देवघर जिले के किसान अब अपनी पुरानी और पारंपरिक कृषि पद्धतियों के दायरे से बाहर निकल रहे हैं। वे आधुनिक तौर-तरीकों को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के प्रयास में जुटे हैं। इस बदलाव की एक शानदार मिसाल देवघर प्रखंड के गोपीडीह गांव के रहने वाले किसान अंबिका कुशवाहा ने कायम की है। उन्होंने अपने खेतों में पपीते और ओल की एक साथ खेती करने का अनूठा तरीका इजाद किया है। उनका यह प्रयोग आसपास के इलाकों में चर्चा का विषय बना हुआ है और दूर-दराज से किसान उनके इस खेती के मॉडल को देखने और समझने के लिए उनके पास पहुंच रहे हैं।
क्यों बदली खेती की दिशा?
अंबिका कुशवाहा के अनुसार, पहले वे भी पारंपरिक रूप से धान और गेहूं जैसी फसलें उगाया करते थे, लेकिन उनमें होने वाली मेहनत की तुलना में मिलने वाला मुनाफा बहुत ही कम था। जब लागत और कमाई का हिसाब मेल नहीं खा रहा था, तब उन्होंने कुछ अलग और ज्यादा उत्पादक करने का निर्णय लिया। सबसे पहले उन्होंने अपने खेत में पपीते का बाग लगाया। कुछ समय बाद उन्होंने गौर किया कि पपीते के पौधों के बीच काफी जमीन खाली पड़ी है। यही वह मोड़ था जहां उन्होंने उस खाली जगह के सही इस्तेमाल के बारे में सोचा और ओल लगाने का फैसला लिया, जो उनके लिए बेहद फायदेमंद साबित हुआ है।
मिश्रित खेती का गणित
पपीते और ओल की खेती का तालमेल बहुत प्रभावी है। पपीता ऊंचाई में बढ़ता है, जबकि ओल की फसल जमीन के भीतर तैयार होती है। इस वजह से दोनों फसलें एक-दूसरे की जगह नहीं घेरतीं और जमीन के हर एक हिस्से का भरपूर उपयोग हो जाता है। इससे न तो पपीते को नुकसान होता है और न ही ओल की पैदावार प्रभावित होती है। बाजार में पपीते की मांग वर्षभर बनी रहती है और ओल के दाम भी अच्छे मिलते हैं, जिससे अंबिका कुशवाहा को पूरे साल आय का एक स्थिर जरिया मिल गया है।
सफलता के लिए प्रबंधन जरूरी
अंबिका कुशवाहा बताते हैं कि इस तरह की खेती में समय पर सही देखभाल बहुत महत्वपूर्ण है। फसल की बेहतरीन क्वालिटी बनाए रखने के लिए वे नियमित रूप से सिंचाई करने, समय-समय पर खरपतवार हटाने और जैविक खाद का प्रयोग करने पर जोर देते हैं। वे अन्य किसानों को सलाह देते हैं कि अगर कृषि विभाग के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में सही योजना बनाकर खेती की जाए, तो छोटी जमीन से भी काफी अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। मेहनत तो इसमें भी लगती है, लेकिन इसका आर्थिक परिणाम काफी सुखद होता है।
क्षेत्र में प्रेरणा का स्रोत
गोपीडीह गांव के किसान अंबिका कुशवाहा की यह पहल आज पूरे इलाके के लिए एक मिसाल बन गई है। उनकी सफलता यह स्पष्ट करती है कि यदि आधुनिक तकनीक और मिश्रित खेती के तालमेल को अपनाया जाए, तो किसानों की आय में बड़ा इजाफा किया जा सकता है। उनके इस सफल प्रयोग से प्रभावित होकर अब क्षेत्र के अन्य किसान भी इसी तरह की खेती को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। यह बदलाव न केवल व्यक्तिगत किसानों की आय बढ़ा रहा है, बल्कि स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में भी अहम भूमिका निभा रहा है।













