कोटा में शिक्षा, कृषि और पर्यटन के क्षेत्रों को एक नई मजबूती देने के उद्देश्य से कोटा विश्वविद्यालय ने एक बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय ने पुणे स्थित एग्री टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एटीडीसी) के साथ एक महत्वपूर्ण पांच वर्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर मुहर लगाई है। इस साझेदारी का मुख्य मकसद विद्यार्थियों को इंडस्ट्री की आधुनिक जरूरतों के मुताबिक तैयार करना और उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव दिलाना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति की तर्ज पर की गई इस पहल से शोध, प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, प्लेसमेंट और आंत्रप्रेन्योरशिप के नए रास्ते खुलेंगे।
रोजगारोन्मुखी शिक्षा और नए पाठ्यक्रम
इस पूरी पहल की रूपरेखा कुलगुरु प्रो.डॉ. बी.पी. सारस्वत के मार्गदर्शन में तैयार की गई है। उनका मानना है कि बदलते वक्त में केवल किताबों तक सीमित रहना काफी नहीं है, बल्कि छात्रों को इंडस्ट्री से जोड़ना और फील्ड का व्यावहारिक ज्ञान देना भी उतना ही जरूरी है। इसी सोच के तहत विश्वविद्यालय ने तेजी से उभरते हुए क्षेत्र यानी कृषि पर्यटन को अपने अकादमिक दायरे में शामिल किया है।
डिग्री और डिप्लोमा के साथ उद्यम की प्रेरणा
पर्यटन एवं आतिथ्य विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अनुकृति शर्मा ने जानकारी दी कि इस एमओयू के दायरे में कृषि और ग्रामीण पर्यटन से जुड़े कई विशेष डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किए जाएंगे। इन सभी पाठ्यक्रमों का डिजाइन वर्तमान समय की मांग और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है, ताकि छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करते ही सीधे रोजगार हासिल कर सकें। इसके अलावा उन्हें नौकरी ढूंढने वाले के बजाय खुद का कृषि पर्यटन उद्यम शुरू करने वाले आंत्रप्रेन्योर बनने के लिए भी प्रेरित और प्रशिक्षित किया जाएगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय
इस समझौते के अवसर पर एग्री टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एटीडीसी) के प्रबंध निदेशक और देश में 'फादर ऑफ एग्री टूरिज्म कॉन्सेप्ट' के रूप में विख्यात पांडुरंग तावरे विशेष रूप से मौजूद रहे। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि कृषि पर्यटन को केवल सैर-सपाटे तक सीमित नहीं समझा जाना चाहिए, क्योंकि यह ग्रामीण आर्थिकी को सुदृढ़ करने और अन्नदाताओं की आय में इजाफा करने का एक बहुत ही असरदार जरिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस साझा अनुबंध के जरिए छात्रों को लाइव प्रोजेक्ट्स, ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग, स्टडी टूर्स, स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम्स, इंटर्नशिप और कैंपस प्लेसमेंट जैसी तमाम सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही उन्हें कृषि पर्यटन पर आधारित स्टार्टअप खड़े करने में भी पूरा मार्गदर्शन और सपोर्ट दिया जाएगा।
कक्षा से खेत तक का सफर और व्यावहारिक ज्ञान
कुलगुरु प्रो.डॉ. बी.पी. सारस्वत ने कहा कि नई शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य युवा पीढ़ी को केवल डिग्री थमाने की बजाय उन्हें हुनरमंद और रोजगार के काबिल बनाना है। यह एमओयू ठीक उसी दिशा में आगे बढ़ने का एक ठोस प्रयास है जो विद्यार्थियों को कक्षा से सीधे खेत तक जोड़कर धरातलीय अनुभव मुहैया कराएगा। इससे युवाओं की कार्यक्षमता और दक्षता में इजाफा होगा, जिससे वे इंडस्ट्री की हर कसौटी पर खरे उतर सकेंगे।
स्थानीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर पहचान
शिक्षाविदों का मानना है कि कृषि, पर्यटन और शिक्षा का यह अनूठा मेल ग्रामीण इलाकों के चौतरफा विकास में एक मील का पत्थर साबित होगा। इससे देश में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, किसानों के लिए कमाई के वैकल्पिक रास्ते बनेंगे और युवाओं के लिए रोजगार के साथ-साथ स्वरोजगार के भी बेहतरीन द्वार खुलेंगे। इसके अलावा देश की स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक धरोहरें और ग्रामीण जीवनशैली को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय फलक पर भी एक नई पहचान हासिल होगी।
ग्रामीण विकास में युवाओं की भागीदारी
विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारियों का यह स्पष्ट मानना है कि आने वाले समय में कृषि पर्यटन भारतीय पर्यटन सेक्टर का एक बेहद अहम और मजबूत हिस्सा बनकर सामने आएगा। ऐसे में यह पांच साल का करार छात्रों को आधुनिक कौशल, जमीनी तजुर्बा और उद्योग जगत से सीधा तालमेल उपलब्ध कराएगा। जानकारों का कहना है कि इस कदम से कोटा विश्वविद्यालय के पढ़ने वाले छात्र न केवल नौकरी पाने में अधिक सक्षम बनेंगे, बल्कि वे कृषि पर्यटन के क्षेत्र में नए नवाचार और उद्यमिता के जरिए भारत के ग्रामीण विकास में भी अपनी बहुत ही सार्थक और अहम भूमिका निभा पाएंगे।



















