भारतीय वाहन बाजार के लिए पिछला महीना यानी अगस्त बेहद शानदार रहा है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) के आंकड़ों के मुताबिक, देश में गाड़ियों की खुदरा बिक्री में 17.51 प्रतिशत की भारी तेजी आई है और यह बढ़कर कुल 24,23,201 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। अगर पिछले साल के इसी महीने यानी अगस्त 2025 की बात करें, तो उस दौरान कुल खुदरा बिक्री का आंकड़ा 20,62,038 गाड़ियों पर सिमट गया था। इस बार के इन आंकड़ों ने बाजार में एक नया उत्साह भर दिया है, क्योंकि भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर के इतिहास में किसी भी अगस्त महीने में इतनी बड़ी संख्या में गाड़ियों की बिक्री पहले कभी दर्ज नहीं की गई थी। इस पूरे परिदृश्य में सबसे दिलचस्प बदलाव वैकल्पिक ईंधन सेगमेंट में देखने को मिला है, जहां सीएनजी, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक गाड़ियों ने पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियों को पछाड़ दिया है।
पेट्रोल को पछाड़कर आगे निकले वैकल्पिक ईंधन
वाहन बाजार में इस बार एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। भारत में पहली बार ऐसा हुआ है कि पैसेंजर व्हीकल्स यानी यात्री गाड़ियों की बिक्री में ऑप्शनल फ्यूल जैसे कि सीएनजी, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक की हिस्सेदारी बढ़कर कुल 41.95 प्रतिशत के मजबूत मुकाम पर पहुंच गई है। खास बात यह है कि पारंपरिक पेट्रोल गाड़ियों की हिस्सेदारी इस दौरान 40.85 प्रतिशत पर ही सिमट कर रह गई। इस तरह वैकल्पिक ईंधन ने पेट्रोल को पीछे छोड़ते हुए अपनी बादशाहत कायम कर ली है। यदि कुछ समय पहले की स्थिति पर नजर डालें, तो लगभग एक साल पहले तक पेट्रोल की हिस्सेदारी इन तमाम वैकल्पिक ईंधनों की कुल हिस्सेदारी के मुकाबले करीब 11 प्रतिशत ज्यादा हुआ करती थी, लेकिन अब वह बड़ी बढ़त पूरी तरह से समाप्त हो चुकी है। उपभोक्ता अब पारंपरिक ईंधन के बजाय पर्यावरण के अनुकूल और किफायती विकल्पों को तेजी से अपना रहे हैं।
मासिक आधार पर थोड़ी सुस्ती, लेकिन सालाना आंकड़ों में जबरदस्त उछाल
फाडा के अध्यक्ष साई गिरिधर ने आंकड़ों की जानकारी देते हुए बताया कि अगस्त 2026 भारतीय वाहन खुदरा बाजार के इतिहास में अब तक की सबसे ज्यादा बिक्री दर्ज करने वाला अगस्त महीना बन गया है। हालांकि, यदि इसकी तुलना ठीक पिछले महीने यानी जुलाई के आंकड़ों से की जाए, तो खुदरा बिक्री में 6.48 प्रतिशत की मामूली गिरावट जरूर दर्ज की गई है। इस हल्की सी सुस्ती के पीछे मुख्य वजह मानसून का धीमा पड़ना और जुलाई के दौरान गणेश चतुर्थी तथा ओणम जैसे त्योहारों से जुड़ी एडवांस खरीदारी का कुछ हिस्सा सितंबर के खाते में चले जाना रही है। इसके बावजूद, सालाना आधार पर जो भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है, उसका एक बहुत बड़ा कारण पिछले साल यानी अगस्त 2025 का बेहद कमजोर आधार था। उस समय ऑटो सेक्टर में सुस्ती थी क्योंकि खरीदार जीएसटी 2.0 के तहत भविष्य में टैक्स दरों में कटौती होने की उम्मीद में अपनी गाड़ियां खरीदने का फैसला लगातार टाल रहे थे। यही वजह है कि इस बार का सालाना तुलनात्मक ग्राफ इतना ऊंचा दिखाई दे रहा है, हालांकि डीलरों का यह भी कहना है कि इस बार त्योहारों से जुड़ी शुरुआती खरीदारी उनकी खुद की उम्मीदों से थोड़ी कम ही रही है।
पैसेंजर कारों की बिक्री में 16 प्रतिशत से अधिक की शानदार तेजी
सितंबर 2025 में सरकार द्वारा जीएसटी की दरों में कटौती किए जाने के बाद से ही भारतीय ऑटो इंडस्ट्री में लगातार मजबूत और स्थिर बढ़त दर्ज की जा रही है। इसी सकारात्मक रुख का असर पैसेंजर व्हीकल्स सेगमेंट पर भी साफ तौर पर दिखाई दिया है। बीते अगस्त महीने में देश भर में पैसेंजर कारों की खुदरा बिक्री का आंकड़ा कुल 4,02,398 यूनिट्स तक पहुंच गया। यदि इसकी तुलना पिछले साल के अगस्त महीने से की जाए, जब कुल 3,46,468 गाड़ियां बिकी थीं, तो साफ पता चलता है कि इस सेगमेंट में कुल 16.14 प्रतिशत की ठोस बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कार खरीदारों का उत्साह इस बात का गवाह है कि वाहन बाजार अब पूरी तरह से पटरी पर लौट आया है और टैक्स दरों में हुए बदलाव का सकारात्मक असर लंबे समय तक बना हुआ है।
टू-व्हीलर्स, थ्री-व्हीलर्स और कमर्शियल गाड़ियों ने भी पकड़ी रफ्तार
केवल कारें ही नहीं, बल्कि वाहन बाजार के अन्य सभी प्रमुख सेगमेंट में भी बिक्री का ग्राफ ऊपर की ओर ही गया है। फाडा की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, अगस्त के महीने में टू-व्हीलर्स यानी दोपहिया वाहनों की खुदरा बिक्री में 19.69 प्रतिशत की जोरदार छलांग देखने को मिली और यह बढ़कर 17,14,610 यूनिट्स पर पहुंच गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 14,32,537 गाड़ियों का था। वहीं दूसरी ओर, तिपहिया गाड़ियों यानी थ्री-व्हीलर्स की बात करें तो पिछले महीने इनकी कुल बिक्री 1,22,281 यूनिट्स दर्ज की गई, जो कि अगस्त 2025 में बिकी 11,2553 गाड़ियों की तुलना में 8.64 प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा देश के व्यापारिक और परिवहन सेक्टर की रीढ़ मानी जाने वाली कमर्शियल गाड़ियों की खुदरा बिक्री भी पीछे नहीं रही। कमर्शियल वाहनों की खुदरा बिक्री में 14.45 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह बढ़कर 90,769 यूनिट्स हो गई, जबकि पिछले साल 2025 की समान अवधि में यह आंकड़ा 79,306 गाड़ियों का था। इस प्रकार ऑटो सेक्टर के हर एक कोने में सुधार और विकास के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं, जिसमें मारुति सुज़ुकी जैसी प्रमुख कंपनियों के नए और प्रीमियम लॉन्च भी बड़ा योगदान दे रहे हैं।



















