राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी दिल्ली-एनसीआर में प्रॉपर्टी की दुनिया में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहाँ नोएडा में जमीनों की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुँच गई हैं और यह प्रीमियम रियल एस्टेट बाजार के रूप में गुरुग्राम की लंबे समय से चली आ रही बढ़त को चुनौती दे रही है। नोएडा के सेक्टर 108 में एक व्यावसायिक आवासीय भूखंड की हालिया नीलामी ने जमीन की कीमतों के पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जिससे उत्तर भारत के प्रॉपर्टी बाजार में निवेशकों के रुझान का रुख बदल गया है। दशकों से घर खरीदने वाले और बड़े डेवलपर्स गुरुग्राम को सबसे महंगे और लक्जरी गंतव्य के रूप में देखते थे, जहाँ प्रति एकड़ जमीन की कीमत सबसे ज्यादा होती थी। हालांकि, बुनियादी ढांचे में बड़े बदलावों, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की शुरुआत और सुनियोजित शहरी योजनाओं ने नोएडा की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है, जिससे यहाँ के प्रमुख सेक्टरों में मकान बनाने या जमीन खरीदने की लागत पहले से कहीं अधिक महंगी हो गई है।
नोएडा की 1,839 करोड़ रुपये की ऐतिहासिक नीलामी
रियल एस्टेट बाजार में नोएडा और गुरुग्राम की इस तुलना के पीछे सबसे मुख्य वजह सेक्टर 108 में हुआ 12.5 एकड़ जमीन का एक ऐतिहासिक सौदा है। नोएडा विकास प्राधिकरण ने इस प्राइम रेजिडेंशियल प्लॉट की नीलामी के लिए 835 करोड़ रुपये का बेस प्राइस तय किया था। नीलामी के दौरान दिग्गजों के बीच चली कड़ी बोली प्रक्रिया के बाद रियल एस्टेट कंपनी एम3एम ने इस भूखंड को 1,839 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि में हासिल कर लिया। अगर प्रति एकड़ दर के हिसाब से देखें तो यह सौदा लगभग 147 करोड़ रुपये प्रति एकड़ बैठता है, जो दिल्ली-एनसीआर के इतिहास में अब तक की सबसे महंगी प्रति एकड़ जमीन की खरीद मानी जा रही है। इस पूरी नीलामी प्रक्रिया से नोएडा प्राधिकरण को कुल मिलाकर करीब 3,300 करोड़ रुपये की कमाई हुई है। इस सौदे की खास बात यह भी रही कि देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ ने भी इस जमीन के लिए जोरदार बोली लगाई थी, लेकिन एम3एम ने उच्चतम बोली लगाकर यह जमीन अपने नाम कर ली।
गुरुग्राम का 2018 का 1,496 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड सौदा
सेक्टर 108 के इस बड़े सौदे का महत्व समझने के लिए गुरुग्राम के साल 2018 में हुए ऐतिहासिक सौदे को देखना जरूरी है। उस समय गुरुग्राम के उद्योग विहार में 11.76 एकड़ जमीन के टुकड़े को डीएलएफ कंपनी ने 1,496 करोड़ रुपये में खरीदा था। इस भूखंड को हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम यानी एचएसआईआईडीसी ने नीलाम किया था, जिसके लिए 686 करोड़ रुपये का बेस प्राइस निर्धारित किया गया था। बोली खत्म होने पर यह सौदा 127 करोड़ रुपये प्रति एकड़ की दर पर पूरा हुआ था, जो उस समय एनसीआर क्षेत्र का सबसे महंगा भूखंड सौदा बन गया था। इन दोनों सौदों की तुलना करने से स्पष्ट पता चलता है कि जहाँ 2018 में गुरुग्राम ने 127 करोड़ रुपये प्रति एकड़ का स्तर छुआ था, वहीं नोएडा अब 147 करोड़ रुपये प्रति एकड़ का नया बेंचमार्क स्थापित करके जमीन की कीमतों के मामले में आगे निकल चुका है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी: नोएडा बनाम गुरुग्राम
विकास और अवसरों की दृष्टि से गुरुग्राम की सबसे बड़ी ताकत हमेशा से कॉर्पोरेट नौकरियां और बहुराष्ट्रीय कंपनियों की उपस्थिति रही है। गुरुग्राम को आईटी कंपनियों के बड़े केंद्र, बेहतर सड़क नेटवर्क और दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे यानी आईजीआई एयरपोर्ट के पास होने का बहुत बड़ा लाभ मिला। इसके विपरीत, नोएडा में पहले आईटी सेक्टर का विस्तार धीमा था और व्यावसायिक विकास के मामले में यह गुरुग्राम से पीछे माना जाता था। हालांकि, अब नोएडा में कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर का ऐसा तेजी से विकास हुआ है जिसने दोनों शहरों के बीच के आर्थिक अंतर को बहुत तेजी से पाट दिया है।
जेवर एयरपोर्ट, नए एक्सप्रेसवे और आधुनिक ट्रांसपोर्ट योजनाएं
नोएडा के रियल एस्टेट बाजार में आए इस उछाल का सबसे मुख्य कारण ग्रेटर नोएडा के जेवर में बना नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। जेवर एयरपोर्ट से 15 जून से उड़ानों की शुरुआत हो चुकी है, जिससे यह शहर अंतरराष्ट्रीय हवाई कनेक्टिविटी के मामले में गुरुग्राम के मुकाबले मजबूत स्थिति में आ गया है। सड़क नेटवर्क की बात करें तो पहले जहाँ नोएडा के पास मुख्य रूप से यमुना एक्सप्रेसवे ही था, वहीं अब गंगा एक्सप्रेसवे के बनने से संपर्क व्यवस्था और मजबूत हो गई है। इसके अतिरिक्त, जेवर एयरपोर्ट को फरीदाबाद से जोड़ने वाले एक नए एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य भी तेजी से बढ़ा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने 30 मिनट कनेक्टिविटी योजना पर भी काम शुरू किया है, जिसका लक्ष्य शहर के किसी भी हिस्से से आधे घंटे के भीतर यात्रा पूरी करना है। सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाने के लिए नोएडा और ग्रेटर नोएडा में देश की पहली पॉड टैक्सी चलाने की तैयारी है, जबकि जेवर एयरपोर्ट को सीधे जोड़ने के लिए रैपिड रेल नेटवर्क को भी विस्तार दिया जा रहा है।
न्यू नोएडा, फिल्म सिटी और औद्योगिक अवसर
हवाई अड्डे और सड़कों के अलावा बड़े पैमाने पर हो रहे नए शहरी विकास भी इस क्षेत्र के भविष्य को संवार रहे हैं। प्रशासन ने आसपास के 84 गांवों की जमीन का अधिग्रहण करके न्यू नोएडा बसाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे नए औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्र विकसित होंगे। इसके साथ ही, यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे मुंबई की तर्ज पर एक अत्याधुनिक फिल्म सिटी का निर्माण किया जा रहा है। इन बड़ी परियोजनाओं के साथ-साथ कई विनिर्माण यानी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां भी नोएडा में अपनी नई इकाइयां स्थापित कर रही हैं, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं और आवासीय व व्यावसायिक प्रॉपर्टी की मांग में भारी इजाफा हो रहा है।
विभिन्न सेक्टरों में जमीनों और प्रॉपर्टी की कीमतों के आंकड़े
नोएडा के विभिन्न इलाकों में जमीनों और अपार्टमेंट्स की कीमतों में उछाल के आंकड़े बहुत स्पष्ट हैं। जेवर एयरपोर्ट के नजदीकी क्षेत्रों में साल 2020 में जहाँ जमीन का भाव 3,200 रुपये प्रति वर्गफुट था, वह अब तीन गुना बढ़कर 9,600 रुपये प्रति वर्गफुट तक पहुँच चुका है। इसी क्षेत्र में अपार्टमेंट्स की दरें 1,100 रुपये प्रति वर्गफुट से बढ़कर 2,500 रुपये प्रति वर्गफुट हो गई हैं। नोएडा का सेक्टर 168 सबसे तेजी से उभरता आवासीय क्षेत्र बना है, जहाँ 2026 में जमीनों का रेट 11,600 रुपये प्रति वर्गफुट दर्ज किया गया है; अनुमान है कि 2030 तक यहाँ 25 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि के साथ भाव 16,000 से 22,000 रुपये प्रति वर्गफुट तक पहुँच सकते हैं। न्यू नोएडा क्षेत्र में भी अगले 4 वर्षों में जमीनों की कीमतों में लगभग 52 प्रतिशत की बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। इसके अलावा, नोएडा के सेक्टर 128, सेक्टर 137, सेक्टर 150, सेक्टर 143, सेक्टर 142, सेक्टर 107, सेक्टर 76 और सेक्टर 78 जैसे प्रमुख आवासीय इलाकों में भी आने वाले 4 वर्षों के दौरान 10 से 20 प्रतिशत की स्थिर वृद्धि का अनुमान जताया गया है।



















