देश में ब्याज दरें किस दिशा में जाएंगी, इसका फैसला अब बस एक दिन दूर है। भारतीय रिजर्व बैंक की ब्याज दर तय करने वाली समिति, मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी, ने सोमवार 3 अगस्त से अपनी तीन दिवसीय बैठक शुरू कर दी है और इसका नतीजा बुधवार 5 अगस्त को सबके सामने आएगा। करोड़ों घर, गाड़ी और कारोबारी कर्ज लेने वालों के लिए रेपो रेट ही तय करता है कि उनका लोन कितना महंगा होगा, यही वजह है कि हर बार इस बैठक पर सबकी नजर टिकी रहती है।
कब आएगा फैसला
गवर्नर संजय मल्होत्रा बुधवार 5 अगस्त को सुबह ठीक 10:00 बजे बैठक का नतीजा पढ़कर सुनाएंगे। पॉलिसी बयान खत्म होते ही गवर्नर और उनकी छह सदस्यीय कमेटी मीडिया के सामने आएगी। यहां वे फैसले के पीछे की वजह समझाएंगे और महंगाई, आर्थिक विकास, बैंकिंग सिस्टम में नकदी और आगे की नीति की दिशा को लेकर अपना नजरिया रखेंगे।
लाइव कहां देख सकते हैं
जो लोग यह बयान और प्रेस कॉन्फ्रेंस सीधे देखना चाहते हैं, उनके लिए कई आधिकारिक विकल्प मौजूद हैं। पूरी कार्यवाही रिजर्व बैंक की अपनी वेबसाइट, उसके आधिकारिक यूट्यूब चैनल और उसके आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर दिखाई जाएगी। इसे देखने के लिए न किसी केबल कनेक्शन की जरूरत है और न ही किसी पेड सब्सक्रिप्शन की।
ये छह सदस्य लेते हैं फैसला
मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी छह सदस्यों वाली संस्था है और इसकी अध्यक्षता गवर्नर संजय मल्होत्रा करते हैं। उनके साथ डिप्टी गवर्नर डॉ. पूनम गुप्ता और रिजर्व बैंक के कार्यकारी निदेशक इंद्रनील भट्टाचार्य शामिल हैं। बाकी तीन बाहरी विशेषज्ञ हैं, जिन्हें केंद्र सरकार ने नियुक्त किया है, प्रोफेसर राम सिंह, अर्थशास्त्री सौगत भट्टाचार्य और डॉ. नागेश कुमार। यही समूह मिलकर तय करता है कि मुख्य ब्याज दर कहां रहेगी।
अर्थशास्त्रियों का अनुमान क्या है
ज्यादातर जानकारों को उम्मीद है कि कमेटी रेपो रेट को 5.25% पर बिना बदलाव के छोड़ देगी। रेपो रेट वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक कमर्शियल बैंकों को कर्ज देता है, और यही देश में लगभग हर लोन का आधार बनती है, इसलिए कुछ न बदलने का फैसला भी आम लोगों और कारोबारियों के लिए बड़ा मायने रखता है। खुदरा महंगाई फिलहाल केंद्रीय बैंक के तय दायरे के भीतर है, इसलिए तुरंत कोई कदम उठाने का दबाव नहीं है। फिर भी बैंक सतर्क रुख बनाए रख सकता है। दुनिया भर की अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की चढ़ती कीमतें और दबाव में चल रहा रुपया, ये सब मिलकर नीति-निर्माताओं को फूंक-फूंककर कदम रखने की वजह देते हैं।
जून की बैठक में क्या हुआ था
पिछली बार 3 जून से 5 जून तक चली बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ था और यह 5.25% पर ही टिका रहा था। कमेटी ने अपना रुख भी 'न्यूट्रल' बनाए रखा था, यानी वह आंकड़ों के हिसाब से किसी भी दिशा में जाने के लिए तैयार थी। उसी समीक्षा में स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) दर को 5% पर रखा गया था, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) दर और बैंक रेट दोनों 5.5% पर बरकरार रहे थे। अगर बुधवार का फैसला बाजार के अनुमान के मुताबिक रहा, तो यह स्थिरता आगे भी जारी रहेगी।



















