भारतीय वित्तीय बाजार में पिछले एक सप्ताह के दौरान सरकारी बॉन्ड यील्ड में लगातार बढ़त दर्ज की गई है। भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की नवीनतम बैठक के विवरण में दिखे सख्त रुख और अमेरिकी दीर्घकालिक बॉन्ड बाजार में जारी उथल-पुथल के असर से घरेलू ब्याज दरों में तेजी देखी जा रही है। बाजार विश्लेषकों का आकलन है कि दो वर्षीय भारतीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड उस स्तर तक वापस आ गई है जो 5 जून को घोषित रिज़र्व बैंक के नीतिगत पैकेज से पहले दर्ज की गई थी। इस नए घटनाक्रम के बाद बॉन्ड बाजार में नई रणनीतियों की सुगबुगाहट शुरू हो गई है।
बॉन्ड यील्ड में बदलाव और 5 जून के स्तर की वापसी
भारतीय दर बाजार में हाल के दिनों में हुआ बदलाव मुख्य रूप से केंद्रीय बैंक के बयानों और अंतरराष्ट्रीय बाजार के दबाव का परिणाम है। 2Y IGB की यील्ड में आई तेजी ने इसे 5 जून के रिज़र्व बैंक पैकेज के पूर्व स्तर पर लाकर खड़ा कर दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि फ्रंट एंड दरों में पहले ही काफी हद तक कड़े रुख को शामिल कर लिया गया है। इसका मतलब है कि वर्तमान दर स्तर अब निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं। यदि आगामी आर्थिक आंकड़े नरम आते हैं या रिज़र्व बैंक की ओर से नीतिगत बयानों में ढील के संकेत मिलते हैं, तो इन यील्ड्स में दोबारा गिरावट देखने को मिल सकती है, जिससे बॉन्ड की कीमतों में सुधार होगा।
यील्ड कर्व और ओआईएस स्प्रेड का नया गणित
बाजार के मौजूदा ढांचे को देखते हुए वित्तीय रणनीतिकार 2s5s IGB यील्ड कर्व में तेजी से ढलान आने की संभावना जता रहे हैं। इसके साथ ही 2Y IGB-OIS स्प्रेड में भी संकुचन होने के संकेत मिल रहे हैं। यह तकनीकी बदलाव दर्शाता है कि कम अवधि वाले सरकारी बॉन्ड में रिस्क-रिवॉर्ड का संतुलन अब निवेशकों के पक्ष में झुक रहा है। जो निवेशक दर चक्र के चरम पर पहुँचने का इंतजार कर रहे थे, उनके लिए ये स्तर प्रवेश के अच्छे अवसर प्रदान कर सकते हैं।
वैश्विक मुद्रा बाजार और केंद्रीय बैंकों की भूमिका
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में भी इस समय सतर्कता का माहौल बना हुआ है। यूरोपीय कारोबारी समय के दौरान गुरुवार को GBP/USD की जोड़ी अपने साप्ताहिक निचले स्तर के करीब 1.3600 के आंकड़े से नीचे कारोबार करती दिखी। हालांकि, निवेशक शुक्रवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के संबोधन से पहले बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं, जिससे मुद्रा के निचले स्तरों पर सहारा बना हुआ है। दूसरी तरफ EUR/USD 1.1650 के दायरे में स्थिर बना हुआ है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक से जुड़ी सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदें यूरोपीय मुद्रा को समर्थन दे रही हैं, जबकि अमेरिकी PCE आंकड़ों के बाद डॉलर सूचकांक में स्थिरता देखी जा रही है। बाजार की निगाहें मध्य पूर्व के राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिका में जारी होने वाले नए बेरोजगारी दावों के आंकड़ों पर टिकी हैं।
सोने की कीमतें और जैक्सन होल सम्मेलन पर नजरें
कमोडिटी बाजार में सोने का भाव गुरुवार के शुरुआती यूरोपीय सत्र में लगभग $4,600 प्रति औंस के आसपास स्थिर रहा। यह मूल्य पिछले सत्र में छुए गए साप्ताहिक निचले स्तर के काफी करीब है। सर्राफा बाजार में बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल सीमित नजर आती है क्योंकि व्यापारी शुक्रवार को जैक्सन होल संगोष्ठी का इंतजार कर रहे हैं। इस वार्षिक आर्थिक सम्मेलन में फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श अपना पहला भाषण देने वाले हैं। फेड अध्यक्ष के रूप में उनका यह पहला जैक्सन होल संबोधन होगा, जिससे सितंबर की मौद्रिक नीति और भविष्य की ब्याज दर दिशा को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिलने की उम्मीद है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक का यह रुख आने वाले दिनों में अमेरिकी डॉलर की चाल और बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों जैसे सोने के आकर्षण को तय करेगा।



















