ईंधन की कीमतों और देश भर के पेट्रोल पंपों पर बिकने वाले ईंधन के विकल्पों को लेकर अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। आम नागरिकों के बजट और गाड़ियों की तकनीकी जरूरतों का हवाला देते हुए उन्होंने सरकार से पेट्रोल वितरण व्यवस्था में सुधार करने तथा ईंधन की दरों में कटौती करने का आग्रह किया है।
पेट्रोल पंपों पर E20 और शुद्ध पेट्रोल का स्पष्ट विकल्प
अरविंद केजरीवाल की पहली प्रमुख मांग देश के प्रत्येक पेट्रोल पंप पर उपभोक्ताओं को दो अलग-अलग ईंधन विकल्प उपलब्ध कराने से संबंधित है। केंद्र सरकार की इथेनॉल सम्मिश्रण योजना के तहत तेल कंपनियां बड़े पैमाने पर E20 पेट्रोल की बिक्री कर रही हैं, जिसमें बीस प्रतिशत इथेनॉल और अस्सी प्रतिशत सामान्य पेट्रोल होता है। हालांकि, कई वाहन चालकों और विशेषज्ञों ने पुरानी गाड़ियों के इंजनों की सुरक्षा, माइलेज तथा पुर्जों के टिकाऊपन को लेकर चिंताएं उठाई हैं। इन्हीं चिंताओं को ध्यान में रखते हुए मांग की गई है कि पेट्रोल पंपों पर E20 और शुद्ध पेट्रोल दोनों की अलग बिक्री व्यवस्था हो ताकि वाहन चालक अपनी गाड़ी की जरूरत के अनुसार सही ईंधन का चुनाव कर सकें।
शुद्ध पेट्रोल की तुलना में सस्ता हो E20 ईंधन
दूसरी मांग मिश्रित ईंधन की कीमत से जुड़ी है। भारत में इथेनॉल का उत्पादन गन्ने के शीरे, मक्का और खाद्यान्न से घरेलू स्तर पर किया जाता है, जो विदेशों से आयात होने वाले कच्चे तेल की तुलना में काफी सस्ता पड़ता है। जब मिश्रित ईंधन तैयार करने की लागत कम आती है, तो इसका आर्थिक लाभ सीधे आम जनता को मिलना चाहिए। अरविंद केजरीवाल ने बल देकर कहा कि E20 पेट्रोल का दाम शुद्ध पेट्रोल से कम तय किया जाना चाहिए। इससे पर्यावरण अनुकूल विकल्प चुनने वाले वाहन चालकों को आर्थिक प्रोत्साहन मिलेगा और ईंधन की पारदर्शी दरें लागू होंगी।
पेट्रोल की कीमत 84 रुपये प्रति लीटर से नीचे लाने का आग्रह
तीसरी मांग में देश भर में पेट्रोल के खुदरा दामों में सीधी कटौती करने का आह्वान किया गया है। सरकार से मांग की गई है कि पेट्रोल की कीमत को 84 रुपये प्रति लीटर से नीचे लाया जाए। ईंधन के ऊंचे दामों के कारण दैनिक यात्रियों, छोटे कारोबारियों, ट्रांसपोर्टरों और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ रहे वित्तीय बोझ को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि दामों में यह कमी महंगाई से राहत दिलाने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध होगी।
जनता की प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया पर चर्चा
इन मांगों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर लोगों की तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई नागरिकों ने पेट्रोल पंपों पर दो विकल्प देने की मांग की सराहना की और कहा कि उपभोक्ता को अपनी पसंद का ईंधन चुनने का अधिकार होना चाहिए। वहीं, कुछ उपयोगकर्ताओं ने राजनीतिक आधार पर ईंधन की दरें निर्धारित करने की व्यावहारिकता पर प्रश्न उठाए और विभिन्न राज्यों के बीच लगने वाले करों के अंतर की ओर ध्यान आकर्षित किया।


























