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दुबई का सोना भारत आने से क्यों रुका, क्या तस्करी का खतरा फिर से बढ़ेगाव्यापार
27 जुल॰ 2026, 5:10 pm (19 दिन पहले)· 0

दुबई का सोना भारत आने से क्यों रुका, क्या तस्करी का खतरा फिर से बढ़ेगा

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सोने के आयात का कोटा तय न होने के कारण दुबई के बुलियन बाजार में सोना फंस गया है। जानकारों का मानना है कि इस स्थिति से देश में सोने की तस्करी बढ़ने की आशंका पैदा हो सकती है।

दुबई से भारत में हर साल बड़े पैमाने पर सोने का आयात किया जाता है। संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई के साथ भारत की एक व्यापारिक संधि यानी CEPA मौजूद है, जिसके तहत स्वर्ण आयात करने पर एक्साइज ड्यूटी में 1 फीसदी की राहत मिलती है। यह शुल्क 15 फीसदी से घटकर 14 फीसदी पर आ जाता है। हालांकि, इस छूट का लाभ उठाने के लिए सरकार हर साल एक निश्चित स्वर्ण आयात कोटा निर्धारित करती है। केवल इस तय कोटे के दायरे में आने वाले सोने पर ही उत्पाद शुल्क में रियायत का फायदा मिलता है। समस्या यह उत्पन्न हो गई है कि सरकार ने अभी तक वित्त वर्ष 2026-27 के लिए किसी भी कोटे का निर्धारण नहीं किया है। इस प्रशासनिक देरी के कारण दुबई के सर्राफा बाजार में मौजूद स्वर्ण निर्यातकों का माल वहीं अटका हुआ है।

देश के भीतर बैठे आयातक भी इस खेप के इंतजार में हैं क्योंकि उन्हें इसके जरिए बेहतर और किफायती सौदे की उम्मीद रहती है। लेकिन कोटे का ऐलान न होने के कारण इन कारोबारियों के हाथ भी फिलहाल खाली बैठे हैं। बाजार के जानकारों का आकलन है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो अवैध तरीकों यानी तस्करी को बढ़ावा मिल सकता है। व्यापार विशेषज्ञ और बुलियन बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि जब कानूनी और आधिकारिक माध्यमों से कोटा मिलने में विलंब होता है, तो बाजार में अनधिकृत या तस्करी के रास्तों के जरिए सोने के प्रवेश का जोखिम काफी हद तक बढ़ जाता है।

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स्वर्ण आयात कोटे के प्रावधान के तहत बीते वर्ष देश के व्यापारी कुल 180 टन सोना मंगवा सकते थे। उपलब्ध जानकारियों के अनुसार, कारोबारियों ने 450 टन सोने के आयात के वास्ते आवेदन कर दिया था, जो निर्धारित सीमा से बहुत ज्यादा था। पहली नजर में यह सवाल उठता है कि जब मांग तय कोटे से अधिक थी, तो इसका समाधान क्यों नहीं निकला। इस पहेली का जवाब एक पुराने विवाद में निहित है। पूरी स्थिति को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि 180 टन का यह स्वर्ण आयात लाइसेंस एकमुश्त नहीं बांटा जाता है, बल्कि यह प्रक्रिया दो से तीन चरणों में पूरी होती है। व्यापारियों ने इस प्रक्रिया के पहले ही चरण में गड़बड़ी का आरोप लगा दिया था।

यह पूरा मामला आगे चलकर राजस्थान हाईकोर्ट तक जा पहुंचा, जहां अदालत ने लाइसेंस वितरण के दूसरे चरण पर रोक लगा दी। जब तक यह कानूनी विवाद कुछ हद तक सुलझा और लाइसेंस बांटने की प्रक्रिया दोबारा शुरू हुई, तब तक काफी देर हो चुकी थी। विदेशी सर्राफा बाजार में आर्डर बुक करना, भुगतान का निपटान करना और माल को देश तक सुरक्षित पहुंचाना, ये सभी कार्य वित्त वर्ष 2026 के भीतर समेटना असंभव हो गया था और इसके बाद वित्तीय वर्ष ही बदल गया। वर्तमान पेचीदगी यह है कि जब पिछला कोटा ही पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, तो सरकार नए लाइसेंस जारी करेगी या नहीं, इसको लेकर गहरी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि नया कोटा तभी आवंटित किया जा सकेगा जब या तो पिछला कोटा खत्म हो जाए या फिर राजस्थान उच्च न्यायालय में लंबित मामला पूरी तरह से सुलझ जाए।

बाजार और व्यापार पर पड़ने वाले प्रभाव

कस्टम ड्यूटी का नुकसान: CEPA समझौते के तहत आयात करने पर 1 प्रतिशत कम शुल्क लगता है, जिससे व्यापारियों को आर्थिक लाभ मिलता है। इस विलंब की वजह से कारोबारियों को या तो सामान्य और ऊंचे कर दरों पर सोना मंगवाना पड़ रहा है या फिर उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

सप्लाई चेन पर असर: देश के भीतर आने वाले त्योहारी और शादी-ब्याह के सीजन से ठीक पहले यदि सोने की आपूर्ति में बाधा या देरी आती है, तो इसका सीधा असर घरेलू बाजार में सोने के प्रीमियम और कीमतों पर पड़ता है।

राजस्व को नुकसान: यदि इस प्रकार की देरी के चलते अनौपचारिक और अवैध रास्तों से सोना भारतीय बाजारों में घुसपैठ करता है, तो इससे सरकार को मिलने वाले राजस्व यानी टैक्स का भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

सवाल-जवाब

दुबई से आने वाला सोना क्यों फंसा हुआ है?
सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए स्वर्ण आयात कोटा तय न किए जाने के कारण दुबई के बुलियन बाजार में सोना फंसा हुआ है।
CEPA समझौते के तहत कितना टैक्स लाभ मिलता है?
इस ट्रेड डील के तहत सोना आयात करने पर एक्साइज ड्यूटी 15 फीसदी से घटकर 14 फीसदी रह जाती है, जिससे 1 फीसदी की राहत मिलती है।
पिछले साल कुल कितना सोना आयात करने की अनुमति थी?
गोल्ड इम्पोर्ट कोटा के तहत पिछले साल भारत में व्यापारी कुल 180 टन सोना आयात कर सकते थे, जबकि आवेदन 450 टन के लिए आए थे।
लाइसेंस बंटवारे में कानूनी अड़चन कहां आई थी?
व्यापारियों द्वारा पहले चरण में धांधली का आरोप लगाने के बाद मामला राजस्थान हाईकोर्ट पहुंचा, जिसने दूसरे चरण के लाइसेंस बंटवारे पर रोक लगा दी थी।
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