बिहार के इस किसान का दांव: अफ्रीकन नस्ल का खस्सी, जिसका मीट ₹4000 किलो तक बिकता है और एक से ही लाखों की कमाईव्यापार
3 घंटे पहले· 1

बिहार के इस किसान का दांव: अफ्रीकन नस्ल का खस्सी, जिसका मीट ₹4000 किलो तक बिकता है और एक से ही लाखों की कमाई

छपरा के मांझी प्रखंड के किसान मोहम्मद आसिब अफ्रीकन नस्ल का खस्सी पाल रहे हैं, जिसका वजन एक क्विंटल से ऊपर पहुंचता है और मीट 4-5 स्टार होटलों में ₹4000 से ₹5000 किलो तक बिकता है।

छपरा में खेती के साथ पशुपालन से बदल रही किसानों की किस्मत

बिहार के छपरा जिले में किसान अब सिर्फ खेती-बाड़ी तक सीमित नहीं रहे। यहां बकरी पालन, मुर्गी पालन, गाय पालन और मधुमक्खी पालन जैसे काम तगड़ी कमाई का जरिया बन गए हैं। खास बात यह है कि किसान अब दूसरे राज्यों और दूसरे देशों की नस्लों को भी अपने यहां पाल रहे हैं और उससे अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। ऐसे ही एक किसान हैं, जिन्होंने विदेशी नस्ल का खस्सी (बकरा) पाल रखा है — इसका सिर्फ एक किलो मीट बेचकर एक लोकल नस्ल का पूरा खस्सी खरीदा जा सकता है।

कौन हैं ये किसान और कौन-सी है ये नस्ल

मांझी प्रखंड के माली पट्टी निवासी किसान मोहम्मद आसिब अफ्रीकन नस्ल के इस खस्सी का पालन कर रहे हैं। वे कई वर्षों से इसी नस्ल का खस्सी पालकर कमाई कर रहे हैं। आसिब ने TrendKia को बताया कि वे दो तरह के खस्सी पालते हैं — एक अफ्रीकन बोरगोट और दूसरा तोता पड़ी नस्ल, जो आसानी से मिल जाता है। फिलहाल उन्होंने शौक के तौर पर 3-4 खस्सी पाल रखे हैं। इन्हें वे छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से पालने के लिए लेकर आए थे।

₹4000 किलो क्यों बिकता है इसका मीट

अफ्रीकन वैरायटी के इस बकरे का मीट ज्यादातर 4 स्टार और 5 स्टार होटलों में मिलता है। वहां यह आसानी से चार से ₹5000 किलो तक बिक जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजह है इसमें मौजूद ज्यादा प्रोटीन — यही कारण है कि एक किलो मीट के लिए लोगों को इतनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है। आसिब के मुताबिक ₹4000 से भी अधिक कीमत पर इसका एक किलो मीट मिलता है और इसे फोर स्टार या फाइव स्टार होटलों में ही पकाया जाता है। इस खस्सी का वजन भी एक क्विंटल से अधिक होता है, इसलिए कमाई के लिहाज से यह किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।

100 किलो से कम नहीं होता वजन

इस अफ्रीकन नस्ल के खस्सी का वजन यहां एक क्विंटल 62 किलो तक पहुंच चुका है। आसिब इससे पहले भी इसी नस्ल को पालकर बेच चुके हैं। खाने के लिए इन्हें हरा चारा, भूसा और दाना दिया जाता है — इतने में ही खस्सी आसानी से बढ़ता है और इसका वजन एक क्विंटल से ज्यादा हो जाता है। यानी एक अफ्रीकन खस्सी पालकर ही किसान एक लाख रुपये से अधिक की कमाई कर सकते हैं।

शौक से शुरुआत, अब बिजनेस की तैयारी

आसिब बताते हैं कि उनके पास इस समय जो अफ्रीकन बोरगोट खस्सी है, वह 10 महीने का है और उसका वजन 60 किलो से अधिक है। इस नस्ल का वजन डेढ़ क्विंटल से भी ऊपर तक चला जाता है। शौक से पालने की वजह से उन्हें विदेशी नस्ल के खस्सी पालने का अच्छा अनुभव हो गया है, और अब वे इसे कारोबार के मकसद से पालना चाहते हैं, क्योंकि इसका मीट बहुत ऊंची कीमत पर बिकता है।

लोकल नस्ल जैसा ही खर्च, मुनाफा दोगुना

आसिब के अनुसार इसे भी लोकल खस्सी की तरह ही हरा चारा, भूसा और दाना दिया जाता है। न तो इसमें कोई अलग से मेहनत लगती है और न ही ज्यादा खर्च आता है। चूंकि इसका वजन लोकल नस्ल से दोगुना तक होता है, इसलिए अगर इसका मीट सस्ती कीमत पर भी बेचा जाए तो लोकल नस्ल के मुकाबले कहीं ज्यादा कमाई हो सकती है। यही वजह है कि अगर किसान इस नस्ल के खस्सी का पालन करें, तो कम खर्चे में काफी अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।

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