुड़े किसानों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। अब खेतों में बेलों को ऊपर उठाने और उन्हें सही दिशा देने के लिए आधुनिक सपोर्ट सिस्टम स्थापित करने पर सरकार की तरफ से आर्थिक मदद मुहैया कराई जा रही है। उद्यान विभाग की ओर से इस विशेष योजना के तहत कुल 150 हेक्टेयर क्षेत्र में इस आधुनिक सपोर्ट सिस्टम को लगवाने का लक्ष्य तय किया गया है।
इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती के तौर-तरीकों से बाहर निकालकर आधुनिक और उन्नत तकनीक की ओर आकर्षित करना है। कृषि जानकारों का मानना है कि इस तकनीक को अपनाने से सब्जियों की पैदावार के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता में भी काफी सुधार देखने को मिलेगा। विभाग के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, इस योजना का लाभ मुख्य रूप से खीरा, लौकी, तोरई, करेला और टिंडा जैसी प्रमुख बेल वाली सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को सीधे तौर पर दिया जाएगा।
राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत वित्तीय सहायता
इस पूरी योजना का संचालन मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर यानी राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत किया जा रहा है। इस योजना के तहत सपोर्ट सिस्टम की कुल इकाई लागत 20 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर तय की गई है। सरकार की तरफ से किसानों को इस निर्धारित लागत का 50 प्रतिशत हिस्सा या फिर अधिक से अधिक 10 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से अनुदान राशि प्रदान की जाएगी।
इस योजना की एक खास बात यह है कि इसमें हर किसान के लिए अधिकतम सीमा तय की गई है। इसके अनुसार, कोई भी एक किसान अधिकतम दो हेक्टेयर क्षेत्र तक ही इस योजना का लाभ उठा सकता है। इसके अलावा, जो भी पात्र किसान होंगे उन्हें उनके द्वारा तय किए गए क्षेत्रफल के अनुपात के हिसाब से ही अनुदान की राशि ट्रांसफर की जाएगी।
फसल को जमीन पर फैलने से बचाने के फायदे
खेतों में इस प्रकार के आधुनिक सपोर्ट सिस्टम को लगाने का सबसे बड़ा और प्रमुख फायदा यह होता है कि बेल वाली फसलों को ऊपर की तरफ बढ़ने के लिए एक मजबूत और सुरक्षित आधार मिल जाता है। पारंपरिक खेती में बेलें जमीन पर फैलती हैं, जिससे उनके खराब होने का खतरा रहता है, लेकिन इस तकनीक से पौधों का फैलाव काफी व्यवस्थित रहता है।
जब बेल और फल सीधे तौर पर जमीन के संपर्क में नहीं आते हैं, तो वे नमी और मिट्टी से होने वाले विभिन्न प्रकार के नुकसान से पूरी तरह सुरक्षित बच जाते हैं। इसके साथ ही, खेत में फसल की देखभाल करना, समय पर सिंचाई करना और सब्जियों की तुड़ाई करना भी बहुत आसान हो जाता है। खेत के अंदर पौधों के बीच बेहतर प्रबंधन होने की वजह से कुल उत्पादन में बढ़ोतरी होती है और बाजार में बिकने वाली सब्जियां उच्च गुणवत्ता वाली होती हैं।
किन सब्जियों के किसानों को मिलेगा फायदा
यह योजना हर तरह की फसल के लिए नहीं है, बल्कि इसका सीधा लाभ उन किसानों को मिलेगा जो चुनिंदा बेल वाली सब्जियों की खेती करते हैं। इनमें मुख्य रूप से खीरा, लौकी, तोरई, करेला और टिंडा शामिल हैं। उद्यान विभाग का ऐसा मानना है कि जब किसान अपने खेतों में इस आधुनिक सपोर्ट सिस्टम की तकनीक को अपनाएंगे, तो वे एक सीमित क्षेत्र में भी अपनी फसल का बहुत बेहतर तरीके से प्रबंधन कर सकेंगे।
विशेष तौर पर उन किसानों के लिए यह तकनीक एक वरदान साबित हो सकती है जो बड़े पैमाने पर या व्यावसायिक रूप से सब्जियों की खेती से जुड़े हुए हैं। इससे उनकी लागत कम होगी और मुनाफा अधिक कमाने का अवसर मिलेगा।
आवेदन प्रक्रिया और सत्यापन के बाद भुगतान
जो भी किसान इस योजना का लाभ उठाने के इच्छुक हैं, उन्हें सबसे पहले अपने नजदीकी उद्यान विभाग के कार्यालय में जाकर इसके लिए आवेदन करना होगा। इसके अलावा, किसान भाई अपने क्षेत्र के तैनात कृषि पर्यवेक्षक से संपर्क करके भी इस योजना से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियों के साथ-साथ आवेदन करने की पूरी प्रक्रिया को समझ सकते हैं।
विभाग की ओर से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सपोर्ट सिस्टम में किस तरह की सामग्री का इस्तेमाल किया गया है और कार्य ठीक से हुआ है या नहीं। इसके लिए विभाग के अधिकारियों द्वारा सत्यापन किया जाएगा। पूरी तरह से सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पात्र किसानों के खातों में नियमानुसार अनुदान की राशि पहुंचाई जाएगी। उद्यान विभाग के सहायक निदेशक के अनुसार, जयपुर जिले को भी बेल वाली सब्जियों के लिए इस सपोर्ट सिस्टम कार्यक्रम के तहत 150 हेक्टेयर का लक्ष्य मिला है, जहाँ किसानों को अधिकतम 10 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर का अनुदान मिलेगा।



















