मानसून में फसलों का नुकसान और मिर्च का विकल्प
मानसून का मौसम दस्तक देने को तैयार है और देश के किसान खरीफ फसलों की तैयारियों में जुट गए हैं। वैसे तो बारिश को खेती के लिए वरदान माना जाता है, लेकिन सब्जियों की बागवानी करने वाले किसानों के लिए यह मौसम कभी-कभी बड़ी मुश्किलें खड़ी कर देता है। ज्यादा बारिश होने की वजह से खेतों में पानी जमा हो जाता है, जिससे टमाटर, बैंगन और फूलगोभी जैसी नाजुक फसलें सड़कर बर्बाद हो जाती हैं। ऐसे जोखिम भरे समय में किसान अक्सर ऐसी फसलों की तलाश करते हैं जिनमें कम लागत लगे और मुनाफा भी सुरक्षित रहे। इसी सिलसिले में देवघर के एक कृषि एक्सपर्ट ने किसानों के लिए एक बेहतरीन विकल्प सुझाया है जो कम खर्च में बंपर मुनाफा दे सकता है।
TrendKia की खास बातचीत: सिर्फ 1 रुपये में मिलेगा पौधा
देवघर के कृषि विशेषज्ञ अंबिका कुशवाहा ने TrendKia से विशेष बातचीत में बताया कि मानसून के इस मौसम में हरी मिर्च की खेती किसानों के लिए बेहद लाभकारी सौदा साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि किसान इस समय मिर्च की नर्सरी खुद तैयार कर सकते हैं या फिर सरकारी संस्थानों की मदद ले सकते हैं। सरकारी केंद्रों पर किसानों को बहुत ही रियायती दरों पर, यानी महज एक रुपये प्रति पौधे की कीमत पर मिर्च के पौधे आसानी से मिल जाते हैं। इससे किसानों की शुरुआती लागत बेहद कम हो जाती है। मानसून की शुरुआती हल्की और नियमित बारिश इन पौधों के विकास के लिए अमृत का काम करती है, जिससे फसल तेजी से बढ़ती है और पूरे खेत में हरियाली छा जाती है।
एक एकड़ से 2 लाख रुपये तक का मुनाफा
कृषि एक्सपर्ट अंबिका कुशवाहा के अनुसार, यदि कोई किसान एक एकड़ जमीन पर हरी मिर्च की खेती करने का मन बनाता है, तो उसे लगभग पांच से छह हजार पौधों की आवश्यकता होती है। अगर अच्छी किस्म के पौधों को सही दूरी पर रोपा जाए और उनकी सही तरीके से देखभाल की जाए, तो इसकी पैदावार बहुत शानदार होती है। हरी मिर्च की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी मांग बाजार में साल के बारह महीने बनी रहती है। घरों की रसोई से लेकर बड़े होटलों और ढाबों तक, हर जगह रोजाना मिर्च का इस्तेमाल होता है। इसलिए किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए किसी तरह की भागदौड़ या चिंता नहीं करनी पड़ती।
जैविक खाद का इस्तेमाल और बेहतर किस्में
बेहतर उत्पादन के लिए अंबिका कुशवाहा ने कुछ जरूरी सुझाव भी दिए हैं। उन्होंने बताया कि फसल की गुणवत्ता और पैदावार को बढ़ाने के लिए किसानों को रासायनिक उर्वरकों के बजाय जैविक खाद और गोबर की खाद का संतुलित उपयोग करना चाहिए। इसके साथ ही समय-समय पर खेतों की निराई-गुड़ाई करने और कीटों पर नियंत्रण रखने से पौधे पूरी तरह स्वस्थ रहते हैं। इस वैज्ञानिक तरीके को अपनाकर किसान हरी मिर्च से सालाना लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। बाजार में अच्छी पैदावार के लिए कई उन्नत किस्में भी उपलब्ध हैं, जैसे नांगवो की अजीता, वीएनआर और एडवांटा, जिनकी मांग भी व्यापारियों के बीच काफी अधिक रहती है।
कम जोखिम और कमाई का दूसरा विकल्प
हरी मिर्च की खेती का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इसमें नुकसान का खतरा न के बराबर होता है। अगर किसी वजह से किसान हरी मिर्च को समय पर गीली अवस्था में नहीं बेच पाते हैं, तो वे इसे सुखाकर लाल मिर्च के रूप में भी बाजार में उतार सकते हैं। सूखी मिर्च की बाजार में हमेशा भारी डिमांड रहती है और इसके दाम भी काफी अच्छे मिलते हैं। बेचने के एक से अधिक विकल्प मौजूद होने के कारण ही इसे सबसे कम जोखिम वाली खेती माना जाता है। वैज्ञानिक तकनीक और थोड़ी सूझबूझ से की गई यह खेती इस मानसून किसानों की तकदीर बदल सकती है।













