राजस्थान के भरतपुर जिले में इस समय भिंडी की खेती करने वाले किसानों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। मौसम में लगातार आ रहे बदलाव और इसके अनुकूल बने हालात की वजह से खेतों में फली छेदक यानी फ्रूट बोरर कीट का प्रकोप बहुत तेजी से फैल रहा है। यह खतरनाक कीट सीधे तौर पर फसल की पैदावार और उसकी गुणवत्ता पर बुरा असर डाल रहा है। यदि समय रहते इस पर काबू नहीं पाया गया, तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
फली छेदक कीट के लक्षण और फसल को नुकसान
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, इस कीट की मादा कीट पौधों की पत्तियों और मुलायम फलियों पर अंडे देती हैं। अंडों से बाहर निकलने वाली सुंडियां या इल्लियां भिंडी की कोमल फलियों में छेद करके अंदर प्रवेश कर जाती हैं। इसके बाद वे अंदर के हिस्सों को खाकर फली को पूरी तरह से नष्ट कर देती हैं। खेत में खड़ी भिंडी की फलियों पर छोटे-छोटे छेद दिखना, फलियों का आकार टेढ़ा-मेढ़ा होना और अंदर से सड़न पैदा होना इस कीट के मुख्य लक्षण हैं। कई बार प्रभावित फलियां ऊपर से बिल्कुल सामान्य दिखाई देती हैं, लेकिन काटने पर अंदर से पूरी तरह खराब निकलती हैं, जिससे बाजार में किसानों को उनकी उपज के अच्छे दाम नहीं मिल पाते हैं।
संक्रमित फलियों को नष्ट करने के उपाय
इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए कृषि विभाग ने किसानों को अपने खेतों की लगातार देखरेख करने और पौधों की बारीकी से जांच करने के निर्देश दिए हैं। विभाग की तरफ से यह साफ कहा गया है कि यदि खेत में कोई भी कीट से प्रभावित या छिद्रित फली दिखाई दे, तो उसे तुरंत तोड़कर अलग कर लें। इन खराब फलियों को खेत से दूर ले जाकर किसी गहरे गड्ढे में दबाकर पूरी तरह नष्ट कर देना चाहिए। शुरुआती दौर में ही संक्रमित फलियों को हटा देने से कीट की संख्या बढ़ने से रुक जाती है और उसका संक्रमण पूरे खेत में नहीं फैलता है।
कीटनाशकों के इस्तेमाल में बरतें सावधानी
कीटों पर नियंत्रण पाने के लिए कृषि विभाग द्वारा सुझाई गई दवाओं और कीटनाशकों का ही तय मात्रा में छिड़काव करना बेहद जरूरी है। कीटनाशक का इस्तेमाल करते समय दवा की सही खुराक, पानी की सही मात्रा और दो छिड़कावों के बीच के समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए। किसी भी कृषि विशेषज्ञ या सलाहकार की सलाह के बिना रासायनिक दवाओं का अत्यधिक या अंधाधुंध इस्तेमाल करने से न केवल फसल को बल्कि मिट्टी और पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंच सकता है। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे कीट के शुरुआती लक्षण दिखते ही वैज्ञानिक तरीकों से उसका प्रबंधन करें।



















