राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को दुरुस्त करने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की तरफ से की गई व्यापक जांच के दौरान नियमों के खिलाफ पाए जाने पर 1.79 लाख से ज्यादा राशन कार्डों को पूरी तरह रद्द कर दिया गया है। इस कड़ी कार्रवाई के बाद लगभग 7.45 लाख लोगों के नाम पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम यानी पीडीएस की सूची से बाहर हो चुके हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सब्सिडी वाले राशन का लाभ केवल उन परिवारों तक पहुंचे जो वास्तव में इसके हकदार और जरूरतमंद हैं।
जांच के दौरान सामने आईं कई तरह की अनियमितताएं
विभाग द्वारा चलाई गई इस पूरी छानबीन के दौरान कई प्रकार की गंभीर गड़बड़ियां उजागर हुईं। अधिकारियों ने पाया कि कुछ परिवार ऐसे थे जिनकी वार्षिक आय सरकार द्वारा निर्धारित सीमा से काफी अधिक थी, इसके बावजूद वे योजना का लाभ उठा रहे थे। वहीं कुछ लोग ऐसे भी थे जो लंबे समय से राशन की दुकानों से खाद्यान्न ले ही नहीं रहे थे। इसके अलावा मृत व्यक्तियों के नाम पर सक्रिय राशन कार्ड और एक ही परिवार के पास एक से अधिक कार्ड होने के मामले भी सामने आए जिन पर विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। इस व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए विभाग लगातार वेरिफिकेशन कैंपेन चला रहा है।
आय सीमा से अधिक वाले परिवारों पर सबसे बड़ी गाज
इस सघन जांच अभियान के दौरान सबसे अधिक संख्या उन राशन कार्डों की रद्द हुई है जिनमें परिवार की सालाना कमाई सरकार के तय मानकों से ज्यादा पाई गई थी। इस श्रेणी के करीब 1.44 लाख राशन कार्डों को विभाग ने अमान्य घोषित कर दिया है। इन निरस्त किए गए कार्डों से जुड़े 6.47 लाख से अधिक लोगों को अब राशन योजना के दायरे से बाहर कर दिया गया है। खाद्य विभाग के अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति निर्धारित मानदंडों से बेहतर हो चुकी है, वे रियायती दरों पर मिलने वाले राशन के पात्र नहीं माने जा सकते हैं। आय संबंधी तमाम जानकारियों के सत्यापन के बाद नियमों के तहत ही यह कार्रवाई अमल में लाई गई है।
लगातार 12 महीने तक राशन न लेने वालों के कार्ड निरस्त
केवल अधिक आय वाले ही नहीं, बल्कि उन धारकों के खिलाफ भी कड़ा एक्शन लिया गया है जिन्होंने एक लंबी अवधि से सरकारी कोटे का राशन नहीं उठाया था। विभाग की जांच में लगभग 35 हजार राशन कार्ड ऐसे मिले जिनका उपयोग लगातार 12 महीनों तक किसी भी प्रकार का राशन प्राप्त करने के लिए नहीं किया गया था। इन निष्क्रिय कार्डों से जुड़े लगभग 97 हजार से अधिक लाभार्थी अब पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम का हिस्सा नहीं रहेंगे। विभाग का सोचना है कि ऐसे उपयोगहीन कार्डों के सिस्टम में बने रहने के कारण कई बार वास्तविक जरूरतमंदों तक योजना का पूरा लाभ पहुंचने में बाधा आती है।
मृतकों और डुप्लीकेट कार्ड धारकों पर भी हुई सख्त कार्रवाई
सत्यापन अभियान के दौरान कुछ ऐसे राशन कार्ड भी प्रकाश में आए जो उन व्यक्तियों के नाम पर चल रहे थे जिनकी मृत्यु हो चुकी थी। ऐसे मामलों में लगभग 4,987 लाभार्थियों को सूची से हटा दिया गया है। इसके साथ ही, डुप्लीकेट राशन कार्ड के माध्यम से अनुचित लाभ उठाने वाले लगभग 29 हजार लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। एक ही व्यक्ति या परिवार के नाम पर कई कार्ड जारी होने की वजह से सरकारी योजना का दुरुपयोग हो रहा था। विभाग ने पूरी जांच और वेरिफिकेशन के बाद ऐसे सभी संदिग्ध और दोहरे कार्डों को अमान्य कर दिया है।
आगे भी जारी रहेगा सत्यापन अभियान और पारदर्शिता पर जोर
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने साफ कर दिया है कि राशन कार्डों की यह छानबीन और जांच का सिलसिला यहीं रुकने वाला नहीं है, बल्कि यह आगे भी जारी रहेगा। सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य यही है कि केवल पूरी तरह एलिजिबल और जरूरतमंद परिवारों को ही सरकारी राशन का फायदा मिल सके। विभाग की तरफ से आम नागरिकों से लगातार यह अपील की जा रही है कि वे अपने राशन कार्ड से जुड़ी सभी जानकारियों को समय-समय पर अपडेट रखें और किसी भी तरह की गलत सूचना देकर योजना का फायदा उठाने से बचें। अधिकारियों के मुताबिक इस तरह के कदमों से पूरी व्यवस्था में ट्रांसपरेंसी बढ़ेगी और सरकारी सहायता सीधे सही और पात्र लाभार्थियों तक पहुंचेगी।



















