अंतर्राष्ट्रीय खेल मंच पर भारत का परचम लहराते हुए राजस्थान के पाली जिले के होनहार भारोत्तोलक जुनैद जिलानी ने शानदार उपलब्धि हासिल की है। नेपाल में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में उन्होंने अपने उत्कृष्ट खेल और शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। 110 प्लस किलोग्राम भार वर्ग की कठिन प्रतिस्पर्धा में उतरकर उन्होंने कुल 215 किलोग्राम भार उठाया और अपने प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ते हुए पहला स्थान प्राप्त किया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही उन्होंने अपने गृहनगर पाली, राज्य राजस्थान और पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
नेपाल के पोखरा शहर में आयोजित हुई अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धा
यह अंतर्राष्ट्रीय भारोत्तोलन प्रतियोगिता 26 जुलाई को नेपाल के खूबसूरत शहर पोखरा में आयोजित की गई थी। प्रतियोगिता में कई देशों के शीर्ष खिलाड़ियों ने भाग लिया था। 110 प्लस किलोग्राम भार वर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हुए जुनैद जिलानी ने खेल के दौरान बेमिसाल शक्ति, अनुशासन, संयम और सटीक तकनीक का परिचय दिया। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के बीच बने दबाव के बावजूद उन्होंने अपनी एकाग्रता बनाए रखी और हर प्रयास को कुशलतापूर्वक पूरा किया। उनकी इस स्वर्णिम सफलता से प्रतियोगिता स्थल पर भारत का राष्ट्रध्वज तिरंगा शान से फहराया गया।
215 किलोग्राम कुल वजन उठाकर दर्ज की शानदार जीत
प्रतियोगिता के दौरान जुनैद जिलानी का प्रदर्शन बेहद संतुलित और प्रभावी रहा। उन्होंने स्पर्धा के दोनों चरणों में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए निर्णायक बढ़त हासिल की। उनके द्वारा उठाए गए वजन का ब्योरा इस प्रकार है
- क्लीन एंड जर्क: 120 किलोग्राम
- कुल भार: 215 किलोग्राम
क्लीन एंड जर्क श्रेणी में 120 किलोग्राम का सफल प्रयास करने के बाद उन्होंने अपनी बढ़त को मजबूत किया और अंततः 215 किलोग्राम के कुल आंकड़े तक पहुंचकर शीर्ष स्थान सुनिश्चित किया। उनके इस बेहतरीन प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि निरंतर अभ्यास और सही रणनीति से किसी भी बड़े मंच पर सफलता हासिल की जा सकती है।
गृहनगर पाली पहुंचने पर हुआ ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत
अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर जब जुनैद जिलानी अपने गृहनगर पाली लौटे, तो पूरा शहर जश्न के माहौल में डूब गया। उनके स्वागत के लिए रेलवे स्टेशन और स्थानीय क्षेत्रों में भारी संख्या में खेलप्रेमी, रिश्तेदार और आम नागरिक एकत्र हुए। लोगों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते-गाते हुए अपनी खुशी व्यक्त की। जुनैद को फूल-मालाएं पहनाई गईं और पारंपरिक राजस्थानी साफा बांधकर उनका विशेष नागरिक अभिनंदन किया गया।
इस भव्य स्वागत समारोह में साहिल पठान, समीर अली, आफताब, दातार, शबाज और आतिफ सहित क्षेत्र के कई प्रमुख लोग और बड़ी तादाद में युवा मौजूद रहे। सभी उपस्थितजनों ने जुनैद को साफा पहनाकर बधाई दी और भविष्य में होने वाली अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी इसी तरह का उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की शुभकामनाएं दीं।
सफलता का श्रेय माता-पिता और कोच के मार्गदर्शन को दिया
अपनी इस ऐतिहासिक स्वर्णिम जीत पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जुनैद जिलानी ने इसे अपने जीवन का एक यादगार क्षण बताया। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय मंच पर देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना उनका सपना था जो आज साकार हुआ है। अपनी सफलता के पीछे के कारणों पर बात करते हुए उन्होंने इसका पूरा श्रेय अपने परिवार और प्रशिक्षक को दिया।
जुनैद जिलानी ने कहा, "मेरे माता-पिता का अटूट सहयोग और कोच का सही मार्गदर्शन ही इस सफलता की नींव है।" उन्होंने आगे बताया कि माता-पिता के निरंतर प्रोत्साहन और कोच द्वारा कराई गई कठिन रणनीतिक तैयारी के बिना इस मुकाम तक पहुंचना संभव नहीं था। उनकी देखरेख में की गई कड़ी मेहनत ने ही उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर के दबाव को झेलने और देश का प्रतिनिधित्व करने योग्य बनाया।
खेल जगत में राजस्थान के युवाओं का बढ़ता वर्चस्व
जुनैद जिलानी की यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि राजस्थान के युवा खेल की दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। छोटे शहरों से निकलकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सफलता के झंडे गाड़ना राज्य के अन्य उभरते खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहा है। पाली जिले में इस जीत के बाद से ही खेल प्रेमियों के बीच अपार उत्साह देखा जा रहा है।



















