यूरोपीय संघ के साथ भारत का बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता लागू होने में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है, लेकिन आर्थिक शोध संस्था जीटीआरआई ने इससे पहले खाद्य सुरक्षा के मोर्चे पर बड़ी चेतावनी दी है. जीटीआरआई का कहना है कि अगर भारत ने अपने खाद्य सुरक्षा नियमों को समय रहते मजबूत नहीं किया, तो इस ऐतिहासिक डील का पूरा फायदा उठाना मुश्किल हो जाएगा.
27 देशों का बाजार खुलेगा, पर जोखिम भी उतना ही बड़ा
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अमेरिका जैसे बड़े देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों पर तेजी से बातचीत की है. ब्रिटेन के साथ ऐसा समझौता पहले ही लागू हो चुका है और अब यूरोपीय संघ के 27 देशों के समूह के साथ भी एफटीए जल्द अमल में आने वाला है. इसी वजह से इस डील को मदर ऑफ आल डील नाम दिया जा रहा है, क्योंकि एक झटके में भारतीय कारोबार के लिए 27 बाजारों के दरवाजे खुल जाएंगे. लेकिन जितना बड़ा यह मौका है, उतना ही बड़ा खतरा भी छिपा है, क्योंकि नियमों को दुरुस्त किए बिना यह समझौता भारतीय किसानों और निर्यातकों के लिए घाटे का सौदा भी बन सकता है.
जीटीआरआई की रिपोर्ट में क्या सुझाव दिए गए
भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस साल के अंत तक एफटीए पर हस्ताक्षर होने और अगले साल की शुरुआत में इसके लागू होने की उम्मीद जताई जा रही है. इसी को ध्यान में रखते हुए जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव और सेंटर फॉर एनवॉयरमेंट एंड एग्रीकल्चर की शांत्वना दीक्षित ने मिलकर एक रिपोर्ट तैयार की है. इसमें सुझाव दिया गया है कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा, किसानों के हितों की रक्षा और कृषि निर्यात में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए भारत को एक आधुनिक, विज्ञान आधारित और दोतरफा खाद्य सुरक्षा प्रणाली विकसित करनी चाहिए.
कहां-कहां चूक हो रही है
रिपोर्ट के मुताबिक भारत को खेत से लेकर बंदरगाह तक अपने उत्पादों की ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करनी होगी, यानी यह पता होना चाहिए कि कोई खाद्य उत्पाद किस खेत से चलकर कहां तक पहुंचा. इसके अलावा कीटनाशकों के इस्तेमाल पर सख्त दिशानिर्देश लागू करने, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं की संख्या बढ़ाने और अवशेषों की नियमित जांच करने की जरूरत बताई गई है. साथ ही भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई, सीमा शुल्क विभाग और क्वारंटीन एजेंसियों को भी सख्ती से नियम लागू करने होंगे. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जिस तरह भारतीय निर्यात की जांच विदेशों में कड़ाई से होती है, उसी तरह भारत में आने वाले आयातित खाद्य पदार्थों की जांच भी उतनी ही सख्ती से होनी चाहिए. इसके लिए एक ठोस लैब टेस्टिंग व्यवस्था बनाने और मानकों पर खरे न उतरने वाले आयात को सीधे खारिज करने की सिफारिश की गई है.
यूरोप पहले ही खारिज कर चुका है 365 भारतीय उत्पाद
रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला आंकड़ा भी सामने आया है. यूरोपीय संघ अब तक भारतीय उत्पादों के खिलाफ 365 खाद्य सुरक्षा आदेश जारी कर चुका है. इन आदेशों की वजह से कई बार सप्लाई वापस मंगानी पड़ी है, माल नष्ट करना पड़ा है और सख्त जांच से गुजरना पड़ा है. दिलचस्प बात यह है कि यूरोपीय संघ में कीटनाशकों का इस्तेमाल भारत के मुकाबले 11 गुना ज्यादा होता है, फिर भी भारत में आने वाले खाद्य आयात की जांच काफी ढीली है. यानी एक तरफ यूरोप भारतीय माल को छोटी सी खामी पर भी लौटा देता है, दूसरी तरफ भारत में यूरोपीय सामान बिना सख्त जांच के आसानी से घुस आता है.
टैरिफ में छूट का फायदा घट सकता है
जीटीआरआई की रिपोर्ट का सार यह है कि अगर भारतीय कृषि निर्यात यूरोपीय संघ के कड़े खाद्य सुरक्षा मानकों की वजह से बार-बार अटकते रहे, तो एफटीए के तहत मिलने वाली शुल्क छूट का असली फायदा सीमित रह जाएगा. यानी टैरिफ कम होने के बावजूद अगर भारतीय सामान यूरोपीय सीमा पर ही खारिज कर दिया गया, तो किसानों और निर्यातकों को समझौते से कोई खास लाभ नहीं मिलेगा. यही वजह है कि रिपोर्ट में एफटीए लागू होने से पहले ही खाद्य सुरक्षा तंत्र को दुरुस्त करने पर जोर दिया गया है, ताकि भारत इस बड़े मौके का पूरा फायदा उठा सके और अपने बाजार को यूरोपीय उत्पादों के लिए एकतरफा ढंग से खुलने से भी बचाया जा सके.



















