कर्नाटक में मॉनसून की बेरुखी और सूखे के गंभीर संकट का सामना कर रहे अन्नदाताओं के लिए राज्य सरकार ने सीधे आर्थिक संबल देने का कदम उठाया है। प्रभावित क्षेत्रों के प्रत्येक पात्र किसान को तात्कालिक राहत के तौर पर 2,500 रुपये की इनपुट सब्सिडी मुहैया कराई जाएगी। इस योजना के पहले चरण के जरिए राज्य के लगभग 45 लाख से लेकर 50 लाख किसानों तक नकद सहायता पहुँचाने का लक्ष्य तय किया गया है, ताकि वे बुआई और फसल के भारी नुकसान के बीच अपने बुनियादी कृषि खर्चों को संभाल सकें।
इस आरंभिक सहायता वितरण को अमल में लाने के लिए कर्नाटक सरकार के खजाने से लगभग 1,250 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की जाएगी। खास बात यह है कि राज्य प्रशासन ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष के तहत केंद्र सरकार से मिलने वाली वित्तीय मदद का इंतजार किए बिना अपने आंतरिक संसाधनों से यह फौरी मदद जारी करने का फैसला लिया है।
विधानसभा में राहत पैकेज की आधिकारिक घोषणा
कर्नाटक विधानसभा में राज्य भर के सूखे के हालात पर चल रही विस्तृत चर्चा के दौरान उप मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री जी परमेश्वर ने 24 सितंबर को इस राहत पैकेज का ऐलान किया। सदन को जानकारी देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि संकटग्रस्त क्षेत्रों के हर पात्र किसान को 2,500 रुपये की इनपुट सब्सिडी सीधे ट्रांसफर की जाएगी। उन्होंने सदन में रेखांकित किया कि राज्य सरकार केंद्र से एनडीआरएफ के प्रावधानों के तहत आर्थिक पैकेज की माँग को आगे बढ़ा रही है, लेकिन किसानों को तत्काल राहत पहुँचाने के लिए पहले चरण का 1,250 करोड़ रुपये का आवंटन राज्य स्तर पर शुरू किया जा रहा है।
सरकार ने इस बात पर भी जोर दिया है कि यह वित्तीय आंकड़ा अंतिम नहीं है। जैसे-जैसे राज्य के अलग-अलग हिस्सों में सूखे की स्थिति का तकनीकी और मैदानी आकलन आगे बढ़ेगा, अतिरिक्त संकटग्रस्त क्षेत्रों की पहचान की जाएगी। इसका सीधा अर्थ यह है कि सर्वेक्षण के आगामी चरणों में सहायता पाने वाले पात्र किसानों की कुल संख्या और राज्य के आवश्यक वित्तीय बजट दोनों में बढ़ोतरी हो सकती है।
राज्य के 240 में से 177 तालुकों में सूखा घोषित
कर्नाटक के एक बड़े भौगोलिक भूभाग पर इस समय गंभीर सूखे का असर फैल चुका है। विधानसभा में दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक राज्य के कुल 240 तालुकों में से 177 तालुकों को औपचारिक तौर पर सूखा प्रभावित घोषित किया जा चुका है। इसके अलावा कई अन्य क्षेत्रों में सूखे की गंभीरता की नियमित समीक्षा चल रही है। निर्धारित वैज्ञानिक और प्रशासनिक पैमानों के आधार पर लगभग 50 अन्य तालुकों को भी आगामी दिनों में सूखाग्रस्त सूची में शामिल किया जा सकता है।
किसी भी क्षेत्र को सूखा प्रभावित अधिसूचित करने के लिए प्रशासन एक व्यापक वैज्ञानिक और भौतिक प्रक्रिया अपना रहा है। इसके अंतर्गत वर्षा के सटीक आंकड़ों, फसलों की बुआई की वर्तमान स्थिति, उपग्रह से प्राप्त सैटेलाइट डेटा, मिट्टी की नमी के स्तर और स्थानीय जलाशयों में उपलब्ध जल भंडारण का सघन विश्लेषण किया जाता है। इन सभी तकनीकी संकेतकों की जाँच के बाद ही मैदानी स्तर पर अधिकारियों द्वारा जमीनी सत्यापन पूरा किया जाता है, जिसके बाद ही औपचारिक अधिसूचना जारी होती है।
40,000 करोड़ रुपये तक पहुँच सकता है कुल नुकसान का अनुमान
वर्तमान सूखे के चलते कर्नाटक के कृषि क्षेत्र को भारी वित्तीय क्षति पहुँची है। राज्य सरकार ने शुरुआती सर्वेक्षण के आधार पर लगभग 100 से 101 तालुकों में फसलों और कृषि गतिविधियों से जुड़ा कुल नुकसान करीब 18,000 करोड़ रुपये आंका है। इसी प्राथमिक आकलन के आधार पर कर्नाटक ने केंद्र सरकार से एनडीआरएफ के तहत लगभग 3,800 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की औपचारिक माँग रखी है।
हालाँकि सूखे का फैलाव जिस तरह बढ़ रहा है, उसे देखते हुए प्रशासन ने चेतावनी दी है कि कुल नुकसान का अंतिम दायरा लगभग 40,000 करोड़ रुपये तक पहुँच सकता है। यह अंतिम क्षति इस बात पर निर्भर करेगी कि मूल्यांकन के पूरे होने के बाद कुल कितने तालुकों को अंतिम रूप से सूखा प्रभावित माना जाता है और एनडीआरएफ के नियमों के तहत कितनी राशि की भरपाई स्वीकृत की जाती है।
















