भारत के निर्यात की नई पहचान बना सर्विस सेक्‍टर, कुल निर्यात का लगभग आधा हिस्‍सा अब सेवाओं से, 12 साल में तीन गुना उछालव्यापार
3 घंटे पहले· 2

भारत के निर्यात की नई पहचान बना सर्विस सेक्‍टर, कुल निर्यात का लगभग आधा हिस्‍सा अब सेवाओं से, 12 साल में तीन गुना उछाल

वित्‍तवर्ष 2014-15 में भारत के कुल निर्यात में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी 33.8 फीसदी थी, जो 2025-26 में बढ़कर 48.8 फीसदी पहुंच गई है। आईटी और सॉफ्टवेयर सेवाओं की अगुवाई में सेवा निर्यात 158.1 अरब डॉलर से बढ़कर 421.3 अरब डॉलर हो गया है।

भारत की निर्यात कहानी अब सिर्फ कारखानों और वस्‍तुओं तक सीमित नहीं रह गई है। पिछले एक दशक में देश की असली ताकत सेवाओं के मोर्चे पर उभरकर सामने आई है, और आज स्थिति यह है कि कुल निर्यात का लगभग आधा हिस्‍सा अकेले सेवा क्षेत्र से आ रहा है। वाणिज्‍य मंत्रालय की ओर से हाल में जारी आंकड़े इस बदलाव की पूरी तस्‍वीर पेश करते हैं।

मंत्रालय के मुताबिक, देश के कुल निर्यात में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी वित्‍तवर्ष 2014-15 के 33.8 फीसदी से बढ़कर 2025-26 में 48.8 फीसदी हो गई है। इस तेज छलांग के पीछे तीन बड़ी वजहें रहीं, आईटी क्षेत्र का तेज विस्तार, देश में वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) की बढ़ती संख्‍या और वैश्विक महामारी के बाद सेवाओं की डिजिटल आपूर्ति के तरीके में आया बुनियादी बदलाव।

मूल्‍य के लिहाज से तीन गुना बढ़ा सेवा निर्यात

आंकड़ों की भाषा में देखें तो यह बढ़ोतरी और साफ नजर आती है। देश का सेवा निर्यात 2014-15 में जहां 158.1 अरब डॉलर था, वह 2025-26 में बढ़कर 421.3 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया। यानी सिर्फ हिस्सेदारी ही नहीं बढ़ी, बल्कि मूल्‍य के हिसाब से सेवा निर्यात करीब तीन गुना हो गया है।

इसी अवधि में देश का कुल निर्यात, यानी वस्‍तु और सेवाएं मिलाकर, 2014-15 के 468 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 863 अरब डॉलर हो गया। इस तरह कुल निर्यात में करीब दोगुना का इजाफा दर्ज हुआ है।

मैन्‍युफैक्‍चरिंग से कहीं आगे निकली सेवाएं

दिलचस्‍प बात यह है कि बीते 12 वर्षों में सेवा निर्यात ने लगभग हर साल मजबूती दिखाई। इस पूरे दौर में केवल 2020-21 ऐसा साल रहा, जब कोविड-19 वैश्विक महामारी की वजह से इस पर असर पड़ा। बाकी सालों में रफ्तार बनी रही।

अगर सेवा और उत्‍पादन क्षेत्र की तुलना करें तो फर्क बेहद साफ है। पिछले 12 साल में मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर मुश्किल से करीब 50 फीसदी की ग्रोथ हासिल कर पाया, जबकि इसी दौरान सेवा क्षेत्र ने करीब 200 फीसदी की छलांग लगाई। यही वजह है कि अब निर्यात की अगुवाई सेवाओं के हाथ में आती दिख रही है।

सॉफ्टवेयर सेवाएं सबसे आगे

सेवा निर्यात के भीतर भी एक खास तस्‍वीर उभरती है। कुल सेवा निर्यात में 40 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी के साथ सॉफ्टवेयर सेवाएं सबसे आगे हैं और पूरे क्षेत्र की कमान संभाल रही हैं। इसके बाद पेशेवर एवं प्रबंधन परामर्श (प्रोफेशनल और मैनेजमेंट कंसल्टिंग) दूसरे सबसे बड़े योगदानकर्ता के रूप में उभरकर सामने आया है।

हर साल कितनी रही रफ्तार

मंत्रालय के अनुसार, बीते 12 वर्षों में सेवा निर्यात ने सालाना 9.3 फीसदी की औसत ग्रोथ दर्ज की है। दूसरी ओर वस्‍तु निर्यात भी इस दौरान बढ़ा है, जो 2014-15 के 310 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 442 अरब डॉलर हो गया। हालांकि वस्‍तु और सेवा, दोनों के आंकड़ों की तुलना करने पर सेवा क्षेत्र की रफ्तार कहीं ज्‍यादा तेज नजर आती है।

नीतिगत सुधारों ने दी रफ्तार

इस तेज वृद्धि के पीछे सरकार की ओर से किए गए कई सुधारों का बड़ा हाथ माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने पिछले 12 वर्षों में सेवा क्षेत्र को आसान और सहज बनाने के लिए लगातार कदम उठाए। मंत्रालय ने बताया कि इनमें 47 प्रक्रियाओं का सरलीकरण, स्वचालित एफटीपी (विदेश व्यापार नीति) प्रक्रियाएं, आयातक-निर्यातक कोड (आईईसी) का स्वत: सत्यापित रूप से जारी होना और निर्यात प्रोत्साहन मिशन की शुरुआत जैसे अहम कदम शामिल हैं। इन्‍हीं उपायों ने सेवा क्षेत्र को दुनिया में नई पहचान दिलाने में मदद की है।

सवाल-जवाब

भारत के कुल निर्यात में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी अब कितनी है?
यह हिस्सेदारी 2014-15 के 33.8 फीसदी से बढ़कर 2025-26 में 48.8 फीसदी हो गई है, यानी कुल निर्यात का लगभग आधा।
12 साल में सेवा निर्यात कितना बढ़ा है?
सेवा निर्यात 2014-15 के 158.1 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 421.3 अरब डॉलर हो गया है, जो करीब तीन गुना उछाल है।
सेवा निर्यात में सबसे बड़ा योगदान किसका है?
40 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी के साथ सॉफ्टवेयर सेवाएं सबसे आगे हैं, और पेशेवर एवं प्रबंधन परामर्श दूसरे स्थान पर है।
सेवा और मैन्‍युफैक्‍चरिंग की ग्रोथ में कितना फर्क रहा?
बीते 12 साल में मैन्‍युफैक्‍चरिंग करीब 50 फीसदी बढ़ा, जबकि सेवा क्षेत्र ने करीब 200 फीसदी की ग्रोथ हासिल की।
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