सोने की आसमान छूती कीमतों ने कोटा के सर्राफा बाजार की चमक पर ब्रेक लगा दिया है। एक तरफ सोना लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है, तो दूसरी तरफ दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ और खरीदारी का उत्साह दोनों ठंडे पड़ते जा रहे हैं। शादी और त्योहारी सीजन की तैयारियों के बीच कारोबारियों को उम्मीद थी कि बिक्री रफ्तार पकड़ेगी, लेकिन महंगे सोने ने आम परिवारों का पूरा बजट गड़बड़ा दिया है। नतीजा यह है कि नए आभूषणों की बिक्री लगातार घट रही है और लोग नए गहने खरीदने के बजाय पुराने जेवरों को बदलवाकर नई डिजाइन तैयार कराने को तरजीह दे रहे हैं।
शहर के प्रमुख ज्वैलर्स की मानें तो बीते कुछ महीनों में सोने के दाम जिस तेजी से चढ़े हैं, उसका सीधा झटका ग्राहकों की जेब पर लगा है। पहले शादी, सगाई और घर के आयोजनों के लिए लोग नए सेट, हार, चूड़ियां और दूसरे गहने खरीदते थे, लेकिन अब ज्यादातर परिवार घर में रखे पुराने जेवर पिघलवाकर या एक्सचेंज कराकर नई डिजाइन बनवा रहे हैं। इसी वजह से बाजार में नकद खरीदारी का हिस्सा घट गया है और नए आभूषणों की मांग कमजोर पड़ गई है। हालत यह है कि फिलहाल सर्राफा कारोबार में 30 से 40 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।
नए गहने खरीदने से बच रहे हैं ग्राहक
आमतौर पर जून-जुलाई और साल के आखिर में आने वाले विवाह सीजन के लिए इन्हीं दिनों से एडवांस बुकिंग शुरू हो जाती है। लेकिन इस बार तस्वीर बदली हुई है। कारोबारियों का कहना है कि पूछताछ और बुकिंग तो हो रही है, मगर ऑर्डर पक्का करने वाले ग्राहक बहुत कम हैं। कई परिवार इस उम्मीद में खरीदारी टाल रहे हैं कि आगे चलकर भाव शायद नीचे आ जाएं।
शादी सीजन की बुकिंग भी सुस्त
व्यापारियों को डर है कि अगर दाम इसी स्तर पर टिके रहे तो खुदरा कारोबार पर दबाव और बढ़ेगा। बाजार में ग्राहक आ तो रहे हैं, लेकिन खरीदने वालों का अनुपात गिर गया है। इसकी सबसे ज्यादा मार छोटे और मझोले ज्वैलर्स पर पड़ रही है। कारोबारी मानते हैं कि सोना भारतीय परिवारों की परंपरा और निवेश दोनों से जुड़ा है, इसलिए मांग पूरी तरह खत्म तो नहीं होगी, मगर जब तक कीमतों में स्थिरता नहीं आती, बाजार में यह सुस्ती बनी रह सकती है।
रोज बदलते भाव से उलझन में ग्राहक
सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि सोने के दाम में लगातार उतार-चढ़ाव के चलते ग्राहक खरीदारी का फैसला ही नहीं ले पा रहे। कई लोग दुकान तक पहुंचते हैं, डिजाइन देखते हैं, लेकिन कीमत सुनते ही इरादा टाल देते हैं। इस समय एक तोला सोने का भाव करीब 148800 रुपए के आसपास चल रहा है। पहले जो ग्राहक 50 से 100 ग्राम तक के आभूषण आसानी से खरीद लेते थे, वे अब वजन घटा रहे हैं या खरीदारी कुछ समय के लिए टाल दे रहे हैं। कुछ साल पहले तक शादियों में 15 से 20 तोला तक सोना खरीदना आम बात थी, लेकिन अब ज्यादातर परिवार 5 से 7 तोला तक ही सिमट गए हैं। बढ़ते दामों के कारण लोग हल्के वजन के गहनों को पहली पसंद बना रहे हैं। कई परिवार पुराने जेवर बदलवाकर नए गहने तैयार करा रहे हैं। दाम इतने ऊंचे पहुंच चुके हैं कि ग्राहक नए गहने खरीदने के बजाय पुराने आभूषणों का एक्सचेंज करा रहे हैं, जिससे नई ज्वैलरी की बिक्री पर असर पड़ा है। सरकार की ओर से आयात शुल्क लगाए जाने के बाद कारोबार की चाल और धीमी पड़ गई है।
सर्राफा व्यापारी प्रतीक सोनी कहते हैं कि अब सोना खरीदना आसान नहीं रह गया। एक तोले का भाव ही करीब डेढ़ लाख रुपए के आसपास चल रहा है। दाम इतने ज्यादा हैं कि इसे खरीद पाना मुश्किल है। उनके परिवार में अगले महीने शादी है, इसलिए घर में रखे पुराने जेवरात को ही नई डिजाइन में बनवा लिया है।
पुराने गहनों को नया रूप देने का चलन तेज
महंगे सोने के इस दौर में पुराने आभूषणों को नया लुक देने का चलन तेजी से बढ़ा है। गृहिणियां और परिवार घर में रखे पुराने हार, चेन, कंगन और दूसरे गहनों को आधुनिक डिजाइन में बदलवा रहे हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त पैसा कम खर्च करना पड़ता है और नई फैशन के मुताबिक गहने भी मिल जाते हैं। ज्वैलर्स के मुताबिक पिछले साल के मुकाबले एक्सचेंज और री-मेकिंग के ऑर्डर में बड़ा इजाफा हुआ है। सरकार की ओर से लगाए गए नए आयात शुल्क का सीधा असर भी कारोबार पर दिख रहा है। इन दिनों शहर के बड़े सर्राफा बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही घट गई है और ज्यादातर दुकानों पर सन्नाटा पसरा नजर आता है। फिलहाल ज्यादातर ग्राहक सिर्फ पुराने गहनों को नया रूप दिलवाने के लिए ही दुकानों तक पहुंच रहे हैं।
आभूषण कारीगरों पर मंडराया रोजगार का संकट
सोने के लगातार चढ़ते दामों की मार सिर्फ सर्राफा कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि गहने बनाने से जुड़े हजारों कारीगरों की रोजी-रोटी पर भी पड़ रही है। नए गहनों की मांग घटने से कारीगर इन दिनों काम की कमी से जूझ रहे हैं। सोने के रिकॉर्ड भावों के कारण नई ज्वैलरी की मांग कमजोर पड़ी है और इसका सीधा असर निर्माण के काम पर दिख रहा है। कारीगरों का कहना है कि पहले जहां रोजाना कई गहनों की डिजाइनिंग, कास्टिंग, पॉलिशिंग और फिनिशिंग का काम मिलता था, वहीं अब काम आधे से भी कम रह गया है।













