गोपालगंज जिले में स्थित और लंबे समय से बंद पड़ी सासामुसा चीनी मिल का विवाद बुधवार को बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान एक बार फिर से गरमा गया। जेडीयू के विधायक मंजीत सिंह ने सदन में इस ज्वलंत मुद्दे को पूरी ताकत के साथ उठाया। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह इस ऐतिहासिक कारखाने को कबाड़ या स्क्रैप के रूप में नीलाम होने से रोके। विधायक ने स्पष्ट किया कि मिल को फिर से चालू करना ही एकमात्र ऐसा व्यावहारिक रास्ता है, जिससे हजारों संकटग्रस्त किसानों और बेरोजगार हो चुके कर्मचारियों को राहत मिल सकती है। उनका तर्क था कि इस दिशा में सरकार को तुरंत कोई ठोस पहल करनी चाहिए।
बकाया राशि और गहराता आर्थिक संकट
इस मिल के बंद होने से पूरे इलाके में एक बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस कारखाने पर स्थानीय गन्ना उत्पादकों का लगभग 43 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। कृषि संकट के साथ साथ मिल में काम करने वाले मजदूरों और कर्मचारियों की हालत भी बेहद खराब है। इन कर्मचारियों का भी करीब 9 करोड़ रुपये बकाया है, जिसका भुगतान लंबे समय से अटका हुआ है। इसके अलावा, विभिन्न बैंकों का भी लगभग 68 करोड़ रुपये का भारी भरकम कर्ज इस मिल पर है। बैंकों के इस बड़े बकाये का मामला वर्तमान में न्यायालय के समक्ष लंबित है। इन विशाल देनदारियों से पता चलता है कि कारखाने के बंद होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर कितना बुरा प्रभाव पड़ा है।
स्क्रैप नीलामी का विरोध और बहाली की नई उम्मीद
इतनी बड़ी देनदारियों के बावजूद, इस चीनी मिल की नीलामी करने और इसे स्क्रैप में काटकर बेचने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार के इस कदम से स्थानीय लोगों और उन किसानों में भारी नाराजगी और गुस्सा पनप रहा है, जिनकी आजीविका पूरी तरह से इसी कारखाने पर निर्भर थी। सदन में चर्चा के दौरान जेडीयू विधायक ने सरकार से पुरजोर मांग की कि मिल को कबाड़ में बेचने के फैसले को तुरंत बदला जाए। उन्होंने विधानसभा को एक महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि एक नया निवेशक इस मिल को पुनर्जीवित करने के लिए आगे आया है। यह निवेशक बैंकों का 68 करोड़ रुपये का पूरा कर्ज चुकाने के लिए तैयार है। इतना ही नहीं, उस निवेशक ने इसी साल के पेराई सत्र से कारखाने का संचालन फिर से शुरू करने का प्रस्ताव भी सरकार को दिया है।
कानूनी पेचीदगियां और सरकार का रुख
सदन में उठाए गए इन गंभीर सवालों का जवाब देते हुए गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने सभी विधायकों को आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार इस पूरे प्रकरण को बेहद गंभीरता से ले रही है। मंत्री ने मामले की कानूनी पेचीदगियों को स्पष्ट करते हुए सदन को बताया कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल यानी एनसीएलटी की कोलकाता बेंच ने इस चीनी मिल की नीलामी का सख्त आदेश पारित किया है। हालांकि, राज्य सरकार हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी है। सरकार के अधिकारी वर्तमान में सभी कानूनी पहलुओं का बहुत गहराई से अध्ययन कर रहे हैं। राज्य सरकार का मुख्य प्रयास यह है कि कानूनी दायरे में रहते हुए कोई ऐसा आवश्यक हस्तक्षेप किया जाए जिससे मिल को दोबारा चालू कराने की संभावनाएं तलाशी जा सकें।
ट्रिब्यूनल के अहम फैसले का इंतजार
मंत्री ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि सरकार किसी भी परिस्थिति में किसानों और कर्मचारियों के हितों की अनदेखी नहीं होने देगी। सभी प्रभावित पक्षों के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए ही आगे की कोई भी रणनीति तय की जाएगी। अब इस पूरी समस्या का समाधान आने वाली कानूनी कार्यवाही पर निर्भर करता है। एनसीएलटी की कोलकाता बेंच में इस बेहद महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई 8 अगस्त को निर्धारित की गई है। फिलहाल, कर्ज के बोझ तले दबे किसानों, बेरोजगार कर्मचारियों और स्थानीय नागरिकों की निगाहें पूरी तरह से राज्य सरकार के अगले कदम और अदालत के आगामी फैसले पर टिकी हुई हैं।













