छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में मानसून के आगमन के साथ ही पोल्ट्री फार्म संचालकों के सामने प्रबंधन से जुड़ी कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। बारिश के दिनों में फार्म के भीतर नमी का स्तर अचानक बढ़ जाता है, जिससे मुर्गियों में कई तरह के संक्रामक रोगों का फैलाव होने लगता है। इस स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बालोद जिले के पशुपालन विभाग के उप-संचालक डॉ डीके सिहारे ने पोल्ट्री व्यवसायियों के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। उनके अनुसार बारिश के मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भी फार्म के अंदर बैक्टीरिया और फंगस के तेजी से पनपने का कारण बन सकती है, जिससे बड़े पैमाने पर मुर्गियां बीमार पड़ सकती हैं।
बरसात के पानी से बचाव और फार्म की सुरक्षा
पशुपालन विभाग के उप-संचालक डॉ डीके सिहारे ने स्पष्ट किया है कि मानसून के दौरान फार्म प्रबंधन की सबसे पहली प्राथमिकता बाहर के पानी को अंदर आने से रोकना होना चाहिए। पोल्ट्री फार्म को चारों तरफ से इस तरह से ढका जाना चाहिए कि तेज बारिश का पानी शेड के भीतर प्रवेश न कर सके। यदि फार्म के अंदर बारिश का पानी पहुंच जाता है, तो वहां की जमीन और दीवारों में खतरनाक बैक्टीरिया तेजी से वृद्धि करने लगते हैं। यह नमी मुर्गियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करती है और उन्हें विभिन्न बीमारियों की चपेट में ले आती है।
गीले बिछावन से बढ़ता इंफेक्शन और मृत्यु दर
पोल्ट्री फार्म के फर्श पर बिछाया जाने वाला भूसा या बिछावन बारिश के दिनों में सबसे संवेदनशील हिस्सा होता है। यदि हवा में मौजूद नमी या बाहर से आए पानी के कारण यह बिछावन गीला हो जाता है, तो फार्म में बैक्टीरियल और फंगल इंफेक्शन का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। गीले भूसे में हानिकारक रोगाणु तेजी से फलते-फूलते हैं, जिससे मुर्गियों में श्वसन और पाचन से जुड़ी बीमारियां फैलने लगती हैं। डॉ सिहारे के मुताबिक अगर समय रहते इस गीले बिछावन को बदला न जाए या इंफेक्शन पर नियंत्रण न पाया जाए, तो फार्म में मुर्गियों की मृत्यु दर में अचानक भारी बढ़ोतरी हो सकती है।
मौसम साफ होने पर वेंटिलेशन और हवा का बहाव
बारिश के दिनों में फार्म को सुरक्षित रखने के चक्कर में कई संचालक उसे लगातार बंद रखते हैं, जिसे विशेषज्ञों ने गलत बताया है। डॉ डीके सिहारे के अनुसार जब भी मौसम साफ हो और धूप निकले, तो फार्म को पूरी तरह बंद रखने के बजाय उसमें ताजी हवा के आवागमन की व्यवस्था करनी चाहिए। फार्म में हवा का उचित बहाव होने से अंदर जमा नमी बाहर निकलती है और वातावरण सूखा तथा स्वस्थ बना रहता है। पर्याप्त वेंटिलेशन से मुर्गियों को सांस लेने में आसानी होती है और फार्म के अंदर अमोनिया जैसी गैसों का असर भी कम होता है।
पेयजल की गुणवत्ता और ई-कोलाई से सुरक्षा
मुर्गियों के स्वास्थ्य के लिए पानी की शुद्धता अत्यंत आवश्यक है। मानसून के दौरान सामान्य बोरवेल के पानी में ई-कोलाई जैसे घातक बैक्टीरिया मौजूद होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। सीधे बोर का पानी मुर्गियों को पिलाने से वे तुरंत संक्रमित हो सकती हैं। डॉ सिहारे ने सलाह दी है कि पोल्ट्री फार्मों में केवल फिल्टर्ड और विधिवत उपचारित पानी का ही उपयोग किया जाए। पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार पानी में उचित दवाएं या वाटर प्यूरीफायर मिलाकर ही मुर्गियों को पीने के लिए देना चाहिए ताकि जलजनित बीमारियों से उनका बचाव हो सके।
लापरवाही से भारी आर्थिक नुकसान का खतरा
पोल्ट्री उद्योग में स्वच्छता और सतर्कता ही सफलता की कुंजी है। बारिश के मौसम में साफ-सफाई, सूखा बिछावन, बेहतर वेंटिलेशन और स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी बातों का ध्यान रखकर बड़ी तबाही को टाला जा सकता है। डॉ सिहारे ने चेतावनी दी है कि यदि इन शुरुआती सावधानियों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो बीमारियों के तेजी से फैलने के कारण मुर्गियों की मौत हो सकती है। इससे पोल्ट्री फार्म संचालकों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ सकती है, इसलिए समय पर उचित कदम उठाना बेहद जरूरी है।



















