वर्तमान समय में पारंपरिक नौकरियों के बजाय खुद के स्वरोजगार की ओर युवाओं का रुझान काफी तेजी से बढ़ रहा है। कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में नए अवसर तलाश रहे युवा अब अलग-अलग तरह के कृषि कार्यों को अपना रहे हैं। इनमें मुर्गी पालन, बकरी पालन और आधुनिक गाय पालन जैसे विकल्प प्रमुखता से शामिल हैं। विशेषकर डेयरी फार्मिंग को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। हालांकि, उत्साह के बावजूद शुरुआती दौर में कई नए पशुपालक इस असमंजस में पड़ जाते हैं कि किस तरह की गाय का चुनाव किया जाए और फार्म की रूपरेखा कैसी हो ताकि व्यवसाय घाटे का सौदा न बने। किसी भी डेयरी फार्म की सफलता मुख्य रूप से गायों की सही नस्ल और शुरुआत में उनकी संख्या पर टिकी होती है।
शुरुआती स्तर पर नस्ल और संख्या का सही तालमेल
डेयरी क्षेत्र से जुड़े अनुभवी किसान अनिल शर्मा बताते हैं कि गाय का पालन निश्चित तौर पर एक मुनाफे वाला काम है, बशर्ते इसकी योजना सही तथ्यों पर आधारित हो। अक्सर यह देखने में आता है कि ज्यादा दूध उत्पादन के लालच में नए लोग बिना सोचे-समझे किसी भी नस्ल के मवेशी खरीद लेते हैं। इसके अलावा अनुभव की कमी के बावजूद एक साथ बड़ी संख्या में गायें खरीद ली जाती हैं। जब सही प्रबंधन न होने के कारण फार्म असफल हो जाता है, तो लोगों का भरोसा इस पूरे कारोबार से टूट जाता है। वर्तमान में नए उद्यमियों में गिर और साहीवाल जैसी देसी नस्लों को पालने का काफी आकर्षण दिखाई दे रहा है।
क्रॉस ब्रीड और सीमित संख्या से अनुभव लेने की सलाह
इस कारोबार में असफलता से बचने के लिए अनिल शर्मा की सलाह है कि शुरुआत बड़े पैमाने पर करने के बजाय सिर्फ 5 गायों से करनी चाहिए। उनका कहना है कि नए लोगों को आरंभिक दौर में क्रॉस ब्रीड गायों के साथ काम करना चाहिए। कम से कम दो वर्षों तक सीमित पशुओं के साथ काम करके प्रबंधन, खान-पान, बीमारियों और दूध उत्पादन की बारीकियों का व्यावहारिक अनुभव हासिल करना चाहिए। जब दो साल का ठोस अनुभव प्राप्त हो जाए, तभी पशुओं की संख्या बढ़ाकर फार्म का विस्तार करना समझदारी भरा कदम साबित होता है। इस क्रमिक तरीके से काम करने पर नुकसान की आशंका लगभग समाप्त हो जाती है।
साहीवाल बनाम गिर नस्ल के दूध चक्र की तुलना
नस्लों के दूध उत्पादन चक्र को लेकर भी व्यावहारिक अंतर समझना बेहद आवश्यक होता है। साहीवाल नस्ल की गायों की एक बड़ी खूबी यह है कि वे गाभिन होने के बाद भी दूध उत्पादन को एकदम बंद नहीं करती हैं, बल्कि धीरे-धीरे कम करती हैं। यह नस्ल बछड़ा देने के समय तक भी लगातार दूध देती रहती है, जिससे पशुपालक को नियमित आमदनी मिलती रहती है। साहीवाल को स्वास्थ्य की दृष्टि से भी निरोग और मजबूत माना जाता है, इसलिए इसे फार्मिंग के लिए सबसे बेहतरीन विकल्पों में गिना जाता है। दूसरी तरफ, गिर गाय गाभिन होने के बाद अचानक से दूध देना बंद कर देती है, जिससे उत्पादन में अचानक गिरावट आ जाती है। यदि पशुपालक मिक्स ब्रीड यानी क्रॉस ब्रीड गायों का चयन करते हैं, तो उससे उत्पादकता और लाभ का स्तर और भी अधिक बेहतर हो सकता है।














