अंतरराष्ट्रीय कृषि व्यापार और धान की विविधता को वैश्विक मंच पर लाने के लिए देश की राजधानी में एक बड़ा जमावड़ा होने जा रहा है। अक्टूबर के महीने में आयोजित होने वाले भारत इंटरनेशनल राइस कॉनफ्रेंस में वैश्विक स्तर पर व्यावसायिक अहमियत रखने वाले धान की करीब 200 वैरायटी को एक छत के नीचे प्रस्तुत किया जाएगा। इस अनूठे अंतरराष्ट्रीय संकलन का मुख्य मकसद विदेशी आयातकों और भारतीय कारोबारियों के बीच सीधा संपर्क बनाना है, जिससे वे विभिन्न देशों की उपज के गुणों का आकलन कर सकें और नए व्यापारिक समझौते तय कर सकें।
भारत मंडपम में तीन दिनों तक चलेगा वैश्विक जमावड़ा
आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों के अनुसार, यह भव्य प्रदर्शनी 23 अक्टूबर से शुरू होकर 25 अक्टूबर तक प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम परिसर में चलेगी। यहां आने वाले प्रतिनिधियों को सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई अन्य प्रमुख उत्पादक देशों की खास फसलें देखने को मिलेंगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय इटली का आर्बोरियो चावल, थाईलैंड का मशहूर जैस्मीन व ग्लूटीनस आरडी6 और जापान का सुशी चावल इस शोकेस का मुख्य आकर्षण बनेंगे। इसके साथ ही भारत की प्रीमियम बासमती और विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में उगाई जाने वाली अनूठी किस्में भी प्रदर्शित की जाएंगी।
घरेलू बासमती और गैर-बासमती फसलों की विस्तृत श्रृंखला
इस प्रदर्शनी का प्रारूप केवल जिंस कारोबार तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसमें कृषि जलवायु, जैव विविधता, क्षेत्रीय खान-पान की परंपराओं और विशिष्ट कृषि पद्धतियों के संगम को रेखांकित करने का प्रयास किया गया है। भारत के व्यापारिक स्टॉक में से पूसा बासमती, सुगंधा और शरबती जैसी लोकप्रिय बासमती किस्में विदेशी खरीदारों के सामने रखी जाएंगी। इसके अलावा बड़े पैमाने पर निर्यात और खपत होने वाली गैर-बासमती किस्में जैसे पीआर-11, पीआर-14, परमल और दक्षिण भारत में व्यापक रूप से पसंद की जाने वाली सोना मसूरी भी इस कैटलॉग का हिस्सा होंगी।
राज्यों की समृद्ध देसी और पारंपरिक धरोहर
भारत के विभिन्न राज्यों में पीढ़ियों से संरक्षित की जा रही सुगंधित, औषधीय और रंगीन धान की किस्मों को इस आयोजन में प्रमुखता दी गई है। केरल के औषधीय गुणों वाले नवारा और रक्तशाली चावल, तमिलनाडु के पारंपरिक सीरागा सांबा, मपिल्लई सांबा व करुप्पु कावुनी इस सूची में शामिल हैं। इसके अतिरिक्त छत्तीसगढ़ का सुगंधित दुबराज, पश्चिम बंगाल का तुलाईपंजी, मणिपुर का प्रसिद्ध चाक-हाओ काला चावल, असम का जोहा, उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र का काला नमक, मध्य प्रदेश का चिन्नौर, महाराष्ट्र का आंबेमोहर और कश्मीर घाटी की ठंडी जलवायु में उपजने वाला मुश्कबुदजी भी विदेशी डेलिगेट्स के आकर्षण का केंद्र बनेंगे।
वैश्विक खरीदारों के लिए नए उत्पादों का प्रवेश द्वार
भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (IREF) के प्रतिनिधि देव गर्ग के मुताबिक, विदेशी व्यापार जगत के लिए यह सम्मेलन आपूर्ति श्रृंखला को सुगम और पारदर्शी बनाने में मददगार साबित होगा। उन्होंने आयोजन के व्यावसायिक महत्व को स्पष्ट करते हुए रेखांकित किया कि यह संग्रह खरीदारों को एक ही स्थान पर तुलना करने और नए उत्पादों की खोज का माध्यम उपलब्ध कराएगा। देव गर्ग ने कहा, "हमारा मानना है कि ये चावल संग्रह नए उत्पादों की खोज का एक महत्वपूर्ण जरिया बन सकता है।" इस पहल से देश के किसानों और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी खास किस्मों के बेहतर दाम मिलने की उम्मीद जगी है।



















