झारखंड के बोकारो जिले में खेती की एक नई कहानी आकार ले रही है, जहां परंपरागत धान की खेती छोड़कर एक किसान ने सब्जी की खेती में हाथ आजमाया और देखते ही देखते अपनी आमदनी कई गुना बढ़ा ली। कसमार प्रखंड के पुरनीबगयारी गांव के भरत महतो आज इलाके के दूसरे किसानों के लिए मिसाल बन चुके हैं। उन्होंने सिर्फ 1 एकड़ जमीन पर मल्चिंग और मचान विधि से लौकी की खेती की और इससे 1 लाख रुपये से अधिक का शुद्ध मुनाफा अपने हाथ में लिया।
यूट्यूब और पड़ोसी किसानों ने बदली सोच
TrendKia से बातचीत में भरत महतो ने बताया कि पहले उनके खेत में सिर्फ धान ही लहलहाता था और कमाई सीमित रहती थी। बदलाव की शुरुआत तब हुई जब उन्होंने यूट्यूब पर खेती के वीडियो देखने शुरू किए और आसपास के प्रगतिशील किसानों के तौर-तरीके समझे। इसी प्रेरणा से उन्होंने आधुनिक और स्मार्ट खेती की राह पकड़ी और लौकी की फसल लगाने का फैसला किया, जो अब उनकी अच्छी आमदनी का जरिया बन गई है।
कब बोई, कब तैयार और कितना उत्पादन
भरत महतो के मुताबिक उन्होंने मार्च महीने में लौकी की बुवाई की थी। यह ऐसी फसल है जो बुवाई के 50 से 60 दिनों के भीतर तैयार हो जाती है और इसके बाद लगातार 2 सीजन तक तोड़ाई कर मुनाफा कमाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि 1 एकड़ में लौकी की खेती पर करीब 40 हजार रुपये की लागत आई। अगर देखभाल और तकनीक सही रहे तो पूरे सीजन में 70 से 80 क्विंटल तक उत्पादन आसानी से मिल जाता है।
लागत 40 हजार, कमाई सवा लाख से ऊपर
मुनाफे का गणित समझाते हुए भरत महतो ने बताया कि इस समय बाजार में लौकी की थोक कीमत 20 से 30 रुपये प्रति किलो चल रही है। अगर सबसे कम यानी 20 रुपये प्रति किलो के औसत भाव से भी बिक्री हो, तो कुल आमदनी करीब 1.60 लाख रुपये बैठती है। इसमें से लागत घटा देने पर उनके हाथ में करीब 1.20 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा आता है। एक ही फसल से इतनी कमाई होने के कारण वह इसे किसानों के लिए बेहतर विकल्प मानते हैं।
जैविक कीटनाशक पर भरत महतो की सलाह
दूसरे किसानों को आगाह करते हुए उन्होंने कहा कि लौकी की फसल पर अक्सर कीड़ों और फल सड़न का असर ज्यादा देखने को मिलता है, इसलिए समय पर निगरानी और देखरेख बेहद जरूरी है। उनकी सलाह है कि फसल बचाने के लिए रासायनिक कीटनाशकों के बजाय ज्यादा से ज्यादा जैविक कीटनाशक का इस्तेमाल किया जाए, ताकि मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहे और उत्पादन भी बेहतर हो।













