बुधवार को चीन ने अमेरिका की हालिया व्यापारिक पाबंदियों के जवाब में कई सख्त आर्थिक कदम उठाने की घोषणा की। वाशिंगटन द्वारा नए टैरिफ और व्यापारिक प्रतिबंध लागू किए जाने के बाद बीजिंग ने अमेरिका की 6 प्रमुख कंपनियों को अपनी ब्लैकलिस्ट में शामिल कर दिया है। इसके अलावा, चीन ने अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले ड्रोन और उनसे जुड़े संवेदनशील पुर्जों पर एक्सपोर्ट कंट्रोल को भी काफी कड़ा कर दिया है। चीन का यह कदम अमेरिका की उन नीतियों के विरोध में आया है, जो जबरन मजदूरी और राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर चीनी उत्पादों पर लगाई गई थीं।
अमेरिका की व्यापार नीति और चीन का कड़ा जवाब
अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक परिदृश्य में यह तनाव तब बढ़ा जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कारोबारी नीतियों के तहत चीन सहित 50 से अधिक देशों पर नए शुल्क थोपे गए। इससे पहले जुलाई महीने में भी अमेरिका ने 60 देशों पर टैरिफ का बड़ा असर डाला था, जिसमें भारत पर 10 प्रतिशत का अतिरिक्त कर लगाया जाना शामिल था। वाशिंगटन का तर्क है कि इन टैरिफ का मुख्य उद्देश्य अमेरिका के अनुचित व्यापार घाटे को ठीक करना और घरेलू अर्थव्यवस्था को सुरक्षा प्रदान करना है।
हालांकि, चीन ने इस तर्क को पूरी तरह खारिज करते हुए अमेरिका पर उसके वैध अधिकारों का हनन करने का आरोप लगाया है। चीनी वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका द्वारा उठाए गए इन अनुचित कदमों से चीन के जायज हितों और अधिकारों को गंभीर नुकसान पहुंचता है। प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि ऐसी परिस्थितियों में बीजिंग के पास अपने हितों की रक्षा के लिए जरूरी जवाबी कदम उठाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है। इसी रणनीति के तहत अमेरिका को ड्रोन, उनके महत्वपूर्ण घटकों और संबंधित तकनीकों के निर्यात पर कड़े नियंत्रण लागू किए गए हैं।
6 अमेरिकी कंपनियों पर लगा प्रतिबंध
बीजिंग की इस नई कार्रवाई के केंद्र में 6 अमेरिकी कंपनियां हैं, जिन पर पूर्ण व्यापारिक प्रतिबंध लगा दिया गया है। इन प्रतिबंधित फर्मों में भू-विज्ञान अनुसंधान क्षेत्र से जुड़ी संस्था स्ट्रेटम रिजर्वोयर और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी एप्लाइड डीएनए साइंसेज मुख्य रूप से शामिल हैं। जारी किए गए आदेशों के मुताबिक, अब किसी भी चीनी नागरिक या चीनी संगठन को इन 6 अमेरिकी कंपनियों के साथ किसी भी प्रकार का लेन-देन करने, व्यावसायिक सहयोग बढ़ाने या अन्य गतिविधियों में भाग लेने से पूरी तरह रोक दिया गया है।
शिनजियांग विवाद और मानवाधिकार का मुद्दा
चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने अपनी कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा कि ब्लैकलिस्ट की गई इन 6 कंपनियों ने शिनजियांग क्षेत्र से जुड़े अमेरिका के गैर-कानूनी पाबंदियों वाले कदमों को समर्थन दिया था। बीजिंग का मानना है कि इन कंपनियों की गतिविधियां चीन की संप्रभुता के खिलाफ थीं और उनका स्वरूप अत्यंत गंभीर है।
दूसरी ओर, शिनजियांग का मुद्दा लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। संयुक्त राष्ट्र ने पूर्व में कई बार शिनजियांग में निवास करने वाले अल्पसंख्यक उइगर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ संभावित मानवता विरोधी अपराधों के विषय को उठाया है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा व्यक्त की गई इन चिंताओं और अंतरराष्ट्रीय आरोपों को बीजिंग प्रशासन लगातार खारिज करता रहा है और उन्हें अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करार देता है।


















