तेलंगाना के इतिहास और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में ऐसे अनेक महापुरुष हुए हैं, जिन्होंने जनता के अधिकार और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन न्योछावर कर दिया। तेलंगाना के आदिलाबाद क्षेत्र की ऐतिहासिक धरती पर जन्मे कस्ताला रामकिष्टू ऐसे ही एक अनूठे स्वतंत्रता सेनानी और जननेता थे। हैदराबाद के निजाम के शासनकाल में रजाकारों के अत्याचारों के विरुद्ध उन्होंने अटूट साहस के साथ आवाज उठाई। जनसेवा को ही अपने जीवन का ध्येय बनाने वाले इस महान नेता ने गरीब और शोषित समाज के उत्थान के लिए अपनी निजी संपत्ति तक न्योछावर कर दी।
रजाकारों का मुकाबला और निजाम का सख्त आदेश
इतिहास के जानकार शाहिद उमेर के अनुसार, कस्ताला रामकिष्टू का जन्म 16 अगस्त 1918 को हुआ था। उन्होंने न केवल भारत के राष्ट्रीय स्वाधीनता संग्राम में सक्रिय भाग लिया, बल्कि निजाम के निरंकुश शासन व्यवस्था के खिलाफ चले तेलंगाना सशस्त्र संघर्ष में भी अग्रणी भूमिका निभाई। उस दौर में जब रजाकारों का उपद्रव और अत्याचार चरम पर था, तब रामकिष्टू ने बिना किसी भय के उनका कड़ा विरोध किया। उनके बढ़ते प्रभाव और जनसंघर्ष को देखते हुए तत्कालीन निजाम सरकार ने उन्हें देखते ही गोली मारने का प्रशासनिक आदेश जारी कर दिया था। इस भीषण खतरे के बावजूद वे अपने रास्ते से पीछे नहीं हटे और बेसहारा तथा भूमिहीन लोगों के अधिकारों की लड़ाई लगातार लड़ते रहे।
जनआंदोलन के लिए निजी जमीन की बिक्री और बेघर होने का दौर
सशस्त्र संघर्ष और लोक कल्याणकारी आंदोलन को निरंतर चलाने के लिए आर्थिक संसाधनों की सख्त जरूरत थी। ऐसे कठिन समय में कस्ताला रामकिष्टू ने अपने साथियों की आर्थिक मदद और आंदोलन की निरंतरता बनाए रखने के लिए अपनी निजी जमीन तक बेच डाली। अपनी व्यक्तिगत संपत्ति न्योछावर करने के कारण एक समय ऐसा आया जब उनके पास अपना खुद का कोई मकान या ठिकाना नहीं बचा था। वे पूरी तरह बेघर हो गए थे। लेकिन आदिलाबाद के जिन निर्धन और शोषित लोगों के लिए उन्होंने अपना सब कुछ त्याग दिया था, उन गरीबों ने मिलकर एकजुटता दिखाई और अपने इस जननायक के रहने के लिए एक घर का निर्माण कराया।
1967 का विधानसभा चुनाव और 20,000 एकड़ जमीन के पट्टे
जनता के प्रति कस्ताला रामकिष्टू के इस अनूठे समर्पण और त्याग का प्रतिफल था कि वर्ष 1967 के विधानसभा चुनाव में आदिलाबाद की जनता ने उन्हें भारी समर्थन देकर अपना विधायक चुन लिया। जनप्रतिनिधि बनने के पश्चात उन्होंने सत्ता का उपयोग केवल जनकल्याण के कार्यों में किया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने भूमिहीन गरीबों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए ऐतिहासिक प्रयास किए और लगभग 20,000 एकड़ सरकारी भूमि के पट्टे जरूरतमंदों के नाम करवाए। इसके अतिरिक्त उन्होंने आदिलाबाद शहर तथा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों बेघर परिवारों को आवासीय भूमि उपलब्ध कराई।
आदिलाबाद का विकास, किसान मुआवजा और अमर विरासत
क्षेत्र के आर्थिक विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में भी कस्ताला रामकिष्टू की दूरदर्शी भूमिका रही। आदिलाबाद में सीसीआई स्पिनिंग मिल की स्थापना कराने में उनकी प्रमुख भूमिका रही। इसके साथ ही सातनाला सिंचाई परियोजना के शुरुआती भूमि सर्वेक्षण कार्य को गति प्रदान करने में उन्होंने अहम योगदान दिया। जब आदिलाबाद हवाई पट्टी के निर्माण के लिए 109 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया, तब उन्होंने किसानों के पक्ष में मजबूती से खड़े होकर उन्हें उचित और न्यायसंगत मुआवजा दिलवाया। 8 सितंबर 1985 को इस महान जननायक का देहावसान हो गया। आज भी आदिलाबाद स्थित केआरके कॉलोनी उनके संघर्षों और जनसेवा की जीवंत याद दिलाती है।



















