वैश्विक वित्तीय बाजारों में बीते कारोबारी हफ्ते के दौरान अलग-अलग एसेट क्लास में काफी विरोधाभासी संकेत देखने को मिले हैं। प्रमुख विदेशी मुद्राओं में भारी बिकवाली और अमेरिकी डॉलर में रक्षात्मक मजबूती के बीच कमोडिटी और वोलेटिलिटी इंडिकेटर्स में भी बड़ा फेरबदल दर्ज किया गया है। विदेशी मुद्रा बाजार में यूरो और जापानी येन में बियरिश पोजीशनिंग ऐतिहासिक निचले स्तरों पर पहुंच गई है, जिससे इन करेंसी पेयर्स में मंदी के संकेत और गहरे हुए हैं। दूसरी ओर, वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) कच्चे तेल में पिछले कई महीनों का सबसे बड़ा नेट पोजीशनिंग सुधार देखा गया, हालांकि यह बढ़त नई खरीदारी के बजाय मुख्य रूप से शॉर्ट कवरिंग की वजह से दर्ज हुई। वोलेटिलिटी के मोर्चे पर CBOE वोलेटिलिटी इंडेक्स (VIX) में ओपन इंटरेस्ट घटने और वोलेटिलिटी बढ़ने के कारण निवेशकों द्वारा रिस्क कम करने (डी-रिस्किंग) का रुझान साफ नजर आया। इसके साथ ही, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई की चिंताओं के कारण सोने की कीमतों में गिरावट जारी रही, जबकि प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी तकनीकी स्तरों के पास कंसोलिडेशन के दौर से गुजर रही हैं।
जापानी येन और यूरो पर बियरिश दबाव हुआ और गहरा
विदेशी मुद्रा बाजार में बियरिश रुझान काफी तेज हुआ है, जहां जापानी येन (JPY) में लगातार दूसरे हफ्ते भारी बिकवाली का सामना करना पड़ा। येन में नेट नॉन-कमर्शियल पोजीशनिंग 11,287 कॉन्ट्रैक्ट्स घटकर 163,412 कॉन्ट्रैक्ट्स के नेट शॉर्ट स्तर पर आ गई है। यह आंकड़ा जापानी येन के ऐतिहासिक पोजीशनिंग के निचले 2nd परसेंटाइल के पास है, जो बाजार में येन को लेकर गहरी निराशा को दर्शाता है। येन में आई इस कमजोरी के कारण USD/JPY करेंसी पेयर में अच्छी मजबूती देखने को मिली।
USD/JPY के ताजा लाइव मार्केट आंकड़ों के मुताबिक, यह पेयर 157.40 के स्तर पर बंद हुआ है, जो पिछले क्लोजिंग स्तर 160.18 से 1.74% नीचे है। तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो 14-पीरियड रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 24 के स्तर पर है, जो ओवरसोल्ड स्थिति की ओर इशारा करता है। मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) -0.08 पर बियरिश जोन में बना हुआ है, जबकि सिग्नल लाइन 0.44 पर है। मूविंग एवरेज में 20-डे एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 162.02, 50-डे EMA 161.35 और 200-डे EMA 157.33 पर दर्ज किया गया है, जो दीर्घकालिक गोल्डन क्रॉस संरचना को बनाए हुए है। एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स (ADX) 28 पर मजबूत ट्रेंड का संकेत देता है, जबकि 1.39 का ATR दैनिक वोलेटिलिटी को दर्शाता है, जिसमें मुख्य सपोर्ट 157.40 और रेजिस्टेंस 163.98 के पास बना हुआ है।
इसी तरह, यूरो (EUR) में भी बियरिश दबाव लगातार बना हुआ है और पोजीशनिंग में आई गिरावट कीमतों में भी साफ दिखाई दे रही है। हालांकि हफ्ते के अंत में EUR/USD निचले स्तरों से सुधरकर 1.1500 का स्तर पार करने में कामयाब रहा, लेकिन बाजार में कायम रिस्क-ऑफ माहौल और अमेरिकी डॉलर में खरीदारी के चलते यूरो पर दबाव बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब पोजीशनिंग और कीमतें दोनों एक साथ निचले स्तरों पर हों, तो गिरावट की निरंतरता आंकड़ों के आकार से ज्यादा मायने रखती है।
अमेरिकी डॉलर में मजबूती और ब्रिटिश पाउंड का प्रदर्शन
अमेरिकी डॉलर (USD) की पोजीशनिंग में लगातार दूसरे हफ्ते सुधार दर्ज किया गया। यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) ने पूरे हफ्ते के दौरान बढ़िया बढ़त हासिल की, जिससे अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की रक्षात्मक स्थिति और मजबूत हुई है। अनिश्चित वैश्विक व्यापक आर्थिक परिस्थितियों और ब्याज दरों के दृष्टिकोण को देखते हुए निवेशक डॉलर में अपनी पोजीशन मजबूत रख रहे हैं।
दूसरी तरफ, ग्रीनबैक की व्यापक मजबूती के बावजूद ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) ने हफ्ते के अंतिम चरण में अच्छी वापसी दिखाई। केबल के नाम से मशहूर इस पेयर ने सुधरते हुए 1.3470 के आसपास दिन के उच्च स्तरों को चुनौती दी। अमेरिकी डॉलर में हल्की बढ़त के बावजूद पाउंड में यह तेजी वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच दर्ज की गई, जिससे एनर्जी से जुड़ी करेंसी फ्लो को समर्थन मिला।
कच्चे तेल में पोजीशनिंग का गणित: शॉर्ट कवरिंग बनाम वास्तविक मांग
वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) कच्चे तेल में समीक्षाधीन हफ्ते के दौरान सभी एसेट्स के मुकाबले सबसे बड़ा नेट पोजीशनिंग सुधार देखा गया। क्रूड फ्यूचर्स में नेट एक्सपोजर 38,419 कॉन्ट्रैक्ट्स बढ़ा, जो मार्च के बाद का सबसे बड़ा साप्ताहिक सुधार है। लगातार आठ हफ्तों की बिकवाली के बाद यह लगातार दूसरा हफ्ता रहा जब पोजीशनिंग में तेजी आई। नॉन-कमर्शियल नेट लॉन्ग्स बढ़कर 120,108 कॉन्ट्रैक्ट्स पर पहुंच गए, हालांकि यह अब भी ऐतिहासिक 11th परसेंटाइल के पास काफी हल्का बना हुआ है।
हालांकि, अगर पोजीशनिंग के आंकड़ों को ध्यान से देखें तो यह हेडलाइन तेजी उतनी बुलिश नहीं है जितनी दिखाई देती है। पोजीशनिंग में आया यह सुधार मुख्य रूप से शॉर्ट पोजीशन बंद होने के कारण हुआ, जिसमें 33,609 कॉन्ट्रैक्ट्स की कमी आई। इसके मुकाबले नए लॉन्ग कॉन्ट्रैक्ट्स में केवल 4,810 की मामूली बढ़ोतरी हुई, जबकि कुल ओपन इंटरेस्ट में गिरावट दर्ज की गई। इसी अवधि के दौरान spot WTI की कीमतों में 6% से अधिक की भारी गिरावट आई। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह तेजी केवल शॉर्ट कवरिंग से प्रेरित है और इसे कीमतों का समर्थन नहीं मिला है। कच्चे तेल में टिकाऊ बुलिश रुझान के लिए कीमतों का स्थिर होना और नए खरीदारों का बाजार में लौटना बेहद जरूरी है।
वोलेटिलिटी में डी-रिस्किंग, सोने में बिकवाली और कमोडिटी
CBOE वोलेटिलिटी इंडेक्स (VIX) के आंकड़ों ने निवेशकों के रिस्क सेंटीमेंट का महत्वपूर्ण खाका पेश किया। VIX में नेट पोजीशनिंग 13,448 कॉन्ट्रैक्ट्स सुधरी क्योंकि शॉर्ट पोजीशन्स 18,127 घटकर कम हुईं और वोलेटिलिटी 11.49% बढ़ गई। हालांकि, VIX के कुल ओपन इंटरेस्ट में 53,391 कॉन्ट्रैक्ट्स की बड़ी गिरावट आई। वोलेटिलिटी बढ़ने के साथ-साथ ओपन इंटरेस्ट का घटना यह दर्शाता है कि संस्थागत निवेशक नई हेजिंग करने के बजाय बाजार से अपना जोखिम घटा रहे हैं (डी-रिस्किंग)।
बुलियन मार्केट में, स्पॉट गोल्ड (XAU/USD) में लगातार तीसरे हफ्ते बिकवाली का दबाव देखा गया। सोने की हाजिर कीमतें लगभग 1.20% गिरकर $4,000 प्रति ट्रॉय औंस के महत्वपूर्ण स्तर के करीब पहुंच गईं। डॉलर में आई तेजी ने सोने पर दबाव बनाया। इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने महंगाई की आशंकाओं को बनाए रखा है, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें ऊंची रखे जाने की उम्मीदें मजबूत हुई हैं। कृषि कमोडिटीज में, कॉफी फ्यूचर्स (KC1) की कीमतों में 2% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई, जबकि इसकी संस्थागत पोजीशनिंग में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में प्रमुख मूविंग एवरेज के पास कंसोलिडेशन
डिजिटल एसेट मार्केट में पिछले हफ्ते की रिकवरी के बाद इस हफ्ते ठहराव देखने को मिला। बिटकॉइन (BTC), इथेरियम (ETH) और रिपल (XRP) जैसी प्रमुख क्रिप्टोकरेंसीज महत्वपूर्ण तकनीकी चार्ट स्तरों के आसपास कारोबार करती नजर आईं।
बिटकॉइन (BTC) अपने 50-डे एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) के करीब ट्रेड कर रहा है, जिसे ट्रेडर मध्यम अवधि के रुझान के लिए एक अहम संकेतक मानते हैं। इथेरियम (ETH) दो प्रमुख एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज के बीच सीमित दायरे में कंसोलिडेट कर रहा है। इसी तरह, रिपल (XRP) भी अपने स्थापित सपोर्ट स्तरों के पास बना हुआ है। क्रिप्टो निवेशक वैश्विक तरलता, अमेरिकी डॉलर के रुख और मैक्रो इकोनॉमिक संकेतों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।



















