राजधानी नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाले आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले लग्जरी और पांच सितारा होटलों में कमरों की भारी किल्लत देखी जा रही है। सम्मेलन में भाग लेने के लिए आने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों, राजनयिकों और आगंतुकों के कारण 10 से 13 सितंबर के बीच मध्य दिल्ली के प्रमुख प्रीमियम होटलों में ठहराव की मांग अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई है। इसके परिणामस्वरूप राजधानी के कई प्रतिष्ठित होटलों में कमरों की शत-प्रतिशत बुकिंग हो चुकी है, जबकि जहां जगह शेष बची है, वहां एक रात के प्रवास का शुरुआती किराया लाखों रुपये तक वसूला जा रहा है।
प्रसिद्ध होटलों में कमरों का अकाल और बेतहाशा बढ़ा किराया
विभिन्न होटल बुकिंग प्लेटफॉर्म की गहन जांच से राजधानी के लुटियंस और मध्य क्षेत्र में स्थित प्रमुख आतिथ्य स्थलों की बुकिंग स्थिति को लेकर बेहद चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। सरदार पटेल मार्ग पर स्थित आईटीसी मौर्य होटल में 10 से 13 सितंबर के दौरान प्रवास के लिए उपलब्ध कमरों का शुरुआती किराया ₹2,30,000 प्रति रात से भी अधिक मांगा जा रहा है। इसके साथ ही मान सिंह रोड स्थित ताज महल होटल और डॉ. ज़ाकिर हुसैन मार्ग पर स्थित द ओबेरॉय में 11 और 12 सितंबर के लिए कोई भी कमरा उपलब्ध नहीं है। टाटा समूह के ताज पैलेस तथा चाणक्यपुरी स्थित द लीला पैलेस ने 10 से 12 सितंबर की अवधि के लिए नए कमरों की बुकिंग स्वीकार करना पूरी तरह से बंद कर दिया है।
वैश्विक आयोजनों की मेजबानी और बुनियादी ढांचे का अंतर
राजधानी में उपजी इस स्थिति पर होटल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष के. बी. काचरू ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में एक अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ पर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। देश बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों की मेजबानी करने और खुद को एक प्रमुख MICE (मीटिंग, इंसेंटिव, कॉन्फ्रेंस और एग्जीबिशन) गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। पूरी दुनिया यह देख रही है कि भारत अपने पर्यटन और आतिथ्य लक्ष्यों को पूरा करने के लिए किस प्रकार विस्तार कर रहा है। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि ब्रिक्स सम्मेलन से होटलों में कमरों की उपलब्धता पर काफी ध्यान केंद्रित हुआ है और इस स्थिति ने एक कड़वी सच्चाई को उजागर किया है कि हमारा हॉस्पिटैलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर हमारी पर्यटन जरूरतों के साथ तालमेल नहीं बिठा सका है।
ब्रांडेड कमरों की सीमित संख्या और सेंट्रल दिल्ली पर दबाव
देश में उपलब्ध बुनियादी ढांचे की सीमाओं को रेखांकित करते हुए के. बी. काचरू ने बताया कि इतने विशाल भौगोलिक आकार और विशाल जरूरतों वाले भारत देश में इस समय ब्रांडेड होटलों के केवल 2 लाख से 2.25 लाख कमरे ही मौजूद हैं, जो देश की आवश्यकताओं के मुकाबले काफी कम हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने आ रहे कई विदेशी प्रतिनिधि और आगंतुक आधिकारिक कार्यक्रम से काफी पहले ही दिल्ली पहुंचने लगे हैं और कई मेहमान कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी अपने प्रवास की अवधि बढ़ा रहे हैं। अतिथियों के इस समय से पहले आगमन और प्रवास विस्तार के कारण सेंट्रल दिल्ली में स्थित होटलों में कमरों की उपलब्धता पर अत्यधिक दबाव बन गया है।



















