देश की राजधानी में स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आने-जाने वाले यात्रियों के लिए टर्मिनल बदलना अब पहले से कहीं ज्यादा सुगम होने जा रहा है। उड़ानों के विभिन्न टर्मिनलों के बीच आवागमन को तेज और आसान बनाने के साथ ही परिसर के इर्द-गिर्द सड़कों पर वाहनों का जमावड़ा घटाने के मकसद से एक आधुनिक ऑटोमेटेड पैसेंजर मूवर (APM) स्थापित करने की तैयारी चल रही है। अधिकारियों ने मंगलवार को जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस नई प्रणाली को साल 2030 तक पूरी तरह चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। इस पूरे बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट पर लगभग 3500 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की जाएगी।
मास्टर प्लान का अहम हिस्सा है यह ड्राइवरलेस ट्रांसपोर्ट नेटवर्क
दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) के सीईओ प्रदीप पणिकर ने इस योजना की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए बताया कि यह प्रस्तावित ऑटोमेटेड पैसेंजर मूवर हवाई अड्डे के साल 2036 तक चलने वाले 10-वर्षीय मास्टर प्लान का ही एक प्रमुख अंग है। तकनीकी रूप से APM एक बिना चालक के चलने वाला अत्याधुनिक ट्रांजिट सिस्टम होता है, जो यात्रियों को बिना किसी रुकावट के हवाई अड्डे के एक कोने से दूसरे कोने तक तेजी से पहुंचाता है। परियोजना के संचालन में आने के शुरुआती बारह महीनों के दौरान ही रोजाना लगभग 55,000 मुसाफिरों द्वारा इस नई सेवा का लाभ उठाने का अनुमान लगाया गया है।
7.3 किलोमीटर लंबा ट्रैक और 6 स्टेशनों का खाका
अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस पूरे ऑटोमेटेड पैसेंजर मूवर रूट की कुल लंबाई 7.3 किलोमीटर निर्धारित की गई है। इस पूरे ट्रैक पर कुल 6 स्टेशन विकसित किए जाएंगे। नई प्रणाली के अमल में आ जाने के बाद टर्मिनल-1 से टर्मिनल-3 तक का सफर महज 13 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। यह रूट सिर्फ टर्मिनल-1, टर्मिनल-2 और टर्मिनल-3 को ही आपस में नहीं बांधेगा, बल्कि इसके जरिए कार्गो टर्मिनल और एयरोसिटी का इलाका भी सीधा जुड़ जाएगा। इसके अतिरिक्त, इस नेटवर्क के एक स्टेशन को सीधे दिल्ली मेट्रो की लाइन से भी इंटरकनेक्ट किया जाएगा, जिससे शहर भर से आने वाले यात्रियों का सफर भी पूरी तरह सहज बन सके। वर्तमान आंकड़ों पर नजर डालें तो दिल्ली हवाई अड्डे के तीनों टर्मिनलों की संयुक्त वार्षिक यात्री वहन क्षमता 10.6 करोड़ दर्ज है।
वार्षिक यात्री क्षमता को 12.5 करोड़ तक ले जाने की तैयारी
DIAL की इस व्यापक 10-वर्षीय विकास योजना के तहत हवाई अड्डे की सालाना क्षमता को मौजूदा स्तर से बढ़ाकर 12.5 करोड़ तक पहुंचाने की रूपरेखा तैयार की गई है। इस विस्तार के जरिए 8.60 करोड़ घरेलू मुसाफिरों के साथ-साथ 3.90 करोड़ अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को संभालने का बुनियादी ढांचा तैयार होगा। जरूरत और मांग के अनुसार यह आंकड़ा बढ़कर 12.9 करोड़ यात्रियों तक भी पहुंच सकता है। यदि अलग-अलग टर्मिनलों की वर्तमान स्थिति का विश्लेषण करें, तो इस समय टर्मिनल-1 की सालाना क्षमता 4.2 करोड़, टर्मिनल-2 की 1.4 करोड़ और टर्मिनल-3 की क्षमता 5 करोड़ यात्रियों की है। टर्मिनल-3 की मौजूदा कुल क्षमता में 1.9 करोड़ घरेलू यात्री और 3.1 करोड़ अंतरराष्ट्रीय मुसाफिर शामिल हैं।
सड़क मार्ग की मौजूदा निर्भरता और नए पियर-ई का निर्माण
भौगोलिक स्थिति के लिहाज से टर्मिनल-2 और टर्मिनल-3 एक-दूसरे के बिल्कुल पास स्थित हैं, जबकि टर्मिनल-1 उनसे कुछ किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है। इस दूरी की वजह से जो यात्री टर्मिनल-3 पर अपनी फ्लाइट से उतरते हैं और उन्हें कनेक्टिंग फ्लाइट पकड़ने के लिए टर्मिनल-1 जाना होता है, उन्हें फिलहाल सड़क मार्ग से भारी ट्रैफिक के बीच सफर तय करना पड़ता है। इस असुविधा को तात्कालिक तौर पर घटाने के लिए DIAL टर्मिनल-3 से टर्मिनल-1 के बीच हवाई अड्डे के प्रतिबंधित एयरसाइड इलाके के अंदर से बसें संचालित करने की इजाजत मांग रहा है और संबंधित सुरक्षा व प्रशासनिक अधिकारियों के औपचारिक फैसले की प्रतीक्षा कर रहा है। दूसरी तरफ, प्रदीप पणिकर ने यह भी साफ किया कि हवाई यात्रा न करने वाले गैर-यात्रियों से इस प्रस्तावित पैसेंजर मूवर के उपयोग पर किराया लिया जाएगा अथवा नहीं, इस बिंदु पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इसके अलावा क्षमता विस्तार को रफ्तार देने के लिए टर्मिनल-3 के परिसर में अप्रैल, 2030 तक नया पियर-ई भी तैयार कर लिया जाएगा। पियर मुख्य टर्मिनल इमारत से आगे निकली वह विस्तृत संरचना होती है जिसके जरिए यात्री एयरोब्रिज से होकर सीधे विमान में सवार होते हैं।

















