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दरभंगा में अखिलेश चौधरी का कमाल, हाइब्रिड खीरे की खेती से हो रही छप्परफाड़ कमाईव्यापार
7 सित॰ 2026, 10:58 pm (2 घंटे पहले)· 3

दरभंगा में अखिलेश चौधरी का कमाल, हाइब्रिड खीरे की खेती से हो रही छप्परफाड़ कमाई

दरभंगा के किसान अखिलेश चौधरी ने हाइब्रिड खीरे की खेती से बंपर मुनाफा कमाने का नया रास्ता निकाला है। सही देखभाल और वैज्ञानिक तरीकों से एक पौधे से लगभग 100 खीरे तक मिल रहे हैं, जिससे तीन से चार महीने तक लगातार आमदनी होती है।

बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र में अब कृषि का दायरा तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक खाद्यान्न फसलों से हटकर किसान उन बागवानी विकल्पों की ओर आकर्षित हो रहे हैं जो कम अवधि में आर्थिक मजबूती प्रदान करते हैं। इसी दिशा में खीरे की कमर्शियल खेती ने अन्नदाताओं का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। मंडी में इस हरी सब्जी की लगातार बनी रहने वाली डिमांड को देखते हुए आधुनिक हाइब्रिड किस्मों का चलन तेजी से बढ़ रहा है। कृषि विशेषज्ञ इस नकदी फसल को किसानों की आय बढ़ाने का एक बेहतरीन माध्यम मान रहे हैं।

अखिलेश चौधरी ने अपनाई नई तकनीक

दरभंगा जिले के प्रगतिशील किसान अखिलेश चौधरी ने इस सीजन में अपने खेतों में हाइब्रिड वैरायटी के खीरे की फसल उगाई है। उनका अनुभव बताता है कि यदि पौधों की सही ढंग से सार-संभाल की जाए और समय पर सिंचाई का प्रबंध हो, तो प्रति पौधा करीब 100 खीरे तक की बंपर पैदावार हासिल की जा सकती है। इस पौधे की खासियत यह है कि एक बार फसल तैयार होने के बाद यह कई हफ्तों तक लगातार फल देता रहता है। अखिलेश चौधरी का कहना है कि उनके खेतों में लगे इन पौधों से आगामी 3 से 4 महीने तक लगातार तुड़ाई होने की पूरी संभावना है। इससे किसानों को एकमुश्त पैसे मिलने के बजाय लंबे अंतराल तक नियमित रूप से नकदी मिलती रहती है।

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पारंपरिक फसलों से क्यों बेहतर है खीरा

अखिलेश चौधरी का साफ तौर पर मानना है कि धान और गेहूं जैसी परंपरागत फसलों की तुलना में बागवानी और खासकर सब्जियों का उत्पादन ज्यादा फायदेमंद साबित हो रहा है। बाजार में खीरे की भारी मांग किसानों के लिए काफी लाभ का सौदा बन रही है। मौजूदा समय में खुले बाजार में खीरे का खुदरा मूल्य लगभग 40 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम तक चल रहा है। हालांकि कृषि जिंसों के दाम मांग और आपूर्ति के आधार पर घटते-बढ़ते रहते हैं, लेकिन थोक या खुदरा बाजार में सही भाव मिलने पर किसानों की जेब पर इसका बेहद सकारात्मक असर पड़ता है।

कम लागत और बंपर मुनाफा

स्थानीय किसानों के अनुभव के अनुसार खीरे की फसल उगाने में शुरुआती लागत बहुत ज्यादा नहीं आती है। थोड़ी सी तकनीकी समझ और उचित प्रबंधन के जरिए इसमें बंपर पैदावार ली जा सकती है। समय-समय पर पानी देना, सही खाद का इस्तेमाल करना और कीटों से सुरक्षा करना ही इसकी मुख्य जरूरतें हैं। बाजार में बारहमासी मांग होने के कारण खीरा अब इस क्षेत्र के किसानों के लिए एक प्रमुख नकदी फसल का विकल्प बनता जा रहा है। मिथिला के किसान अब पारंपरिक तौर-तरीकों के साथ ऐसी व्यावसायिक फसलों को जोड़कर अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने में जुटे हुए हैं।

सवाल-जवाब

दरभंगा में किस किसान ने हाइब्रिड खीरे की खेती की है?
दरभंगा के किसान अखिलेश चौधरी ने इस सीजन में हाइब्रिड खीरे की खेती शुरू की है।
एक पौधे से कितने खीरे मिलने की संभावना है?
सही देखभाल और समय पर सिंचाई मिलने पर एक पौधे से लगभग 100 खीरे तक प्राप्त हो सकते हैं।
खीरे की फसल कितने समय तक फल देती है?
अखिलेश चौधरी के अनुसार इन पौधों से करीब 3 से 4 महीने तक लगातार फल मिलने की उम्मीद है।
बाजार में खीरे का मौजूदा भाव क्या चल रहा है?
फिलहाल बाजार में खीरे का भाव लगभग 40 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम चल रहा है।
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